महज 22 साल का हार्दिक पटेल बन गया है गुजरात सरकार के लिए चुनौती!

By: | Last Updated: Tuesday, 18 August 2015 4:44 PM
Hardik Patel leads the Patel agitation for reservation in Gujarat

नई दिल्ली: गुजरात की चर्चा आप दो वजह से करते रहे हैं एक हैं प्रधानमंत्री मोदी और दूसरा विकास का गुजरात मॉडल लेकिन आज उसी गुजरात को एक शख्स एक बिलकुल अलग वजह से चर्चा में ले आया है. गुजरात के 20 फीसदी पटेल समुदाय के बीच आरक्षण की मांग का चेहरा 22 साल का हार्दिक पटेल बन गया है और मोदी के घर में मोदी के लिए चुनौती भी.

 

सिर्फ चंद घंटों का फासला था. भारत की धरती से दूर दुबई के एक क्रिकेट स्टेडियम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक झलक पाने को 40 हजार भारतीय बेताब नजर आए थे. और ठीक 12 घंटे पहले नरेंद्र मोदी के अपने राज्य गुजरात में हार्दिक पटेल नाम का ये युवा 5 लाख लोगों की भीड़ लेकर एक नई चुनौती खड़ी कर रहा था. हार्दिक पटेल की कहानी पढ़ने से पहले जरा उसकी ताकत को समझ लीजिए. 

 

गुजरात का वो शहर सूरत था जिसकी सूरत साढ़े पांच घंटों के लिए बदल सी गई थी. सूरत के कपोद्रा इलाके से शुरू हुई इस रैली के दोनों छोरों के बीच 9 किलोमीटर का फासला था और इस फासले के बीच पटेल समुदाय के 5 लाख से ज्यादा लोग मौजूद थे.

 

वजह भी बताते हैं – भीड़ में जागो पाटीदार, जय सरदार का नारा गुंज रहा था. अपने नाम के साथ पटेल सरनेम लिखने वाला ये पाटीदार समाज है जो आरक्षण की मांग को लेकर सड़क पर निकल पड़ा है. मांग ये है कि पाटीदार समुदाय को भी पिछड़े वर्ग में शामिल किया जाए ताकि उन्हें भी पहले से मौजूद पिछड़ा आरक्षण कैटेगरी में हिस्सा मिल सके.

 

आरक्षण की मांग को लेकर ये पहला आंदोलन नहीं है लेकिन आप चौंक जाएंगे ये जानकर कि 5 लाख लोगों को सड़कों पर बैनर पोस्टर और तख्तियों के साथ उतारने वाला ये शख्स महज 22 साल का एक युवा है जिसका नाम है हार्दिक पटेल.

 

हार्दिक पटेल को पाटीदार समाज ने उन्हें अपने सपनो का शहंशाह बना लिया है. फिल्मी गाने पर हार्दिक पटेल की तस्वीरें उसके 4 साल के सार्वजनिक जीवन की कहानी खुद सुना रही हैं. इन तस्वीरों में कांग्रेस के नेता भी हैं, बीजेपी के विधायक भी हैं कभी वो खुद कंधे पर बंदूक लिए दिखते हैं तो कभी कार के बोनट पर हाथों में रिवाल्वर तोलते नजर आते हैं.

 

हार्दिक पटेल एक ऐसा चेहरा बन चुके हैं जिन्हें रोक पाने में गुजरात की आनंदी बेन पटेल सरकार भी नाकाम साबित हो रही है. दरअसल हार्दिक ने गुजरात सरकार की नाक में दम करने के लिए पाटीदारों के आरक्षण की मांग की 4 दशक पुरानी चिंगारी को हवा दे दी है और अब आग की तरह गुजरात के चप्पे चप्पे में फैल रहा है पाटीदार आंदोलन.

 

गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की दुनिया में सबसे ऊंची लौह प्रतिमा बनाने की योजना शुरू की थी. माना जाता है कि इसकी वजह थी गुजरात का 20 फीसदी पटेल-पाटीदार समुदाय का वोट बैंक.

 

लेकिन अब सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम पाटीदार समुदाय के आंदोलन का नारा बन चुका है. नारा है जागो पाटीदार, जय सरदार और आंदोलन के प्रचार में हार्दिक पटेल सरदार पटेल के चेहरे का भरपूर इस्तेमाल करते हैं.

 

वो खुद भी कहते हैं कि पाटीदार समुदाय के आरक्षण के लिए आंदोलन अहिंसक है लेकिन जरूरत पड़ी तो वो भगत सिंह बनने को भी तैयार हैं.

 

हार्दिक पटेल की उम्र भले ही कम हो लेकिन साल 2004 में गुजरात के मेहसाणा से शुरू हुए सरदार पटेल सेवादल के सदस्य हो गए थे. अहमदाबाद से करीब 80 किलोमीटर दूर वीरमगाम के रहने वाले हार्दिक पटेल ने साल 2011 में सेवादल से अलग होकर वीरमगाम में एसपीजी यानी सरदार पटेल सेवादल शुरू किया था.

 

आज भले ही हार्दिक पटेल पाटीदार समुदाय की दुखती रग पहचान गए हैं लेकिन पिछले चार साल में उनका मुख्य काम पाटीदार समुदाय की छोटी मोटी समस्याएं सुलझाना था. कभी दहेज के मामले मे सुलह कराना तो कभी किसी का इलाज करवा देना.

 

उस दौर में राजनीतिक मंचों पर भी अपना भविष्य तलाश रहे थे हार्दिक पटेल लेकिन उन्नीस-बीस साल के एक युवा को राजनीति यूं ही गले लगाने को तैयार नहीं थी.

 

हार्दिक पटेल को दो महीने पहले गुजरात में लोग ठीक से नहीं जानते थे. गुजरात के बीजेपी नेता भारत भाई पटेल के बेटा होने के बावजूद हार्दिक पटेल के सामने अपनी हैसियत और अपना कद बनाने की चुनौती थी. इसके लिए हार्दिक पटेल ने अपने पिता की पार्टी की सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया. 6 जुलाई 2015 को गुजरात के मेहसाणा से शुरू हुआ पाटीदार अनामत आंदोलन समिति यानी पास का पहला प्रदर्शन.

 

मेहसाणा की सभा में चंद हजार लोग ही शामिल हुए थे. तब सवाल ये था कि आखिर पैसे वाला माना जाने वाला पाटीदार समुदाय आरक्षण क्यों चाहता है? इसका जवाब भी हार्दिक ने तलाश लिया है.

 

हार्दिक ने तर्क पेश किए और सवाल उठाए. हार्दिक का कहना है कि आखिर गुजरात में ही पाटीदार समाज के लिए अलग आरक्षण नीति क्यों है? हार्दिक की ये आवाज गुजरात की आबादी के 20 फीसदी पाटीदारों तक पहुंची. और देखते ही देखते ये आंदोलन ऊंझा तक पहुंच गया. ऊंझा यानी पाटीदारों के लिए पवित्र मानी जाने वाली देवी उमिया माता का पवित्र स्थान.

 

इसके बाद तो सिलसिला शुरू हो गया कभी ट्रक पर चढ़कर तो कभी मंच पर पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के आरक्षण की आवाज को हार्दिक पटेल गूंज में बदलने लगे.

 

आंदोलन को खड़ा करने में सोशल मीडिया का भी हार्दिक पटेल जमकर इस्तेमाल करते हैं. कोई सोच भी नहीं सकता था कि 22 साल का ये युवक गुजरात में इतना बड़ा आंदोलन खड़ा कर देगा. अहमदाबाद से कॉमर्स में ग्रेजुएशन करने वाले हार्दिक पटेल ने शुरुआत तो बतौर कारोबारी की थी. वह कारोबारी संस्थानों में पानी की सप्लाई का धंधा करते थे लेकिन अब वो अपने पाटीदार समुदाय के आरक्षण की पुरानी प्यास को जगा चुके हैं.

 

पाटीदार समुदाय के बारे में भी जान लीजिए

 

पाटीदार समुदाय के लोग खुद को भगवान श्रीराम का वंशज कहते हैं. उनके मुताबिक वो श्रीराम के बेटे लव और कुश की संतान हैं. लव के वंश से नाता जोड़ने वाले पाटीदार खुद लेउवा पाटीदार कहते हैं. कुश के वंश से नाता जोड़ने वाले पाटीदार खुद कडवा पाटीदार कहते हैं. पाटीदारों की चार मुख्य जातियों में से लेउवा और कडवा पाटीदार को आरक्षण नहीं मिला है.

 

हार्दिक पटेल भी कडवा पाटीदार समुदाय से आते हैं. हार्दिक पटेल के दो महीने के आंदोलन के बाद गुजरात की सीएम आनंदीबेन पटेल ने 7 मंत्रियों की एक समिति बना दी है जो मांगों पर विचार कर रही है लेकिन हार्दिक पटेल का कहना है कि इस समिति पर उन्हें कोई भरोसा नहीं है.

 

हार्दिक पटेल का कद जिस चमत्कारिक ढंग से बढ़ा है उसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. माना ये जाता है कि इस आंदोलन के पीछे सत्तारुढ बीजेपी के कुछ नेताओं का भी हाथ है, जो आनंदीबेन पटेल की मौजूदा सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं. बीजेपी के वरिष्ठ नेता पुरुषोत्तम रुप्पाला भी मानते हैं कि सरकार को अस्थिर करने की ये साजिश हो सकती है.

 

बीजेपी के लोग कह रहे हैं कि ये आंदोलन कांग्रेस के बिना परवान नहीं चढ़ सकता था. वही राज्य सरकार में श्रम, रोजगार और परिवहन विभाग के मंत्री विजय रुपाणी का कहना है कि सरकार आंदोलनकारियों से बातचीत कर रही है और पूरे मसले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया जाएगा.

 

लेकिन हार्दिक ने गुजरात में नरेंद्र मोदी से विरासत में मिली सीएम की कुर्सी संभालने वाली आनंदीबेन के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है. 25 अगस्त को अहमदाबाद में एक महारैली बुला रहे हैं हार्दिक पटेल और दावा किया जा रहा है कि इस रैली में 25 लाख से ज्यादा लोग आ सकते हैं. जिस गुजरात को नरेंद्र मोदी ने विकास का आईना बनाया था उसमें अब आंदोलनों की छाया बनकर नजर आ रहे हैं हार्दिक पटेल.

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Web Title: Hardik Patel leads the Patel agitation for reservation in Gujarat
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