सौहार्द की शानदार मिसाल, जब एक हिंदू ने दी अपनी दुकान में नमाज की जगह

By: | Last Updated: Friday, 16 October 2015 2:49 PM
HINDU PROVIDE PLACE FOR NAMAZ

मुंबईः दादरी कांड के बाद जहां एक ओर देश में बढ रही सांप्रदायिकता को लेकर चिंता जताई जा रही है, तो वहीं दूसरी ओर मुंबई में हिंदू-मुस्लिम एकता की एक दिलचस्प मिसाल सामने आई है. ये मिसाल भी मुंबई के उस धारावी इलाके से है जिसका सांप्रदायिक हिंसा का इतिहास रहा है और 1992-93 के दंगों के वक्त जहां मजहब के नाम पर खूब खून खराबा हुआ था. जब मरम्मत के लिये मुसलमानों को अपनी मस्जिद से महरूम होना पड़ा तो एक हिंदू व्यापारी ने नमाज अदा करने के लिये उन्हें अपनी दुकान सौंप दी और उसे मस्जिद में तब्दील कर दिया.  

 

जिस जगह पर नमाज अदा होती है वह दरअसल एक हिंदू चमड़ा कारोबारी की है. तमाम लोग पहले पास की नूरानी मस्जिद में नमाज पढते थे, लेकिन जब उस मस्जिद की मरम्मत का काम शुरू हुआ तो इन लोगों के सामने समस्या खड़ी हो गई कि इबादत कहां करेंगे? नमाज कहां पढेंगे?

 

धारावी की नूरानी मस्जिद जहां स्थानीय मुसलमान नमाज पढ़ते थे. 35 साल पुरानी इस मस्जिद में आसपास के मुसलमान नमाज पढते थे, लेकिन जब मस्जिद की हालत काफी जर्जर हो गई तो इसकी मरम्मत शुरू की गई. ऐसे में लोगों के सामने सवाल खड़ा हो गया कि नमाज कहां पढ़ी जायेगी. तब मस्जिद के सेक्रेटरी खुर्शीद खान ने अपने दोस्त दीप से संपर्क किया. काले ने खुर्शीद खान की फरियाद पर अपनी दुकान नमाज पढने के लिये दे दी.

 

दरअसल चमड़ा कारोबारी दीपक काले अपनी इस दुकान को बेचने जा रहे थे, लेकिन अपने मुस्लिम दोस्त की गुजारिश पर उन्होने जगह नमाज के लिये दे दी. मसजिद की ओर से काले को हर महीने किराया देने की भी पेशकश की गई, लेकिन काले ने किराया लेने से मना कर दिया. काले की जिस दुकान में नमाज पढी जाती है उसका क्षेत्रफल 3000 वर्गफुट का है. धारावी इलाके में इतनी बडी जगह के लिये काले को हर महीने एक से सवा लाख रूपये के बीच किराया मिलता, लेकिन चूंकि जगह का इस्तेमाल धर्म के काम के लिये हो रहा था, इसलिये इन्होने किराया लेना ठीक नहीं समझा.

 

ये कोई पहली बार नहीं है कि दीपक काले ने सांप्रदायिक सौहार्द की कोई मिसाल कायम की हो. दिसंबर 1992 और जनवरी 1993 के दंगों के दौरान भी उन्होने धार्मिक कटट्रता को दरकिनार करके इंसानियत की मिसाल पेश की थी. उन दंगों में मुंबई के 900 लोग मारे गये थे, जिनमें से एक बडी तादाद धारावी के लोगों की भी थी.उस वक्त काले ने दंगाईयों से बचाने के लिये कई मुसलिम परिवारों को अपने घर और दुकान पर छुपा दिया था. जिन परिवारों की काले ने जान बचाई थी, उनमें नूरानी मसजिद के सेक्रेटरी खुर्शीद खान का भी परिवार था.

 

बीफ बैन, लव जिहाद, घर वापसी जैसी खबरों के इस दौर में धारावी की ये मिसाल चौंकाती है. यकीन नहीं होता कि ये वही धारावी है, जहां दंगों के दौरान धर्म के नाम पर भारी खून खराबा हुआ था. देश को ऐसी और मिसालों की जरूरत है.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: HINDU PROVIDE PLACE FOR NAMAZ
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: Hindu Muslim Namaz
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017