कथित आतंकियों को दिल्ली हाईकोर्ट ने किया बरी

By: | Last Updated: Thursday, 14 May 2015 5:43 PM

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने 2007 में दिल्ली के आईएनए पर बने दिल्ली हॉट से गिरफ्तार किये गए कथित आतंकियों को निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने के फैसले को सही ठहराया.

 

निचली अदालत के फैसले में पुलिस की जांच पर सवाल उठाया गया था जिसकी वजह से केस कमजोर हो गया और अदालत को संदेह का लाभ देकर लश्कर के दो कथित आतंकियों को बरी करना पड़ा. जिसके बाद पुलिस ने अपनी कमियों पर पर्दा डालने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की. और अब हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगा दी. 

 

दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्‍पणी करते हुए कहा की जो गलती एक बार हो गई, उसे सुधारा नहीं जा सकता.

 

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने निचली अदालत द्वारा दो कथित आतंकियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी.

 

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा की इस केस में अहम सार्वजनिक गवाहों ने ही पुलिस के पक्ष में बयान नहीं दिए. इसके अलावा मौका ए वारदात से बरामद विस्फोटकों को सीएफएसएल जांच के लिए भेजने में 21 दिन की देरी का कारण भी पुलिस नहीं बता सकी.

 

इसी सबको आधार मानते हुए पहले निचली अदालत ने और अब हाई कोर्ट ने लश्कर के कथित आतंकी पाकिस्तान निवासी मोहम्मद हसन व कश्मीर निवासी शफाकत इकबाल को बरी कर दिया.

 

ये मामला साल 2006 का है जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को दिसंबर महीने में जानकारी मिली कि लश्कर आतंकी दिल्ली में एक फियादीन हमला करने वाले हैं.

 

पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि 26 अप्रैल 2007 को कश्‍मीर निवासी शफाकत इकबाल दिल्ली हाट के गेट पर शाम करीब साढ़े 6 बजे आने वाला है और वह विस्फोटकों से भरा बैग दो पाकिस्‍तानियों शब्बीर अहमद और मोहम्मद हसन को देने वाला है.

 

उसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने तीनों कथित आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया. आरोपियों के पास से पुलिस ने विस्फोटक, डेटोनेटर, टाईमर और अन्य सामान की बरामदगी दिखाई.

 

साथ ही शब्बीर अहमद के पास से पुलिस ने 25 हजार रुपये की बरामदगी दिखाई. निचली अदालत ने इस मामले में अहमद को विदेशी अधिनियम के तहत पांच साल जेल की सजा सुनाई थी. जबकि बाकी दोनो आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था. निचली अदालत के इसी फैसले को दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

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Web Title: High Court_Terrorist_
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