गुजरात हाईकोर्ट ने उठाए मुस्लिमों की एक से ज्यादा शादी पर सवाल

By: | Last Updated: Thursday, 5 November 2015 8:04 AM

अहमदाबाद : गुजरात हाईकोर्ट ने एक केस पर सुनवाई के दौरान समान नागरिक संहिता की जरूरत पर जोर दिया है. कोर्ट की ये टिप्पणी जफर अब्बास नाम के एक शख्स की अर्जी पर आई है. अब्बास ने गुजरात हाईकोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उस प्रावधान के तहत खटखटाया था जिसमें एक से ज्यादा शादियों की इजाजत है.

 

अब्बास को हाईकोर्ट जाने की नौबत इस लिए आई क्योकि उसकी पहली पत्नी शाजिदा ने भावनगर की अदालत में आईपीसी को सेक्शन 494 के तहत मामला दर्ज कराया था. आईपीसी के सेक्शन 494 के तहत एक से ज्यादा शादियों पर प्रतिबंध है. लेकिन, अब्बास ने अपनी याचिका में यह कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बहुपत्नी की इजाजत है.

 

इस मामले में हाईकोर्ट ने अब्बास को राहत तो दी लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ को लेकर भी सवाल खड़ा किया. कोर्ट ने कहा है कि इस्लाम में एक से ज्यादा शादियों की इजाजत उस दौर में दी गई थी जब युद्ध के कारण बड़ी मात्रा में विधवाएं समाज के अंदर होती थी. उनके हित के लिए पुरुषों के एक से ज्यादा शादियों की इजाजत दी गई थी. जिसे मौजूदा दौर में सही नहीं ठहराया जा सकता है.

 

क्योंकि वैसी परिस्थितियां अब नहीं है. कोर्ट ने यह कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करना विधायिका का काम है लेकिन वक्त की मांग है कि इसे लागू किया जाए. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि यूनिफॉर्म सिविल कोड फिलहाल नहीं है इसलिए मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत याचिकाकर्ता को आईपीसी के सेक्शन 494 से राहत दी जा रही है.

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Web Title: Gujarat High court advised for Common civil code
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