जामा मस्जिद के शाही इमाम को फिलहाल हाईकोर्ट से राहत

By: | Last Updated: Friday, 21 November 2014 6:06 AM
High Court refuses to stay anointment of Iman Bukhari’s son; says it is a private function, has no legal sanctity

नई दिल्ली: जामा मस्जिद के शाही इमाम को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कल शाही इमाम अपने बेटे को विरासत सौपेंगे.

 

दिल्ली हाईकोर्ट ने आज एक जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा है कि जामा मस्जिद के शाही इमाम द्वारा अपने बेटे को अपना उत्तराधिकारी तथा नायब नियुक्त करने के उनके फैसले की कोई कानूनी वैधता नहीं है. इस पर रोक नहीं लगेगी.

 

हाईकोर्ट ने जामा मस्जिद के नायब इमाम के तौर पर शाही इमाम के बेटे की दस्तारबंदी पर रोक लगाने से इंकार करते हुए 28 जनवरी तक केंद्र, वक्फ बोर्ड और इमाम बुखारी का जवाब मांगा है. कोर्ट ने वक्फ बोर्ड से पूछा है कि इतने समय से इमाम बुखारी के खिलाफ कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया?

 

आपको बता दें कि वक्फ बोर्ड द्वारा इमाम के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में उनके बेटे को नायब इमाम बनाने के खिलाफ दायर की गई थी. कोर्ट में दायर की गई तीन जनहित याचिकाओं में कहा गया था कि जामा मस्जिद दिल्ली वक्फ बोर्ड की संपत्ति है और मौलाना सैयद अहमद बुखारी (शाही इमाम) अपने बेटे को नायब इमाम नहीं नियुक्त कर सकते.

 

याचिकाओं में कहा गया था कि बुखारी के 19 वर्षीय बेटे शबन बुखारी को नायब इमाम बनाना गलत है, क्योंकि वक्फ अधिनियम में उत्तराधिकार का नियम शामिल नहीं है.

 

आपको बता दें कि शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने अपने बेटे दस्तारबंदी समारोह में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित नहीं किया है. हालांकि, बुखारी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को जरूर न्योता भेजा है. यह समारोह 22 नवंबर को दिल्ली में होने वाला है जिसमें देश-विदेश से हजारों धार्मिक गुरू पहुंचेंगे.

 

हाईकोर्ट ने इमाम बुखारी से यह भी पूछा है कि उन्होंने इस समारोह का आयोजन क्यों किया?

 

सुहैल अहमद खान, अजय गौतम और वीके आनंद की ओर से दायर जनहित याचिकाओं के अनुसार, “यह जानते हुए कि इमाम वक्फ बोर्ड के कर्मचारी हैं और इमाम की नियुक्ति का अधिकारी बोर्ड के पास है, बुखारी ने अपने 19 वर्षीय बेटे को नायब इमाम बना दिया और इसके लिए दस्तर बंदी कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जो कि पूरी तरह गैर इस्लामिक है.”

 

याचिकाओं में यह भी आरोप लगाया गया था कि बुखारी ने पूरी तरह अराजकता फैलाई हुई है और वह अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं.

 

जामा मस्जिद का निर्माण मुगल काल में किया गया था. इसके अतिरिक्त जनहित याचिकाओं में बुखारी की शाही इमाम के रूप में नियुक्ति को भी रद्द करने की मांग की गई थी.

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Web Title: High Court refuses to stay anointment of Iman Bukhari’s son; says it is a private function, has no legal sanctity
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