आंकड़ों की जुबानी, बच्चों पर अन्याय की कहानी

आंकड़ों की जुबानी, बच्चों पर अन्याय की कहानी

स्कूलों से आ रही खबरें खौफ पैदा कर रही हैं, बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता को भी ऐसी खबरें सहमा कर रख देती हैं.

By: | Updated: 09 Sep 2017 06:53 PM
नई दिल्ली: हरियाणा के गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में 7 साल के प्रद्युम्न की हत्या के बाद भारी आक्रोश देखा जा रहा है. दूसरी क्लास में पढ़ने वाले एक बच्चे की स्कूल परिसर में गला रेत कर हत्या की खबर के बाद पूरे देश में स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की सुरक्षा पर एक तरह से सवालिया निशान खड़े हो गए हैं. एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल जिसकी 3 महीने की फीस 45000 रुपये दी जा रही थी उसमें इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया गया तो सामान्य स्कूलों में सुरक्षा के इंतजामात कैसे होंगे, इसको सोचकर भी डर लगता है.

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स्कूल में जब बच्चे सुरक्षित नहीं हैं तो और कहां होंगे? हाल की चर्चा में आयीं खबरों पर ध्यान दें तो स्कूलों से आ रही खबरें खौफ पैदा कर रही हैं, बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता को भी ऐसी खबरें सहमा कर रख देती हैं.

आंकड़ों के जरिए बताएं तो
- साल 2015 में बच्चों के खिलाफ 94172 क्राइम हुए
- यानि हर दिन 258 जुर्म बच्चों के खिलाफ हुए
- हर घंटे बच्चों पर क्राइम के 11 मामले दर्ज किए गए

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आकंड़े बताते हैं कि बच्चे ना बाहर सुरक्षित हैं और ना ही स्कूल के अंदर. इसलिए अपने बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान देने में कोई कोताही न बरतें. स्कूल अगर जरूरी मानक पर खड़ा नहीं उतरता तो उसके बारे में भी संबंधित अधिकारियों को जानकारी जरूर दें.

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