परेशानी का सबब बनी तस्वीरें- हाशिमपुरा मामले में सैन्य जांच की मांग

By: | Last Updated: Monday, 30 March 2015 3:38 PM

नई दिल्ली: लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग (सेवानिवृत) ने हाशिमपुरा में 1987 के साम्प्रदायिक दंगों के दौरान की कुछ तस्वीरों को परेशान करने वाला बताते हुए बल द्वारा इस मामले में गहन जांच कराने की मांग की ताकि इससे सबक सीखा जा सके.

 

सेना के उत्तरी एवं केंद्रीय कमान के पूर्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ पनाग ने कहा कि वह जल्द ही सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह को पत्र लिख कर उस घटना की जांच की मांग करेंगे, जिसके बाद हाशिमपुरा नरसंहार हुआ था.

 

उन्होंने अपना विचार सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद कहा, ‘‘हाल में प्रकाशित वह तस्वीरें देखना परेशान करने वाला है जिसमें सेना के कर्मी एक बच्चे पर बंदूक ताने खड़े दिख रहे हैं.’’ पनाग ने कहा कि वह सेना प्रमुख को पत्र लिखकर इस मामले की जांच की मांग करेंगे ताकि इससे भविष्य के लिए सबक लिया जा सके.

 

इस बीच, सेना सूत्रों ने बताया कि घटना में सेना की भूमिका को लेकर कोई मामला सामने नहीं आया है. सूत्रों ने बताया, ‘‘इसे (इस मामले को) करीब 30 साल हो चुके हैं. इस घटना में सेना की संलिप्तता के बारे में कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है.’’

 

तस्वीरों में दिखता है कि सेना के कर्मी लोगों को हिरासत में ले रहे हैं क्योंकि वे हाशिमपुरा में साम्प्रदायिक दंगों को कुचलने की कोशिश कर रहे हैं. पनाग उस वक्त यहां सेना मुख्यालय में लेफ्टिनेंट कर्नल थे.

 

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सेना ने हाशिमपुरा में घर-घर तलाशी ली थी और लोगों को हिरासत में लिया था, जिन्हें बाद में पीएसी को सौंप दिया गया. एक सत्र अदालत ने गत 21 मार्च को हाशिमपुरा में 42 मुसलमानों का नरसंहार करने के आरोपी 16 पीएसी कर्मियों को बरी कर दिया था.

 

पनाग ने प्रवीण जैन द्वारा तस्वीरें दिखाए जाने के बाद एक ट्वीट में कहा, ‘‘87 में शर्मिंदा हुआ, उससे भी ज्यादा अब शर्मिंदा हुआ क्योंकि सेना की संदिग्ध भूमिका से अवगत नहीं था. प्रवीण जैन को सलाम. सेवानिवृत्त सेना अधिकारी के ट्वीट में जैन द्वारा एक प्रत्यक्षदर्शी के वीडियो अकाउंट का लिंक भी दिया है. पनाग ने यह भी ट्वीट किया कि मिल्रिटी ऑपरेशन कार्यालय में सारे रिकॉर्ड उपलब्ध हैं.

 

उन्होंने पीएसी और सेना की भूमिका के बीच अंतर करने की भी मांग की. उन्होंने दोनों को दो अलग मुद्दा बताया. उन्होंने कहा कि पीएएसी का मामला नरसंहार से जुड़ा हुआ है जबकि सेना का गलत व्यवहार घटना का परिणाम है. ‘‘तस्वीरें कहानी बयां करती हैं.’’

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Web Title: Hashimpura case must be re-investigated, says VN Rai
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