क्या भक्तों को गुमराह करने लगे हैं गुरू ?

By: | Last Updated: Saturday, 12 July 2014 1:34 PM
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नई दिल्ली: आज गुरुपूर्णिमा है . एक ऐसा मौका जब हिंदू मत को मानने वाले अपने गुरुओं की पूजा अर्चना करते हैं और गंगा में डुबकी लगाते हैं. लेकिन इस बार इस मौके पर एक बड़ी बहस खड़ी हो गई है कि क्या गुरु भी गुमराह कर रहे हैं. ऐसा क्यों.

 

गंगा किनारे भक्तों की भीड़ है, मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा है . साईं मंदिरों में भी आ जुटे हैं साईं भक्त. हिंदू कैलेंडर के मुताबिक आषाढ़ के महीने की ये पूर्णिमा गुरु से आशीर्वाद लेने का पर्व है.

 

गुरुपूर्णिमा क्या है?

 

गुरुपूर्णिमा की तिथि की अहमियत दो बड़ी वजहों से है.

 

पहली वजह है कि ब्रह्म की खोज को लेकर सबसे अहम ग्रंथ ब्रह्मसूत्र की रचना इसी तिथि को शुरु हुई थी . वेद, गीता और ब्रह्मसूत्र हिंदू धर्म के तीन मुख्य आधार माने जाते हैं.

 

दूसरी वजह है कि महर्षि वेदव्यास की जन्मतिथि भी गुरुपूर्णिमा को ही माना गया है. महर्षि वेदव्यास ने चारों वेदों और महाभारत की रचना की थी.

 

‘गुरु’ हैं कौन?

 

गुरु का शाब्दिक अर्थ है

गु – यानी अंधकार

रु – यानी रोकने वाला

इस तरह गुरु के मायने हुए जो अज्ञान के अंधकार को दूर करे.

 

अंधकार कौन दूर करता है . भगवान या गुरु . ये बहस 16 वीं शताब्दी में भक्ति धारा के संत कबीर ने ही शुरू कर दी थी. हिंदू धर्म में सबसे बड़े गुरू का दर्जा शंकराचार्य को मिला है. शंकराचार्य, करीब आदि गुरु शंकराचार्य की करीब साढ़े बारह सौ साल पुरानी परंपरा में से आते हैं जिन्होंने सबसे पहले वेदों और ब्रह्मसूत्र जैसे ग्रंथों की आम श्रद्धालुओं के लिए व्याख्या की थी. शंकराचार्य की भी पूजा की जाती है.

 

दूसरी तरफ साईं भक्त 19 वीं सदी के संत शिरडी के साईं बाबा को भगवान भी मानते हैं और अपने सब दुख हरने वाला गुरू भी. साईं भक्त जिसमें हिंदू भी शामिल हैं गुरुपूर्णिमा के मौके पर साईं बाबा की पूजा करते हैं. हालांकि साईं बाबा ने अपने जीवन में ना तो खुद कभी भगवान का दर्जा दिया और ना ही गुरू का. लेकिन हिंदू धर्मगुरु शंकराचार्य साईं बाबा की पूजा पर सवाल खड़ा किया है. वो तो यहां तक कह रहे हैं जो साईं बाबा की पूजा करते हैं वो गुमराह हैं. उन्हें शुद्ध होना होगा.

 

सवाल ये है कि क्या भक्त सचमुच गुमराह हो गए हैं. ये बहस तो उन गुरुओं को लेकर है जिनके दामन पर कोई दाग नहीं है लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जिन पर आरोपों के दाग हैं. गुरुपूर्णिमा के मौके पर जेल की चौखट पर भी मत्था टेकने आ पहुंचे हैं भक्त. जेल के भीतर हैं यौन उत्पीड़न, बलात्कार जैसे गंभीर आरोप में गिरफ्तार आसाराम और बाहर हो रही है उनकी पूजा. आस्था को करोड़ों के कारोबार में बदल देने वाले ये गुरू भी पूजे जा रहे हैं और सवाल ये है कि ये गुरु भक्तों के जहन में अपनी जगह कैसे बनाए रखते हैं . अज्ञान हरने वाले गुरु क्या भक्तों को गुमराह करने लगे हैं?

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