gujarat elections assembly elections results major challenge in front of Rahul Gandhi/अब राहुल गांधी के सामने खड़ी होगी ये बड़ी समस्या

हार के बाद भी गुजरात से क्या हासिल कर पाए राहुल गांधी

दरअसल गुजरात का यह चुनाव देश के दो बड़े सियासी दलों की साख का ही सवाल नहीं था, बल्कि इसके नतीजे 2019 लोकसभा चुनाव की पटकथा भी लिखेंगे.

By: | Updated: 18 Dec 2017 07:13 PM
gujarat elections assembly elections results major challenge in front of Rahul Gandhi
गुजरात विधानसभा चुनाव रिजल्ट 2017: 2014 की जीत के बाद से ही पूरे देश में दौड़ रहा बीजेपी का 'अश्वमेध घोड़ा' गुजरात में भी बाउंड्री पार तो कर गया है. लेकिन गुजरात में मिशन 150 का नारा देने वाली बीजेपी को यहां तक पहुंचाना मोदी-शाह की जोड़ी के लिए काफी मशक्कत भरा रहा. कुल मिलाकर कह सकते हैं कि मोदी गुजरात में सत्ता पर बीजेपी को काबिज कराने में कामयाब रहे.

बीजेपी के लिए मुश्किल चुनाव

22 साल से सत्ता में बैठी बीजेपी के लिए जीत की राह आसान नहीं थी. उसके अंदरूनी ऊठा-पटक, पाटीदार आंदोलन, ऊना आंदोलन... जैसे तमाम मुद्दे बीजेपी के खिलाफ थे. फिर भी गुजरात में जीत दर्ज कर नरेन्द्र मोदी ने बता दिया कि उनके अपने घर में उन्हें मात देना इतना आसान नही है. लेकिन किसी को भी ये मानने में गुरेज नही होगा कि प्रधानमंत्री को उनके ही घर में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने टक्कर जोरदार दी.

दरअसल गुजरात का यह चुनाव देश के दो बड़े सियासी दलों की साख का ही सवाल नहीं था, बल्कि इसके नतीजे 2019 लोकसभा चुनाव की पटकथा भी लिखेंगे. आज बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के कहा कि ये जीत वंशवाद, जातिवाद और तुष्टिकरण से ऊपर की जीत है. ये विकासवाद की जीत है. 2019 में भी पीएम मोदी के नेतृत्व में जनता का भरोसा जीतेंगे. बीजेपी का लक्ष्य स्पष्ट है. अगले साल के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ 2019 के लिए पार्टी अभी से अपनी जमीन औऱ पुख्ता करने लगी है.

नए अंदाज में नज़र आए राहुल 

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी नए अंदाज में नजर आए थे. चुनाव प्रचार के समय उनके भाषणों में भी परिपक्वता नजर आ रही थी. सोशल मीडिया जो कि शुरूआत से ही बीजेपी का मजबूत पक्ष रहा है वहां भी इस चुनाव में कांग्रेस और राहुल गांधी दोनों ही जमकर बीजेपी और पीएम मोदी को घेर रहे थे. गुजरात में इस बार चाहे पटेल आरक्षण का मुद्दा हो या फिर जातिगत समीकरण हर मुद्दों पर कांग्रेस बढ़त बनाती नजर आ रही थी.

गुजरात में 22 साल से सत्ता से बाहर कांग्रेस का संगठन चरमराया हुआ है. पीएम मोदी के गुजरात छोड़ने के बावजूद कांग्रेस के पास सीएम का मजबूत चेहरा नहीं था. गुटों में बंटी स्थानीय ईकाई को एकजुट करना एक बेहद मुश्किल संगठनात्मक कौशल था. गुजरात के इस सियासी संग्राम में इन तीनों बड़ी समस्याओं के साथ भी शतरंज पर अपनी सधी हुई चालें चलीं. हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर इन तीन गुजरात के लड़कों को अपने साथ लेकर राहुल ने एक मजबूत विकल्प दिया.

मजबूत नेता के तौर पर उभरे

इस चुनाव में मौका रहने के बावजूद राहुल गांधी लगातार हारने वाले नेता की छवि से बाहर नहीं निकल पाए. कांग्रेस अध्यक्ष बनने के साथ ही उनकी शुरूआत दो औऱ राज्यों में हार के साथ हुई है. ऐसे में उनपर सवाल उठने लाजिमी है. लेकिन इस चुनाव में गुजरात में कांग्रेस के प्रचार की कमान संभाले राहुल ने पहली बार एक परिपक्व नेता की तरह पीएम नरेंद्र मोदी के अपने 'घर' और बीजेपी के गढ़ में जोरदार चुनौती दी. पहली बार राहुल गांधी एक मजबूत नेता के तौर पर खुद को स्थापित कर अपने को पीएम मोदी के सामने खड़ा कर लिया है. जाहिर है इससे हार के बावजूद मायूस कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अपने नए नेतृत्व के प्रति भरोसा बढ़ेगा.

मोदी बनाम राहुल

अब यह स्पष्ट हो गया कि आगामी 2019 की लड़ाई में दो चेहरे आमने-सामने होंगे, पीएम नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी. अब राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पार्टी का पूरा कंट्रोल लेने के साथ-साथ गठबंधन के लिए क्षेत्रीय दलों को भरोसा में लेने की है. उन्हें बिखरे हुए विपक्ष को एक साथ लाकर 2019 के लिए एक नया मजबूत गठजोड़ बनाने की है. नये गठजोड़ के साथ नये नैरेटिव के साथ सामने आना होगा तभी 2019 के चुनाव में युवा नेतृत्व चुनौती के तौर पर खड़े होते दिखेगा.

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