प्रेस कॉन्फ्रेंस: हमें बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और आरक्षण के कुत्ते ने काट लिया है: हार्दिक पटेल

By: | Last Updated: Saturday, 19 September 2015 2:26 PM
Hardik Patel in press conference

एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम में हार्दिक पटेल. उन्होंने हर तीखे सवाल का जवाब दिया.

सवाल नं 1 दिबांग– हार्दिक आप से पहला और सीधा सवाल आप ये सब किसके इशारे पर कर रहे हैं?

जवाब हार्दिक– सबसे बड़ी बात है कि कोई किसी के इशारों पर चलता है तो घोड़ा चलता है या गधा चलता है. हम तो किसी के इशारों पर नहीं चलते. पूरे गुजरात के 1 करोड़ 80 लाख पटेल हैं, उन लोगों ने बोला कि जॉब नहीं मिल रही, मेरे काका मेरा चाचा ने आत्महत्या कर ली किसान थे. मैंने बोला क्यों कर ली तो कहते हैं कि जौ के सही भाव नहीं मिल रहा. पांच एकड़ जमीन उसकी है, वो खुद मेहनत करता है उसके अंदर. बहुत ही अच्छी तरीके से फसल पैदा करता है उसके अंदर, मेहनत करता है, बारिश की चिंता नहीं करता. लेकिन जब जौ की कीमत लगाने की बात आती है तो सरकार तय कर देती है. चाहे कोई भी सरकार हो बीजेपी या कांग्रेस की. 5 एकड़ जमीन में वो 2 लाख खर्चा करता है. जब जौ पैदा होते हैं तो एक लाख के ही होते हैं. उसी प्रकार हमारी आवाज सिर्फ किसानों के लिए है. और हमारे जो रोजगार बेटे हैं. एमबीए कर लो तो निकल कर सेल्समैन बन जाता है. यही है यहां पर और इसीलिए हमारी आवाज उठी है,किसी के कहने पर नहीं उठती है आवाज. जब हमको खुद लगता है तब उठती है आवाज. कुत्ता काट लेता है तो 14 इंजेक्शन लगा तो बैठ नहीं पाते, उसी प्रकार ये इंजेक्शन ही लगा है पिछले कई सालों से और बैठ नहीं पाए इसलिए सब खड़े हो गए. जब एक-दो-तीन लोग खड़े हों तो लगता है कि जाने दो अपने स्वार्थ के लिए खड़े हुए होंगे लेकिन जब 70 लाख लोग खड़े हों जाते हैं 60 दिनों के अंदर.

 

दिबांग- कुत्ता काटता है तो इंजेक्शन लगता है, आप को किस चीज ने काट लिया है?

हार्दिक- हम को तो बेरोजगार ने काट लिया, भ्रष्टाचार ने काट लिया, आरक्षण ने काट लिया और बहुत ही अच्छी तरीके से काटा है, पता ही नहीं चलता कि क्या करें इसमें?

 

सवाल अजय- आप ये दावा करते हो कि सिर्फ गुजरात के 70 लाख पटेल नहीं आप हिंदुस्तान के 27 करोड़ पटेलों को संगठित करने की बात करते हो. लेकिन गुजरात में जो दो नेता पटेल आरक्षण को लेकर चले वो एक आप और एक एल.डी.पटेल. आप दो साथ नहीं चल सके तो 27 करोड़ पाटिदारों को कैसे साथ लेकर चलोगे?

 

जवाब हार्दिक- जब हिंदूस्तान आजादी की लड़ाई लड़ रहा था तो महात्मा गांधी जी लड़ रहे थे और भगत सिंह भी लड़ाई लड़ रहे थे. हम लोग अपने-अपने तरीके से लड़ाई लड़ रहे थे लेकिन उन लोगों की मकसद था हिंदुस्तान को आजाद कराना था. उसी प्रकार मैं भी लड़ाई लड़ रहा हूं और एल.डी पटेल भी लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन मकसद एक ही है कि हमें आरक्षण चाहिए. अगर एल.डी. पटेल हमारे साथ आते हैं तो मैं उनके पैरों को पानी से धोऊंगा और पानी पी लूंगा. लेकिन जो बड़ी बात है कि हमें आरक्षण चाहिए. वो लड़ें या हम लड़ें इसमें कोई इशू की बात नहीं है.

 

दिबांग-  आप इतनी बड़ी इज्जत देने की बात कह रहे हैं तो कभी आप ने बैठ के सोचा कि हार्दिक पटेल तेरे साथ क्या गड़बड़ है कि वो आते नहीं हैं तेरे साथ में?

हार्दिक-  कुछ कमी लोगों को दिखाई देती है.

दिबांग-  क्या कमी है दिखाई देती है?

हार्दिक-  आज अच्छे-अच्छे लोग जो बड़ी बड़ी जगहों पर पहुंच गए उनको भी कहते हैं कि वो अच्छा आदमी नहीं है. महात्मा गांधी ने देश को आजाद कराया लेकिन फिर हम ये कहते हैं कि उन्होंने ये कर दिया वो कर दिया. कुछ तो कमीं होती है और जो करता है उसी में खामी होती है. अगर आप आरक्षण के आंदोलन में आजाए तो कहेंगे साहब तो ऐसे हैं वैसे हैं.

 

दिबांग-  जब आप अकेले घर में बैठते हो तो सोचते हो कि मेरे अंदर बड़ी खामी क्या है?

हार्दिक-  मेरे में एक बहुत बड़ी खामी है कि मैं निर्णय बहुत जल्दी लेता हूं और सोचता हूं कि ये करना है तो ये कर लेना है. मैं घर पर बैठा था दो-तीन लड़के भावनगर के हमारे कि यार हमने पुलिस इंस्पेक्टर का इक्जाम कर दिया है कुछ सेटिंग करवा दो. मैं सोचा चलो ठीक है गुजरात में तो सेटिंग बहुत चलती है. मैंने पूछ लिया एक आदमी से तो बोला पुलिस इंस्पेक्टर के लिए 25 लाख लगेंगे. मैंने बोला ठीक है मैं पूछ लेता हूं उस लड़के से. मैं कॉल किया तो उसने बोला यार मेरे पास तो 2 एकड़ जमीन है मैं 25 लाख कहां से लाउंगा? रोने लगा फोन पर ही. मैंने सोचा ये कि एक बच्चा ये है तो पूरे गुजरात में कितने लोग होंगे हमारे कास्ट में. तो सोचा कि ये आरक्षण की लड़ाई लड़नी है. हमने तय कर दिया कि 25 अगस्त को महारैली निकालनी है. बस यही मेरी सबसे बड़ी खामी है जो मुझे शायद नुकसान पहुंचा सकती है. क्योंकि एक बार सोच लिया कि करना है तो करना है फिर चाहे जो हो.

 

दिबांग- आप ने जिस आदमी से बात किया कि वो पैसे लेगा तो क्या आप ने पुलिस को बताया, क्या उसकी शिकायत की, क्या वो आदमी आज जेल में है, क्या आप ने उसके खिलाफ आवाज उठाई?

 

हार्दिक- उसके लिए तो पहले मैं छोटा आदमी हूं. सच बताऊं तो आज से तीन महीने पहले दूध पीता था, अब नहीं पी रहा, तब तक छोटा था. जब मैं बाहर आया तो पता चला कि भाई यहां तो ये है. हम 2011 में संगठन चला रहे थे तो उस दौरान भी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का पूरा प्रयास किया. किसानों के लिए हम कम से कम 45 दिन लड़े, जब यहां पर मारूती का शो रूम आया था और वो हमने कैंसिल भी करवाया उसे. उस वक्त मोदी साहब जी थे, उनके खिलाफ लड़े हुए थे. बड़ी बात होती है कि जब जरूरत होती है और जिसके खिलाफ लड़ने जाते हैं तो कोई होता नहीं है. आज जो मुद्दा है आरक्षण का इसमें सफल हो जाएंगे तो सच में हम भ्रष्टाचार के खिलाफ भी लड़ने वाले हैं हम.

 

दिबांग- भाव सही लगाईए. आप एक बार लगाते हैं भाव तो महात्मा गांधी बन जाते हैं और दूसरे सवाल में आप भाव लगाते हैं तो कहते हैं कि नहीं मैं बहुत छोटा आदमी हूं. आप हार्दिक पटेल हैं वहीं रहिए?

 

सवाल अशोक वानखेड़े- नरेंद्र मोदी यहां 15 साल मुख्यमंत्री थे. तब तो आप ने बिल्कुल आवाज नहीं उठाई और आवाज उठाई तो बहुत छोटे लेवल पर उठाई. ये भ्रष्टाचार के कुत्ते ने काटा तो ये तो तब से काट रहे थे आप को. आज पहली बार तो नहीं काटा. क्या आप को नहीं लगता कि ये आरक्षण के नाम से एक सोची समझी राजनीतिक चाल है. मोदी के एक साल में मोदी थोड़े से कमजोर हुए, कमजोर मुख्यमंत्री बैठा हुआ है गुजरात में. ऐसे में एक विद्रोह किया जाए उसके खिलाफ और कुछ बीजेपी के लोग भी इसमें साथ दे रहे हैं, कुछ संघ के लोग जो मोदी से नाराज थे वो सब साथ हैं, तो आप नहीं लगता कि एक सोची समझी साजिश के तहत आप के आंदोलन का उपयोग किया जा रहा है.

 

जवाब हार्दिक-  पहली बात तो ये कि मैं 22 साल का हूं और मैंने एक बार वोट किया है. और सच बताऊं को मुझे भी नहीं मालूम किसको दिया है. और मुझे जो सही लगा वही किया. मैं किसी की डोरी पर चलने वाला आदमी नहीं हूं.

 

ना मेरा किसी नेता के साथ रिश्ता है और ना किसी पॉलिटिकल पार्टी के साथ मेरा संबंध है. जब मोदी जी यहां थे तो आरक्षण की लड़ाई लड़ी थी लेकिन सही तौर पर प्रतिनिधि नहीं मिला था, वो पॉलिटिशियन बन जाता था या किसी के दबाव में दब जाता था. ये आंदोलन इसलिए चला है क्योंकि इसमें कोई बड़ा नहीं है,इसमें जो भी जुड़े हैं वो तीस साल से छोटे हैं और उसको ना किसी की फिकर है. इसीलिए आंदोलन वायु वेग से पूरे गुजरात में चला.

 

दिबांग- आप ने कहा कि आप को पता ही नहीं कि किसको वोट दिया था. क्या आप इतने अन्जान हैं या आप बताना नहीं चाहते हैं या आपको लगता है कि आप बताएंगे तो पता चल जाएगा कि आप पहले किसके साथ थे.

 

जवाब हार्दिक- हमारी जो सीट है वहां से 17 लोग चुनाव लड़े थे उस समय. कहते हैं ना कि जो पहली बार जाता है तो छोटा नासमझ होता है, मैं बिल्कुल नासमझ था. मुझे समझ ही नहीं थी कि कि राजनीति क्या होती है, वोटिंग क्या करना है. सब लोग चलते थे तो हम भी चले गए.

 

दिबांग- आपको निशान याद है कौन सा था?

हार्दिक- तीसरे नंबर था इतना याद है. मालूम नहीं किसको दिया. अब जाऊंगा तो ध्यान से देखूंगा कि पहले नं. पर बीजेपी है, दूसरे नं. पर कांग्रेस है. अब ध्यान से दूंगा ताकि लोगों को बता पाऊं कि भई इसको वोट दिया?

 

सवाल देवेंद्र पटेल- हार्दिक आपने अहमदाबाद एक बहुत बढ़िया रैली की 8 से 10 लाख लोग आए. एक प्रभावशाली रैली थी लेकिन इतने दिनों से आप जो बात कर रहे हैं, हम ध्यान से सुन रहे हैं. एक समय आप ने बोला कि पूरा परिवार आप को भारतीय जनता पार्टी के साथ है. कभी आप ने भी बोला कि आप शायद बीजेपी के साथ हैं. अब आप बोल रहे हैं कि आप किसी के साथ नहीं हैं. फिर आप रैली में बोलते हैं कि मैं कमल को खिलने नहीं दूंगा. कभी आप गांधी जी की बात करते हो, कभी आप सरदार की बात करते हो, अंहिसा की बात करते हो और उसके साथ-साथ आप नक्सलवाद की भी बात करते हो. कभी केजरीवाल की बात करते हो, कभी नीतीश कुमार की बात करते हो, कभी बाला साहेब ठाकरे की बात करते हो. इन सब की जो विचार धारा है एक दूसरे से भिन्न है. ऐसा नहीं लगता कि आप के अपने वचन में विरोधाभास है और आप एक कन्फ्यूज विचारधारा के साथ इस आंदोलन को आगे ले जा रहे हैं.

 

जवाब हार्दिक- सही बात है इसमें क्या गलत कर दिया. अब तो उगेगा भी नहीं. हम अब भी कह रहे हैं कि अब तो उगेगा ही नहीं. जिस तरह बच्चों को घर में घुस कर मारा है. ऐसी हिंदुस्तान की पुलिस नहीं होती कि कहती है आरक्षण चाहिए तो मां-बहनों को भेज दो. एक लाख गाड़ी का कांच तोड़ा है. अगर बाहर खड़ी हो गाड़ी और हम पुलिस से कुछ गलत कर दें तो मारे हमें हम सही तौर पर स्वीकार कर लेंगे. अगर घर में घुस जाता है बेटा और घर में से बाहर निकाल कर मारते हैं. आपने वीडियो देखी होगी शायद पत्थर मार कर एक लाख गाड़ी के कांच तोड़े हैं. सरकार ने शूट एंड साइट का आदेश नहीं दिया है फिर भी मार दिया. तो मतलब ये है कि सरकार का पुलिस पर नियंत्रण है ही नहीं. हमें ऐसी सरकार नहीं चाहिेए.

 

दिबांग- ये बात सही है क्योंकि इस पर हमने देखा कि जो गुजरात का हाईकोर्ट है, उसने भी खरी-खरी बात कही है. देवेंद्र जी का जो सवाल है उस पर आप का क्या कहना है?

 

जवाब हार्दिक- हमारे पापा 2001 में बीजेपी के  साथ जुड़े हुए थे उस वक्त हमारी सीट पर आनंदी बेन चुनाव लड़ रहीं थी. उस वक्त हमारी सीट पर किसी के पास गाड़ी नहीं थी और पापा के पास जीप थी और वो और बेन उसी में साथ घूमते थे. अभी तीन साल पहले तक वो राखी भेजती थी. इसलिए हम बुआ ही बुलाते हैं उनको और आज भी बुलाते हैं बुआ ही हैं हमारी. हम किसी पार्टी के साथ नहीं, हां हमें अच्छी लगती है बीजेपी, लेकिन उसके अंदर जो लोग हैं वो अच्छे नहीं लगते हैं. मैं नीतीश कुमार की क्यों बात कर रहा हूं कि वो भी मेरे समुदाय से हैं, इसलिए मैंने उनकी बात की, मैंने जनता दल की बात नहीं की, कि जनता दल हमारा है ये नहीं हमने कहा नीतीश कुमार हमारा है. बाला साहेब ठाकरे की बात वो मजबूत आदमी थे, वो जो बोलते थे कर देते थे. इसलिए हम बालासाहेब ठाकरे को कहते हैं कि वो अच्छे आदमी हैं. हमने ये कहा केजरीवाल की विचारधारा अच्छी है, उसकी ब्लू प्रिंट अच्छी थी लेकिन वो कर नहीं पाए कुछ. बस इसी तरह अलग-अलग बात इसलिए कही क्योंकि सब में से कुछ सीखने को मिलता है. साहब जी कितने अच्छे पत्रकार हैं. किसी से कोई सवाल पूछते हैं तो यार कितने अकडू़ आदमी लग रहे हैं और सामने आए तो यार कितने मस्त आदमी हैं. सर को देखते थे तो लगता था यार कितने पतले आदमी हैं, सामने आए तो लगा कितने अच्छे आदमी हैं, हैंडसम ब्वाय. उसी प्रकार से हम सब लोगों की बात करते हैं.

 

दिबांग- आपने मुझे हैंडसम ब्वाय कहा उसके लिए आप को थैंक्यू है. पर मैं आप से ये पूछ रहा हूं कि आप बात को घुमा बहुत देते हैं, समझ में बड़ी मुश्किल से आती है. अभी आप ने कहा कि कमल नहीं उगेगा, उसी सवाल में आप आगे कह रहे हैं कि बीजेपी हमें अच्छी लगती है. तो मतलब क्या है नहीं भी उगेगा और अच्छी भी लगेगी?

 

जवाब हार्दिक- एक आम का डिब्बा होता है सर जी उसमें सौ आम होते हैं और अगर एक आम खराब हो जाए तो उसे प्यार से निकाल देना चाहिए, वरना 99 आम को खराब कर देगा. उसी प्रकार यहां पर जितने भी खराब आम हैं. मैं वही कह रहा हूं कि जो स्टेट की सबसे बड़ी व्यक्ति है उसका पुलिस पर निंयत्रण नहीं होता. जब पुलिस ये करती है तो बोलते हैं यार पुलिस ने जो किया अच्छा काम किया. 9 लोगों को मार दिया सर फिर भी हम कह दें कि अच्छा काम किया तो इसीलिए मैं कहता हूं कि बीजेपी अच्छी है, उसमें जो लोग हैं वो खराब हैं. इसीलिए मैं आम का उदाहरण पहली रैली से देता हूं कि जो आम है उसे फेक दो.

 

दिबांग- क्या आप ये कह रहे हैं कि आनंदी बेन पटेल को हटाइए नया मुख्यमंत्री लाइए और हमसे बात कीजिए और बीजेपी के साथ हैं.

हार्दिक- हम वही बात कर रहे हैं कि आनंदी बेन अपना स्टैंड क्लीयर कर दें, उनपर कार्रवाई को लेकर. हाईकोर्ट कर रही है, सरकार नहीं कर रही है.

दिबांग- स्टैंड क्लीयर से आप का मतलब क्या है?

हार्दिक- स्टैंड क्लीयर से पहला मतलब है कि हमने जो अभी वक्त चल रहा है उसमें आरक्षण को साइड में कर दिया है, अभी आरक्षण हमें नहीं चाहिए. जीएमडीसी ग्राउंड पर जितने भी पुलिस वाले थे, उन सब को पहले सस्पेंड कर दो क्योंकि वो अगर आप के बिना इजाजत के वो लोग हमला कर देते हैं और उस वक्त जब रामदेव जी बैठे थे तो बहुत उछल कर चढ़ बैठे कि यार कोई संत बैठा है उसे ऐसे मारते हैं तो हम तो देश के बच्चे हैं, देश के भविष्य हैं, अच्छे काम के लिए बैठे तो हमको मार दिया. जिस तरह से मारा है ना मैंने अपनी आंखों से देखा है, मैं वैन में बैठा था, बंदूक की बट से हम लोगों को मारा है.

 

दिबांग- तो हार्दिक पटेल कह रहे हैं कि अगर आनंदी बेन दोषी पुलिस वालों को सस्पेंड कर दें तो हार्दिक पटेल बीजेपी के साथ हैं ये आप मुझे कह रहे हैं.

 

सवाल ब्रजेश सिंह- आप एक बार आनंदी बेन पटेल की आलोचना करते हैं, दूसरी तरफ उनकी तारीफ करते हैं कि बड़ी मजबूत नेता हैं, दूसरी तरफ आप कहते हैं कि उन्होंने अभी तक कोई ऐसा फैसला नहीं लिया है कि उनकी तारीफ की जाए. आप कहते हैं कि आप गांधी के रास्ते पर चल रहे हैं, दूसरी तरफ आप कहते हैं कि आप भगत सिंह का रास्ता भी अख्तियार कर सकते हैं तो आप के पीछे लोग हैं या आप जिस समुदाय से आते हैं, जिनके आरक्षण की लड़ाई लड़ रहे हैं क्या आप उनको कन्फ्यूज नहीं कर रहे हैं क्योंकि आप का कन्फ्यूजन उनको भी परेशान करेगा कि वो क्या रास्ता अख्यियार करें?

 

जवाब हार्दिक- कन्फ्यूजन तो कोई नहीं है सर जी. जब यहां से कोई आदमी जाता है और कहता है कि हिंदुस्तान के बार्डर पर कोई किसी जवान का सिर ले जाए तो मैं दो ले आऊंगा तो क्या मजबूत बात की यार, बहुत ही मजबूत सी बात थी. आज वहां गए तो जो पहले हो रहा था वो आज भी हो रहा है. हम वही बात कह रहे थे. हमारे निवेदन आज तक किसी को बुरे नहीं लगे. 25 तारीख तक लगा कि हार्दिक क्या बात करता है, हार्दिक की बात ही अच्छी लगती है, हार्दिक जो कहता है वो 70 लाख लोग कर लेते हैं 25 तारीख चली जाती है तो हार्दिक तो बुरा आदमी है, हार्दिक के तो पुतले जलने लगते हैं. हमने 2002 में किसी व्यक्ति के पुतले बहुत जलाए थे, बहुत सारे आज देश का सबसे बड़ा नेता उसको बना दिया. मैं वही कह रहा हूं कि हम छोटी समझ से हैं लेकिन किसी को तो अच्छा लगता है. आज मेरे लिए सब लोग बाहर नहीं आए, मैं तो सब को एक अच्छी दिशा दे रहा हूं कि भाई यहां से चलो और सब लोग चले जा रहे हैं क्योंकि वो कहते हैं कि ये हार्दिक बोल रहा है तो अच्छा है. मैं नासमझ हूं लेकिन मैं पूरा साफ हूं, बस इतना मुझे मालूम.

 

दिबांग- आप समझदार क्यों नहीं बनते?

हार्दिक- अभी छोटा हूं ना 22 साल का

दिबांग- तो कब समझदार बनेंगे?

हार्दिक- 24 साल तक

सवाल प्रदीप- ऐसा नहीं लगता कि आप आरक्षण विरोधियों की जो लॉबी है देश में उसका मोहरा बन रहे हैं क्योंकि आप का आंदोलन जिस तरह से चल रहा है वो धीरे-धीरे उसी ओर जा रहा है. आरक्षण का बोझ इतना बढ़ जाए कि उसको खत्म करना पड़े और इस देश से आरक्षण खत्म हो जाए. आप आरक्षण चाहते हैं या आरक्षण खत्म कराना चाहते हैं.

जवाब हार्दिक- पहली बात तो ये कि मैंने आरक्षण हटाने की बात आज तक नहीं की.

प्रदीप- अगर उसी 27 परसेंट में लोग बढ़ते गए तो कितने लोगों को क्या मिलेगा.

हार्दिक- 27 प्रतिशत में अभी 147 कास्ट हैं और अगर उसमें एक और कास्ट चली आती है तो इसमें कोई बड़ा नुकसान नहीं है.

 

दिबांग- ये जो ओबीसी कमीशन है क्या आप ने वहां पर अप्लाई किया है. उनकी 11 शर्ते हैं और जो जानकार हैं वो बता रहे हैं कि उनमें से एक भी शर्त आप पर लागू नहीं होगी. क्या आप ने उसका विस्तार से अध्ययन किया है या आप में से किसी सहयोगी ने किया है उस पर अध्ययन.

 

हार्दिक- रात के साढ़े तीन बजे किसी आतंकवादी के लिए सुप्रीम कोर्ट खुल जाती है.

 

दिबांग- क्या आप को नहीं लगता कि ये तो अच्छी बात है कि सुप्रीम कोर्ट का इतना बड़ा दिल है. न्याय की भावना सुप्रीम कोर्ट में इतनी ज्यादा है कि फांसी से पहले उसकी हर आखिरी बात सुनकर जवाब देना चाहता है ताकि कोई ये कहने वाला ना हो कि सुप्रीम कोर्ट ने जल्दबाजी में बिना पूरी बात सूने ही फैसला दे दिया. ये तो एक अच्छी बात है. आप को गर्व होना चाहिए कि हमने उसकी हर एक बात को सुना और कहा कि आप की सजा फांसी है और सुबह नियत समय पर उसको फांसी हुई.

 

हार्दिक- पहली बात सर जी कि आप सब बड़े लोग हैं और कहीं पर मेरी बात गलत लग जाए तो माफ करना. पहली बात एक आदमी ताज में पूरे देश के सामने 180 लोगों को मार देता है, चार साल तक आप उसे बिरयानी खिलाते हो, अमिताभ की फिल्में दिखाते हो. बात में उसे अच्छे तरीके से साफ-सुथरा करवा कर फांसी पर लटकवा देते हो. हम ये कह रहे हैं कि 70 लाख लोग जब रोड पर आते हैं और उसके भविष्य की चिंता सुप्रीम कोर्ट को करना चाहिए तो संविधान में बदलाव हो सकता है. 70 लाख लोग निकले हैं साहब जी वो तो गलत नहीं हो सकते. अगर देखो पिछले 10 साल में किन किसानों ने आत्महत्या की तो सबसे ज्यादा पटेल हैं. पिछले 10 में कितने पटेल युवाओं को नौकरी मिली है, क्लास वन, क्लास टू, सरकार के अंदर देखो जरा. किसी बच्चे के पास नहीं है. आज लोग अच्छी एमबीए डिग्री ले लेते हैं, बीसीए, एमसीए, डिग्री ले लेते हैं और वही लड़का गांव में हैं, उसी प्रकार वो 2 एकड़ में वो खेती चलाता है. लोग उससे पूछते हैं कि ये क्या कर रहा है तो कहता है खेती कर रहा हूं. क्यों? मुझे नौकरी ही नहीं मिली. एक से चार कक्षा तक जब हम साथ में रहते हैं तब हमें नहीं पता चलता कि ये एससी, एसटी या ओबीसी वाला है, हम सब भाई-भाई बन कर रहते हैं. जब पांचवी कक्षा में आते हैं तो उसको स्कॉलरशीप मिल जाती है, छ: हजार दो सौ की, हमें नहीं मिलती. हम घर जाकर पूछते हैं कि पापा वो अमित चौहान को मिली, हमें नहीं मिली. तब जाकर उसको लगता है कि यार ये तो एससी वाला, एसटी वाला है. तब हममें से विभिन्न होता है ये देश. आरक्षण की वजह से जब बाबा साहब अंबेडकर ने, हम उनको नमन करते हैं आज भी हमारी रैली में जहां बाबा साहब की प्रतिमा है उनको फूल-हार चढ़ाते हैं कि इस व्यक्ति ने इस देश के बजारों को सही तौर पर लगाया था लेकिन आज इन नेताओं ने उनका अपमान कर दिया. उन्होंने 10 साल तक कहा था, उन्होंने 60 साल तक लगा दिया.

 

दिबांग- गुजरात में जो कमीशन है वहां अप्लाई करेंगे तब ये ओबीसी बनेगा, वहां अप्लाई करने की सोच रहे हैं या नहीं सोच रहे हैं.

 

हार्दिक- सोच रहे हैं सर उसके लिए पूरी लीगल टीम बनी हुई है. उसमें 13 वकील हैं और पूरा डेटा तैयार है.

 

दिबांग- ये जो बिरयानी वाली बात आप बार-बार कहते हैं. उज्जवल निकम जो उनके वकील रहे. उन्होंने कहा ये ऐसे ही कह दिया था, ऐसी बिरयानी वाली बात है नहीं.

 

सवाल शीला रावल- हार्दिक सीएम पटेल है, आठ केंद्रीय मंत्री पटेल हैं, दो ज्वॉइंट कमिश्नर पटेल हैं मतलब ये कैसा विरोधाभास है और आप को नहीं लगता कि आप पूरे गुजरात को बांटने चले हैं?

जवाब हार्दिक- आज तक पटेल ने किसी जाति का विरोध नहीं किया. आज तक पटेल ने ये कभी नहीं बोला कि ये समुदाय ऐसा है आज तक इसका इतिहास गवाह है.

 

दिबांग- मैं आप को बीच में रोक रहा हूं. आप को मालूम है 1981 में, 1985 में आप के पिता जी भी उसमें शामिल थे, तब एक आंदोलन हुआ था उसमें पाटिदार प्रमुखता से, आरक्षण दिया गया था उसका वो लोग विरोध कर रहे थे. तब तो विरोध किया पटेलों ने.

हार्दिक- हां किया लेकिन उस वक्त मैं नहीं था.

 

शीला रावल- अब हार्दिक भाई कहते हैं कि जो मैं सोचूंगा, जो मैं कहूंगा वो सच है. बाकी सब झूठ बोल रहे हैं.

हार्दिक– मैं कहता हूं कि ये करना है और सब लोग कर जाते हैं तो सब लोग मूर्ख हैं. मैं मूर्ख नहीं हूं. मैं तो चतुराई से बोलता हूं कि चलो ये करना है और सब लोग करते हैं वो मूर्ख हैं. लेकिन उन लोगों को लगा है मैडम जी कि ये सही है. मैं एक बात बता दूं कि एसटी, एससी, ओबीसी अगर वो सरकार का लाभ लेकर कलेक्टर बन जाते हैं तो उसका हमारा कोई विरोध नहीं है. अगर देश के विकास में वो कलेक्टर बनते हैं तो अच्छा है कि यार अपना भाई कलेक्टर बन गया. उनका बेटा

एसटी, एससी, ओबीसी का लाभ लेकर मजिस्ट्रेट बन जाता है यार अच्छी बात है कि चलो किसी कलेक्टर का बेटा मजिस्ट्रेट तो बना.

 

सवाल दिबांग- बहुत गुस्सा हो गए थे क्या आप?

जवाब हार्दिक- सही है इसमें क्या गलत है. मैं तो वही कह रहा हूं.

दिबांग- पर आप को ये मालूम है कि गुस्सा आना अच्छी बात नहीं है.

हार्दिक- अब मुझे वो याद आ गया जो सर ने बोला नक्सलवाद वाली बात याद आ गई अब उसके बारे में बता देता हूं. किसी को नक्सली बनना नहीं चाहिए, आज कोई नहीं बनेगा. लेकिन आज घर में आकर किसी की बहन का हांथ खींच कर बाहर लाते हो, यहां-वहां हांथ लगाते हों और उसका बेटा सोचे कि क्या करें चलो बैठ जाते हैं, पुलिस वाला है मारने दीजिए ना. ये नहीं जब बहन का हाथ पकड़े तो हांथ काट देना चाहिए और तब लोग बोलते हैं कि ये तो नक्सली है. नक्सली बनता कोई नहीं है. उसे मजबूरी से बनना पड़ता है अपने देश के लिए या फिर अपने परिवार के लिए. सर ने बोला कि मेरी नक्सलवाद की भाषा नहीं लेकिन मैं वही कह रहा हूं कि हमने 2012 में अपने विस्तार विरंगांव में, मांडल में अपने बहन-बेटियों की रक्षा के लिए हथियार उठाए थे, हमने बहुत लोगों को मारा भी है. अगर कोई भी हमारी बहन-बेटियों को खराब तरीके से देखेगा तो उसको हम मारेंगे चाहे कोई भी हो. और अभी आप ने बात कही, मैं आप से सौ रूपए मांग रहा हूं. हक की बात है इसलिए मैंने आप से सौ रूपए मांगे और आप 50 रूपया दोगे कि ले लो तो मैं क्यों लूं. मेरा हक है मुझे सौ लेना है आप से तो सौ ही दो. हमने उनसे मांगा ओबीसी, हमने उनसे पटेल विकास लक्ष्य योजना मांगी और वो बोल रहे हैं कि भाई 7 सौ करोड़ दे दो इनको, हमारी वैल्यू सिर्फ इतनी है. 1 करोड़ 80 लाख हैं, सौ-सौ रूपए बांटने में भी नहीं आते 7 सौ करोड़.

 

सवाल दिबांग- आप को नहीं लगता कि देश में कायदा कानून होता है, एक न्याय व्यवस्था है, पुलिस है वो सुचारू रूप से चलनी चाहिए. अगर ऐसे इकट्ठा हो जाएं पटेल, देश में और भी बहुत सारे समुदाय हैं, सब एक-दूसरे को काटेंगे वो आप को काटेंगे फिर देश बचेगा, फिर आप बचेंगे कहीं.

 

जवाब हार्दिक- हम इसीलिए आरक्षण मांग रहे हैं, सब साथ में रहते. यार हम भी आरक्षण वाले हैं भाई-भाई चलो साथ में बैठते हैं.

दिबांग- नहीं मैं मार-पिटाई वाले सवाल पर हूं कि मैं हांथ काट दूंगा. मैं तोड़ दूंगा, मैं गोली मार दूंगा, ये कैसी भाषा है?

 

हार्दिक- उसमें मैं गलत तो नहीं मानता कि वो होना चाहिए. अगर आप न्याय व्यवस्था की बात करते हैं तो वो मैं बोलूंगा कि 2-3 साल बाद पुलिस वाले परेशान करेंगे और मैं उसमें डरता भी नहीं हूं. अगर देश में कोई सरेआम किसी को गोली मार देता और उसके बाद वो खुल्लेआम रहता है किसी नेता के बलबूते पर तो हमें उसका विरोध है. ये न्याय व्यवस्था नहीं इस हिंदुस्तान में और उसको हमें स्वीकारना पड़ेगा. जिस दिन हम ये स्वीकर कर लेंगे कि इस देश में सही तौर पर न्याय व्यवस्था नहीं है, हमारी बहन-बेटियों पर दस-दस लोग रेप कर लेते हैं ये कहां पर है न्याय व्यवस्था, वो फिर भी घूमते रहते हैं और रेप करने वालों में कोई अगर 17 साल का निकल जाता है तो फिर वो तो 17 साल का छोटा बच्चा है, ये हमारी न्याय व्यवस्था है यहां पर.

 

दिबांग- हार्दिक पटेल मैं आप से यही कह रहा हूं कि अगर ऐसी स्थिति आप को लगती है तो आप को न्याय व्यवस्था ठीक करने के लिए लड़ना चाहिए. आप को सामने आकर लोगों को संगठित कर उनको कहना चाहिए कि हम अपने लोगों को भेजेंगे और हम अपने हिसाब से कानून बनाएंगे. आप ये थोड़ी कह सकते हैं कि हम गोली मार देंगे. आप ने कहा एके-47 चाहिए आप को.

 

हार्दिक- हमें चाहिए ऐसा नहीं कहा था मैंने. अगर इस देश में एक-47 गन के लिए अप्लाई हो सकता है तो मैं करने के लिए तैयार हूं.

दिबांग- आप गन चाहते हैं देश में.

हार्दिक- चाहिए अपनी सुरक्षा के लिए.

दिबांग- आप ने कभी इस पर विस्तार से पढ़ा है कि अमेरिका में क्या हाल है. हर साल वहां 12-साढ़े 12 हजार लोग मारे जाते हैं, 51 हजार घटनाएं होती हैं. पूरी एक बहुत बड़ी बहस छिड़ी हुई है अमेरिका में कि क्या गन इतनी आसानी से मिलनी चाहिए. क्या आप ने उसके बारे में कभी पढ़ा है, सोचा है.

 

हार्दिक- अमेरिका में हर एक व्यक्ति के पास गन है और साढ़े 12 हजार लोग मरते हैं, यहां पर नहीं है और किसी के पास कट्टा है, हमारे हिंदुस्तान में कितने लोग मरते हैं.

दिबांग- आप ने इस बारे में पढ़ा है विस्तार से, जानने की कोशिश की है क्या. इसकी बहुत सारी वजह है कि होनी चाहिए और क्यों नहीं होनी चाहिए?

हार्दिक- नहीं पढ़ा नहीं है सर जी अभी तो बीकॉम कम्प्लीट किया है, आगे-आगे पढ़ने वाला हूं. जब जरूरत पड़ जाएगी तो कह दूंगा कि जो मैंने बयान दिया था वो शायद मुझसे गलत हो गया था.

 

सवाल कीर्ति खत्री- आज खासतौर पर जो पाटिदार समाज के जितने गांव हैं, उस गांव में जो पिछड़े लोग हैं उनके साथ जो व्यवहार किया जाता है, वो व्यवहार आप जो बात कर रहे हैं उससे मिलता-जुलता नहीं है. वहां उन लोगों को मंदिर में भी नहीं आने दिया जाता है. और सामाजिक स्तर पर कई अन्याय ऐसे किए जाते हैं तो आप सामाजिक न्याय की बात किस तरह से कर रहे हैं. मैं आप को एक उदाहरण दूं, यहां के एक प्रसिद्ध दलित लेखक हैं राघवजी माधव को गांधीनगर में पटेल इलाके में घर नहीं खरीदने दिया गया तो फिर सामाजिक न्याय की बात कैसे करते हैं?

 

हार्दिक- आज से 20 साल पहले ये होता था. इसको पूरा देश जानता है कि ये होता है कि पिछड़े लोगों से ऐसा व्यवहार उनसे किया जाता है. लेकिन सौराष्ट्र में हमारे विरंगांव का एरिया स्टार्ट होता है, वहां जितनी भी जमीनें हैं वहां हमारे दलित भाई उसी समाज में हैं.

 

कीर्ति- लेकिन मंदिर में आज भी वो नहीं जाते हैं.

हार्दिक- सर सही तौर पर बताऊं तो उसके बारे में मुझे मालूम नहीं है. मैं जहां पर अहमदाबाद में रहता था तो मेरे साथ ही मेरे विरंगांव के लोग रहते और जो जलाला मंदिर है वहां हम सब साथ में जाते थे.

 

दिबांग- आप को मालूम नहीं है पर क्या आप ये कहना चाहेंगे कि अगर इस तरह से दलितों को मंदिर में आने से रोका जाता है तो वो नहीं होना चाहिए, ये गलत है.

 

हार्दिक- बिल्कुल नहीं होना चाहिए. राम उनके भी और हमारे भी.

 

सवाल विरेंद्र पंडित- गुजरात में तीन बड़ा कंपनियां हैं. जैडस कैडिला, निरमा और तीसरी सुजलॉन है. ये तीनों बड़ी कंपनियां पटेलों की कंपनियां हैं क्या इनमें पटेलों के लिए आरक्षण मांगने के लिए आंदोलन करेंगे?

 

जवाब हार्दिक- उसमें आरक्षण के लिए

विरेंद्र पंडित- आप ने कहा ना कि पूरे प्राइवेट सेक्टर में आप को आरक्षण मिलना चाहिए?

हार्दिक- हां मिलना ही चाहिए.

 

विरेंद्र पंडित- तो क्या इसके लिए भी आंदोलन करेंगे क्या?

हार्दिक- हां करेंगे क्यों नहीं करेंगे. वो जैडस वाला हम पर सिक्का लगा कर बैठा कि तुम लोगों का बाप हूं नहीं आने दूंगा. उसमें भी घुसेंगे और हमारा हक है कि इस समाज में वो आए और इस समाज ने इतना बड़ा बनाया. उसकी जिम्मेदारी होनी चाहिए कि भाई पटेल लोगों को अच्छी तरह से लेना चाहिए.

 

सवाल राजेंद्र सिंह- हार्दिक भाई आप आरक्षण आंदोलन के लिए राष्ट्रीय नेता बनने के लिए दिल्ली गए थे कुछ दिन पहले. वहां पर एनसीआर गुर्जरों के लिए आंदोलन संरक्षण समिति है जो उन्होंने आप को घास नहीं डाला. और वहां से इस तरह से कह कर निकाला कि जब राजस्थान में आंदोलन चल रहा था गुर्जरों के लिए तो वहां पर एक दिन भी नहीं गए. वहां पर 71 लोग मारे गए थे, काफी नुकसान हुआ था. अब आप उनसे सपोर्ट लेना चाह रहे हैं.

 

जवाब हार्दिक- वहां पर जो हुआ था वो सही तौर पर ये हुआ था कि सभा चल रही थी, उसमें जाट भाई आया हुआ था और जाट भाई खड़ा होकर बोला कि जब जाट लोग आरक्षण मांग रहे थे तो गुर्जर ने हमें सपोर्ट नहीं किया और जब पटेल मांग रहे हैं तो पटेल उनको सपोर्ट कर रहे हैं तो कितने पैसे दिए पटेलों ने, ये चीज हुई थी वहां पर.

दिबांग- क्या समझ में आया जब आप दिल्ली जाकर इन सब लोगों से मिले.

हार्दिक- मुझे वहां जाकर यही पता चला कि हम बहुत दुखी हैं और हम जो बात करते हैं ना बड़ी-बड़ी वो मेक इन इंडिया और वाइब्रेंट वाली ये नहीं है इस हिंदुस्तान में. अमीर, अमीर बनता गया और गरीब, गरीब बनता गया. जिसके पास 2 हजार करोड़ रूपए हैं, उसके पास 4 हजार करोड़ रूपए हो गए, जिसके पास 200 रूपए थे उसके पास सिर्फ 120 रूपए ही बचे हैं.

 

सवाल राथिन दास– आप अपने समुदाय के लिए नौकरी की बात क्यों कर रहे हैं. पटेल ही क्यों देश के काफी लोग देश-विदेश में गए हैं, बहुत अच्चा काम किया, अपने लिए भी और देश के लिए भी, बिना सरकारी नौकरी के. नौकरी के भरोसे नहीं बैठे वहां.

 

जवाब हार्दिक- हां मैं वही बात कह रहा हूं कि यहां जो है वहां पर वो नहीं है. हम जॉब की इसलिए बात करते हैं, अगर इसकी पूरी डिटेल निकालें तो मालूम है क्या होता है, जॉब कहीं पर नहीं है. कहीं पर नहीं है पूरे हिंदुस्तान में, गुजरात में नहीं है. जब कहीं पर बेटे की जॉब की कही छुप-छुपा कर तो बोलते हैं फिक्स रेट 50 लाख रूपए सिविल इंजीनियर के लिए. मैं वही बात कह रहा हूं कि हम जॉब की क्यों बात कर रहे हैं?

 

राथिन- हम जॉब की क्यों बात कर रहे हैं, अपॉरच्यूनिटी क्यों नहीं हम क्रिएट करते हैं?

हार्दिक- हम यहां पर ये कह रहे हैं कि जितने भी अच्छे-अच्छे लोग हैं, बीकॉम है, बीएससी है किसी के पास नौकरी ही नहीं है यहां तो पैसे की बात चलती है और गरीब हैं हम लोग. 5-10 प्रतिशत अमीर होने से पूरा समाज अमीर नहीं हो जाता है. 5 प्रतिशत लोग हमारे डायमंड व्यापारी हैं, हम मानते हैं कि वो 4 करोड़ का सूट खरीद लेता है हमारा आदमी, है बहुत ही अच्छा मजबूत है. कोई लोग हैं अच्छे-अच्छे मिनिस्टर है वो आरएनबी का पूरा बिजनेस कर लेता है पूरे हिंदुस्तान में क्या पैसे वाला बंदा है? इस गुजरात के मिनिस्टर का बेटा बोल रहा है कि यार आरक्षण ना मिलने की वजह से मैं खुद इंजिनियर नहीं बन पाया. ये गुजरात के मिनिस्टर का बेटा बोल रहा है सूरत का. इसीलिए हम जॉब मांग रहे हैं. सच बताऊं तो गुजरात के अंदर सबसे ज्यादा बेरोजगार पटेल युवा है और उनकी शादी नहीं हो रही है.

 

दिबांग- क्या आप कह रहे हैं कि शादी की समस्या हो रही है हार्दिक पटेल को.

हार्दिक- नहीं मुझे तो नहीं हो रही है. अभी तो 22 साल का हूं. अभी से थोड़े ना शादी कर लूंगा मैं. अभी तो थोड़ी देर लगेगी और जिसकी शादी नहीं होती वो बहुत आगे चला जाता है यहां पर.

 

सवाल दिबांग- एक आप ने जो बात कही कि जहां पर डायमंड की सफाई होती थी कटिंग होती थी, पॉलिसिंग होती थी वो अब बंद हो रही हैं. हम देख रहे हैं जो छोटे-छोटे और जो मध्यम उद्योग हैं लगभग 2 लाख 61 हजार, हजारों उसमें बंद पड़ रहे हैं. लोग बेरोजगार हो रहे हैं. आप उनके बारे में उतनी बात नहीं कह रहे हैं, जितनी आप आरक्षण की बात कर रहे हैं. आज अगर हार्दिक पटेल के साथ लोग जुड़ रहे हैं वो वहां से त्रस्त हैं, वो लोग इस तरफ आ रहे हैं.

 

जवाब हार्दिक- हां मैं वही बात कर रहा हूं. मैं जिस समुदाय से हूं पहले मुझे उसके लिए लड़ना चाहिए. साहब जी ने बोला कि आप 27 करोड़ लोगों को एक करने की बात कर रहे हैं और आप दो ही लोग एक साथ नहीं हो, सही बोला ना उन्होंने. उसी प्रकार पहले मैं अपने समाज की बात करूंगा, समाज को सही तौर पर जो हक की बात है वो दिलाऊंगा और मैं यही कह रहा हूं कि अगर आरक्षण मेरे समाज को मिल जाएगा. मैं उसी तरह विरंगांव में जो मेरा नाटर सप्लाई का बिजनेस है मैं वहीं चला जाऊंगा. लेकिन एक प्राब्लम आ गई है और देश की प्रॉब्लम है, फिर हम आ जाएंगे कि लड़ना है. हमें कोई नेता नहीं बनना है, साहब जी और ना हम नेता बनने आए हैं.

 

दिबांग- आप नेता नहीं बनना चाहते हैं, आप कहते हैं कि हम रिमोट से चलाएंगे?

हार्दिक- रिमोट की बात है, ये टीवी पड़ा है सर जी, आदमी यहां बैठा कि अगर यहां से चेंज हो जाता है तो आदमी कहता है कि चलो अच्छी बात है कि दूर से चेंज हो जाता है. अब आप वहां पर जाएंगे और स्विच दबाएंगे तो उसमें दिक्कत होती है खड़े होने की.

 

दिबांग- हम कोई जिम्मेदारी नहीं लेगें, हमने कठपुतली बैठा रखी है, गलत काम करेगी तो उसका और सही काम करेगी तो हमारा, लोकतंत्र का मतलब ये है. क्यों हार्दिक पटेल में इतनी हिम्मत नहीं है कि वो सामने आकर कहता कि आप लोगों के लिए मैं ये काम करूंगा? मैं आप को विश्वास दिलाता हूं कि मैं भ्रष्टाचार नहीं करूंगा, मैं ईमानदारी से काम करूंगा, इतनी हिम्मत हार्दिक पटेल क्यों नहीं जुटा पा रहा है.

 

हार्दिक- मैं इसी हिम्मत से तो इन सब लोगों को एकजुट कर पाया हूं, इस मंच पर शायद अभी कोई 22 साल का लड़का नहीं आया होगा. लेकिन सही तौर पर राजनीति ऐसी है कि अच्छे से अच्छा आदमी वहां जाकर बुरा बन जाता है.

 

दिबांग– रिमोट का मतलब होता है कि हम सत्ता चाहते हैं लेकिन सत्ता के साथ जो जिम्मेदारी है वो नहीं चाहते हैं. आप ऐसी बात क्यों कर रहे हैं?

हार्दिक– हम सत्ता चाहते हैं.

दिबांग– और जिम्मेदारी नहीं चाहते हैं.

हार्दिक– जिम्मेदार उन लोगों को सौंपना चाहते हैं, जो लोग वहां जाकर दूसरों के लिए जिम्मेदारी बन जाते हैं.

दिबांग- पर्दे के पीछे से खेलना चाहते हैं

हार्दिक- नहीं मैं जो बात कह रहा हूं

प्रदीप- अभी वही तो स्थिति है कि आप के सात मंत्री हैं, मुख्यमंत्री हैं, 42 विधायक हैं. इससे ज्यादा पटेलों का प्रतिनिधित्व क्या होगा? कल आप ने जिन लोगों को भेजा वो भी वैसे हो गए तो क्या करेंगे?

 

हार्दिक- मैं वही बात कह रहा हूं. बिहार में जो मुख्यमंत्री है वो हमारे समुदाय से हैं, वहां पर हमारे बहुत सारे विधायक हैं तो हम गुजरात की ही बात क्यों कर रहे हैं कि गुजरात में 8 मिनिस्टर हैं, सीएम उनका है, इतने सारे विधायक हैं वो तो यूपी, बिहार में भी हैं, आंध्र प्रदेश में भी हैं, केरल में भी हैं. चिरंजीवी हमारे समाज से है, वो पवन जो एक्टर है वो भी हमारे समाज से है, ये सब लोग हमारे समाज से हैं. हम गुजरात की राजनीति की बात इसलिए कर रहे हैं साहब जी कि राजनीति में मुझे कोई शौक ही नहीं है, मुझे सही करना है और वो बिना राजनीति हो सकता है.

दिबांग- ये कौन कह रहा है. सारे एक्टर, मिनिस्टर जोड़ लिए अपनी तरफ, मुख्यमंत्री जोड़ लिए अच्छे-अच्छे

हार्दिक– ये हमारे समुदाय से हैं तो नाम लेना चाहिए.

 

सवाल आर.के. मिश्रा- ये जो वायलेंस हुआ, हिंसा हुई उसमें तकरीबन 48 घंटे में 25 हजार करोड़ का राज्य का नुकसान हुआ हैं, 18 सौ से ऊपर बिल्डिंग गई हैं, 6 सौ से ज्यादा बसों को नुकसान हुआ है, गरीब के स्कूल टूटे हैं लेकिन किसी पटेल के स्कूल या कॉलेज और एक नहीं बहुत से चलाते हैं लेकिन उनके नुकसान नहीं हुए, समाज में वर्ग विग्रह करके. ये चीज कर के आप क्या साबित करना चाहते हैं?

 

जवाब हार्दिक-  आप ने वर्ग विग्रह की बात कही उसको मैं क्लीयर करना चाहता हूं. तीसरी रैली हमारी विशनगर में हुई थी और उस दौरान कुछ असमाजिक लोगों ने वहां पर गाड़ी को जला दिया था. बाद में पता चला वो गाड़ी किसकी थी मालूम है आप को, वो महिसाणा जिले के बीजेपी वाइस प्रेसिडेंट किसी ठाकुर भाई की थी और सरकार पटेल और ठाकुर भाई को आपस में बवाल करने के लिए उकसा रही थी. हम नहीं उकसे, ठाकुर भाई नहीं उकसे हम सब ने मिलकर मामले को वहीं दबा दिया. हम वर्ग विग्रह नहीं चाहते.

 

आर.के. मिश्रा- 35 किस्से शाम को 5 बजे से लेकर 8 बजे तक अहमदाबाद में हुए. बात ये कही जा रही है कि वायलेंस आप लोगों के ऊपर जो अटैक हुआ उससे शुरू हुआ, वो जो कुछ हुआ वो आठ बजे के बाद की बात है. जो 35 किस्से इस पीरेड के बाद हुए, वो कैसे हुए?

 

हार्दिक- जब वाड़ज के पास से जब रैली निकली तो आईबी की रिपोर्ट ये थी कि वाड़ज के आस-पास कुछ बवाल होगी. ये बोला गया था और उसी दौरान जब वहां से निकले कहीं से भी हम किसी समुदाय का नाम नहीं लेते क्योंकि हम सब को भाई मानते हैं. आज भी मानेंगे और 20 साल बाद भी. वहां से पत्थर फेंके गए थे और बच्चों ने बोला था पुलिस वालों को और पुलिस वालों ने तुरंत मारना शुरू किया साहब जी उस वक्त.

 

सवाल रातिन दास- आप के मंच से आप के साथी ने ये कहा कि पटेल लोगों को नौकरी नहीं मिलती तो अमेरिका जा कर बिजनेस करते हैं और आप ही की कही बात है कि आरक्षण 60 साल से चल रहा है लेकिन इस 60 साल के बावजूद जो कीर्ति भाई ने कहा कि एक फेमस नॉवेलिस्ट को पटेलों के इलाके में घर नहीं मिलता इसके बारे में आप क्या कहेंगे?

 

जवाब हार्दिक- जो पिछले आप की उम्र के लोग थे, उनकी सोच आज भी है. हम उनकी बात नहीं कर रहे. हम हमारी बात कर रहे हैं, हमारी सोच ऐसी है ही नहीं और आप अमेरिका की बात करते हो तो जो अमेरिका गया है. तो इतने तो गरीब नहीं कि पासपोर्ट ना बना ले और अमेरिका ना जा पाए. सबसे ज्यादा जब डायरी निकलती है तो सबसे ज्यादा पटेल लोगों के ही नंबर निकलते हैं. वो अपनी मेहनत से निकले हुए हैं, उन्होंने खून पसीना बहाया है यहां की जमीनों पर.

 

सवाल शीला रावल– आप कभी हांथ में बंदूक लेते हैं, कभी रिवाल्वर लेते हैं. ये आप का शौक है या आप लोगों को डराते हैं.

जवाब हार्दिक- हथियार रखना मेरा शौक है. मुझे तो गर्व होता है. पापा भी खुश हो गए कि मेरी बंदूक किसी ने नहीं देखी आज पूरा हिंदुस्तान देख रहा है.

 

सवाल अजय- आप का इतना बड़ा आंदोलन चल रहा है उसकी फंडिग कहां से होती है, अमेरिका से मिलता है या गुजरात के ही लोग सपोर्ट करते हैं?

जवाब हार्दिक– जो हमारे 5-10 प्रतिशत लोग अमीर हैं ना हम उनसे लेते हैं फंड.

सवाल- बीजेपी के नेता भी देते हैं फंड

हार्दिक- नहीं बिल्कुल नहीं सर. और सच बताऊं तो चाहे बीजेपी के हो या कांग्रेस के हो, बहुत लोगों ने बोला पैसे ले जाओ और आंदोलन मजबूत बना दो. लेकिन आप फोन की लिस्ट निकाल लो आज तक किसी से पैसे नहीं मांगे. कांग्रेस की सभा में सिर्फ 5 हजार लोग आते हैं, बीजेपी की सभा में पूरे गुजरात की बसें लग जाती हैं 10 हजार लोग आते हैं. और हमारी सभा में रात को ढाई बजे पूरा ग्राउंड खचा-खच भर गया था और सब लोग अपने-अपने तरीके से आए थे. अहमदाबाद में 12 से 13 जगहों पर कैंप रखा था. अच्छे-अच्छे लोगों ने तीन-तीन लाख लोगों को खाना खिलाया था. और हमने कहा था कि किसी के पास से 2 हजार से ज्यादा नहीं लेना हमें.

 

सवाल दिबांग- क्या आप को लगता है हार्दिक कि आप सीधे पॉलिटिक्स में नहीं आना चाहते हैं, वो इसलिए भी है कि अगर आप आज कहें कि मैं मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं तो बहुत सारे लोग जो आप के साथ जुड़े हुए हैं, वो समझेंगे कि ये सिर्फ अपने बात करता है, बनना चाहता है इसलिए कर रहा है.

जवाब हार्दिक- ये हो सकता है लेकिन सर जी आप मुझे वहीं पर घुमा-घुमा कर ला रहे हैं, मुझे नहीं बनना सीएम.

 

सवाल प्रदीप- आप ने कहा कि कमल नहीं खिलेगा लेकिन आप ने 12 परसेंट पाटिदारों को 54 परसेंट ओबीसी के सामने खड़ा कर दिया तो ये तो आप बीजेपी की मदद कर रहे हैं सीधे-सीधे कि 54 परसेंट को आपने बीजेपी की तरफ खड़ा कर दिया और आप की राजनीतिक परीक्षा होने वाली है आने वाले लोकल बॉडी के चुनाव में. आप किसके साथ होंगे?

जवाब हार्दिक- जो हमारे हक की बात करेगा, उसी के साथ.

प्रदीप- अब तो आप को पता चल गया और अब तो बहुत जल्दी होने वाले हैं, उसमें कोई दो-चार साल नहीं हैं

हार्दिक– मैं बोलूंगा और हो जाएगा तो ये नहीं हो सकता है. आप चाहोगे कि मुझे किसे वोट करना है वो आप की जिम्मेदारी है. लेकिन मैं ये बोलता हूं कि जो मां-बहनों को बोला हुआ अपशब्द, किसी की पीठ पर लगी हुई लाठी कोई नहीं भूलेगा.

 

सवाल नं. 1

दिबांग- गुजरात का अगला मुख्यमंत्री आप किसे देखना चाहते हैं. आनंदी बेन पटेल या अमित शाह?

जवाब हार्दिक- नहीं देना जवाब

 

सवाल नं. 2

दिबांग- गुजरात के अच्छे सीएम कौन थे. नरेंद्र मोदी या केशुभाई पटेल

जवाब हार्दिक- केशुभाई पटेल

दिबांग- क्यों कह रहे हैं आप ऐसा?

हार्दिक- अच्छा किया था

दिबांग– और नरेंद्र मोदी

हार्दिक- केशुभाई ने अच्छा किया था.

 

सवाल नं. 3

दिबांग- हार्दिक पटेल के पीछे कौन खड़ा है. बीजेपी या कांग्रेस

हार्दिक- 27 करोड़ कुर्मी पाटिदार

 

सवाल नं. 4

दिबांग- हार्दिक पटेल सीधे राजनीति में आएंगे या रिमोट से चलाएंगे.

हार्दिक- नहीं देना जवाब

दिबांग- पर आप ने कहा कि रिमोट से चलाएंगे.

हार्दिक- जिम्मेदारी से चलाएंगे

 

सवाल नं. 5

दिबांग- आप के दिल के करीब कौन है. लेऊआ पटेल या कड़ुआ पटेल

हार्दिक- तीसरा ऑप्शन दे दो

दिबांग- दो ऑप्शन हैं आप के पास

हार्दिक- दोनों हैं हमारे पास. बहुत ही बड़े संकट में डाल दिया आप ने. हम तो लव, कुश की संतान हैं दोनों हमारे भाई हैं, दोनों हमारे बाप हैं, दोनों हमारे साथ हैं.

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Web Title: Hardik Patel in press conference
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