पुलिस ऐसा करे तो फिर दंगाइयों और संरक्षकों के बीच क्या अंतर हैः गुजरात हाई कोर्ट

By: | Last Updated: Thursday, 27 August 2015 1:59 PM
gujrat high court

अहमदाबाद: गुजरात में आरक्षण आंदोलन के समय पुलिसकर्मियों द्वारा वाहनों में तोड़फोड़ किये जाने के मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से रिपोर्ट पेश करने को कहा है. घटना के दौरान सीसीटीवी में कैद हुए तस्वीरों पर संज्ञान लेते हुए गुजरात हाई कोर्ट पुलिस आयुक्त को आदेश दिया कि दो हफ्ते में मामले में जांच कर रिपोर्ट पेश करे.

 

 

हाई कोर्ट  ने कहा, ‘‘सीसीटीवी फुटेज दिखाते हैं कि पुलिस निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में शामिल है. अगर पुलिस ऐसा करती है तो दंगाइयों और संरक्षकों के बीच क्या अंतर है.’’ अदालत शहर के वकील विराट पोपट और उनके साथी तीर्थ दवे की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिनका आरोप था कि 25 अगस्त को करीब 40 पुलिसकर्मी उनकी हाउसिंग सोसायटी में आए और उन्होंने वाहनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी. याचिकाकर्ताओं ने घटना के सीसीटीवी फुटेज भी जमा किये हैं.

 

मामले में दलीलों के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के अधिकारियों से पूछा कि इसके लिये जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गयी.

 

हाई कोर्ट ने कहा, ‘‘इससे जनता में क्या संदेश जाएगा? शीर्ष अधिकारियों को इसे बहुत गंभीरता से लेना चाहिए ताकि पुलिस में जनता का विश्वास मजबूत हो.’’ जस्टिस जे बी पारदीवाला ने शहर के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि जांच करें और एक पखवाड़े के अंदर रिपोर्ट पेश करें.

 

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार, गृह विभाग, पुलिस महानिदेशक, शहर पुलिस आयुक्त और सोला थाने के प्रभारी को नोटिस भी जारी किये.

 

कथित घटना उस दिन हुयी जब मंगलवार को पटेल समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन की अगुवाई कर रहे हार्दिक पटेल की हिरासत के बाद शहर में आगजनी और हिंसा की घटनाएं हुईं. याचिकाकर्ताओं ने कहा, ‘‘आतंक का माहौल बनाया गया. पुलिस ने बिना किसी वजह निजी सोसायटी में हवा में चार राउंड गोली चलाई और आंसूगैस के गोले भी छोड़े.’’ उन्होंने याचिका में मांग की है कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.

 

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्पष्ट रूप से नागरिकों के बुनियादी और वैधानिक अधिकारों का संरक्षण करने में नाकाम रही है.

 

याचिका के मुताबिक पुलिसकर्मी सोसायटी में घुस आये और वाहनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी. उन्होंने आंसूगैस के गोले छोड़ने शुरू कर दिये जबकि वहां के निवासी आंदोलन में शामिल नहीं थे.

 

याचिका में कहा गया, ‘‘घटना पुलिस द्वारा सभी नियमों की अवहेलना करते हुए अधिकारों के दुरपयोग की कहानी बयां करती है.’’

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