बिना डाक्टर की सलाह के दिल के मरीज न रखें रोजा

By: | Last Updated: Tuesday, 16 June 2015 2:01 PM

कानपुर: मुस्लिमों के पवित्र माह रमजान का महीना चंद्र दर्शन के अनुसार 18 या 19 जून से शुरू है और इस बार करीब 34 साल बाद गर्मी के मौसम में करीब 15 घंटे 25 मिनट का लंबा रोजा होगा.

 

ऐसे में डाक्टरों की सलाह है कि रोजे में दिल और मधुमेह रोग का शिकार मरीज खास सतर्क रहें और बिना अपने डाक्टर की सलाह के रोजा न रखें लखनउ के संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो सुदीप कुमार ने बताया कि रमजान में अक्सर दिल के मरीज और मधुमेह पीडित लोग यह सवाल करते हैं कि क्या उन्हें रोजा रखना चाहिये.

 

उन्होंने कहा कि जो रोगी पहले दिल के हल्के दौरे के शिकार हो चुके है वह रोजा रख सकते है क्योंकि तमाम शोध में देखा गया है कि रमजान में रोजा रखने के दौरान भी ऐसे रोगियों को उतना ही जोखिम रहता है जितना आम दिनों में. बस उन्हें अपने डाक्टर से सलाह लेकर अपनी दवा की मात्रा में थोड़ा सामंजस्य बिठा लेना चाहिये और खाने पीने में सावधानी बरतनी चाहिये.

 

प्रो कुमार ने कहा लेकिन जिन रोगियों को दिल का भारी दौरा पड़ चुका है और उनकी बाईपास सर्जरी हो चुकी है, उन्हें रोजे से परहेज रखना चाहिये क्योंकि ऐसे रोगियों को दिन में कई बार दवा लेनी पड़ती है और साथ ही उनके शरीर में पानी का स्तर भी सामान्य बना रहना जरूरी है.

 

उन्होंने कहा कि दिल के रोगियों को उनका डाक्टर उनकी पूरी जांच करने के बाद अगर रोजा रखने की इजाजत दे तो ही वह रोजा रखें. बिना डाक्टर की सलाह के रोजा रखना उन मरीजों के लिये खतरनाक हो सकता है जिनकी बाईपास सर्जरी हो चुकी है.

 

प्रो कुमार ने कहा कि जो लोग जन्म से मधुमेह (टाइप वन) के रोगी हैं और इंसुलिन लेते हैं उन्हें रोजा रखने से बचना चाहिये क्योंकि अगर वह इंसुलिन नही लेंगे तो उनके रक्त में शर्करा का स्तर :ब्लड शुगर लेवल: बढ़ जायेगा और उनकी हालत खराब हो सकती है.

 

उन्होंने कहा कि इसी तरह जिन लोगों को उनके रहन सहन के कारण मधुमेह (टाइप टू) हुआ है वे रोजा रख सकते है लेकिन इसके लिये उन्हें काफी सावधानी बरतनी होगी. उन्हें अपने खाने पीने का तरीका बदलना होगा. ऐसे लोगों को सुबह सहरी में पर्याप्त खाना खा लेना चाहिये और उसके साथ अपनी दवायें ले लेनी चाहिये.

 

उन्होंने कहा कि इस बात का भी ख्याल रखा जाना चाहिये कि ऐसे रोगी जो भी खाना खायें वह ज्यादा तला भुना न हो और अगर मांसाहार लेते हैं तो वह बहुत कम मात्रा में लेना चाहिये तथा काफी कम तेल मसाले में बना हुआ होना चाहिये. इसी तरह इफ्तार के समय भी ऐसे रोगियों को एकदम से पूरा खाना नहीं खा लेना चाहिये बल्कि थोड़े बहुत फल और फलो का जूूस लेना चाहिये और कुछ और हल्की फुल्की खाने की चीजे ले कर तुरंत दवा ले लेनी चाहिये.

 

लखनउ पीजीआई के डा सुदीप के अनुसार कि रमजान के दौरान दिल की बीमारी और मधुमेह से पीड़ित रोगियों को अपने खान पान पर थोड़ा नियंत्रण रखना चाहिये. रमजान के दिनों में चूंकि अनेक पकवान बनते हैं इसलिये खास तौर पर ध्यान रखना चाहिये.

 

रोजा रखने वाले मधुमेह और रोगियों को चाहिये कि रोजा खोलने के एक घंटे बाद ही पूरा खाना खायें लेकिन वह भी ज्यादा तला भुना और मसालेदार नहीं हो. उन्होने कहा कि अगर दिन में रोजा रखने के दौरान कमजोरी महसूस हो तो तुरंत लेट कर आराम कर लेना चाहिये.

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Web Title: heart_Patient
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