हिसार में रामपाल के आश्रम से 15 हजार लोगों को निकाला गया, चार लोगों की मौत का दावा

By: | Last Updated: Wednesday, 19 November 2014 2:40 AM
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नई दिल्ली: हरियाणा के हिसार में पुलिस रामपाल को गिरफ्तार करने के लिए अब किसी भी वक्त कार्रवाई शुरू कर सकती है. रात भर से श्रद्धालुओं को निकालने का काम चल रहा है. हिसार के सतलोक आश्रम से चार शवों को बाहर निकाला गया है. चारों शवों को एंबुलेंस में रखकर ले जाया जा रहा है. हालांकि पुलिस ने आश्रम के दावे को नकार दिया था और कहा था कि अगर कोई मौत हुई है तो आश्रम शव दिखाए. सतलोक आश्रम के मीडिया को-ऑर्डिनेटर राहुल दास ने चार ऐसे लोगों की तस्वीर जारी है जिनके बारे में ये दावा किया गया है कि इन चारों की कल पुलिस ऑपरेशन में मौत हुई थी.

 

हम इनके चेहरे नहीं दिखा रहे हैं क्योंकि मौत की पुष्टि नहीं हुई है. आश्रम ने जिन चार लोगों की तस्वीर जारी की हैं.

 

 

जवानों ने की एसपी की पिटाई

मंगलवार को हिसार के बरवाला में पुलिस ऑपरेशन के वक्त हुआ था एसपी और जवानों के बीच झगड़ा हुआ. यमुनानगर के एसपी शशांक आनंद ने तीन पुलिस जवानों को लात मारी थी और एक इंस्पेक्टर को थप्पड़ मार दिया था. इसके बाद भड़के जवानों एसपी को ही पीट दिया. पुलिस फोर्स पीछे हट गई और तमाम समझाने के बावजूद भी आगे नहीं गई. इस वजह से ऑपरेशन रोकना पड़ा था.

 

हिसार के बाबा रामपाल तक पुलिस नहीं पहुंच पाई है. पुलिस सतलोक आश्रम में भी कदम नहीं रख पाई है.

 

15,000 लोग निकाले गए

मंगलवार को हुई जबरदस्त हिंसा के बावजूद हिसार में रामपाल को गिरफ्तार करने और आश्रम में घुसने में पुलिस अब तक नाकाम रही है. आश्रम में बंधक 15 हजार लोग मंगलवार देर रात निकाल लिए गए हैं.

हिसार के सतलोक आश्रम से मंगलवार देर रात श्रद्धालुओं को पुलिस ने बसों में भरकर भेजा. पुलिस की अपील के बाद लोग आश्रम से बाहर निकले. आश्रम से बाहर निकले ज्यादातर श्रद्धालुओं का दावा है कि उन्हें जबरन आश्रम में रखा गया था. सतलोक आश्रम के बाहर डटी पुलिस को उम्मीद है कि आश्रम खाली होने के बाद संत रामपाल को किया गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

 

कल क्या हुआ था

हिसार में संत रामपाल की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो पाई है. मंगलवार को घंटों की कोशिश के बावजूद पुलिस सतलोक आश्रम में घुसने में नाकाम रही. झड़प में 100 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए.

 

सतलोक आश्रम के बाहर हालात तनावपूर्ण रहे. मंगलवार को घंटों पुलिस और रामपाल के समर्थकों के बीच झड़प जारी रही. रविवार को समर्थकों ने आश्रम के बाहर आगजनी की.

 

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हिसार में रामपाल समर्थकों और हरियाणा पुलिस के बीच हिंसक झडप, गोलियां चलीं, करीब सवा सौ लोग जख्मी. हिसार जिले के बरवाला में सतलोक आश्रम के बाहर पुलिस और रामपाल के समर्थकों के बीच जबरदस्त हिंसा हुई. पहले आश्रम की तरफ से फायरिंग हुई, उसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े.

 

सतलोक आश्रम के बाहर हुई हिंसा में एक पुलिस वाले को गोली लगी, 15 पुलिस वालों को चोट लगी है. 100 से ज्यादा रामपाल समर्थक घायल हुए.

 

रामपाल विवादः पुलिस की बेशर्मी, मीडिया पर किया हमला

 

सतलोक आश्रम के बाहर हिंसा उस वक्त शुरू हुई जब दोपहर सवा बारह बजे के करीब जब पुलिस वालों ने आश्रम के मेट गेट से घुसने की कोशिश की, लेकिन रामपाल समर्थकों ने पुलिस को अंदर नहीं जाने दिया.

सतलोक आश्रम का दावा है कि रामपाल हरियाणा से बाहर हैं. लेकिन आश्रम ने रामपाल का ठिकाना बताने से इनकार कर दिया.

 

विपक्षी दलों ने बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में रामपाल से बीजेपी ने समर्थन माँगा था, जिसकी वजह से वो जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रही है.

 

हरियाणा: पुलिस ने मीडियाकर्मियों को निशाना बनाया

 

कोर्ट के आदेश के बावजूद रामपाल को गिरफ्तार करने में नाकाम रही हरियाणा की खट्टर सरकार पर सवाल उठ रहे हैं, सवाल ये भी है कि रामपाल को पकड़ने में नाकाम रही पुलिस ने मीडिया पर हमला क्यों किया.

 

पंजाब औऱ हरियाणा हाई कोर्ट ने रामपाल की जमानत रद्द करने पर फैसला सुरक्षित रखा, 21 नवंबर तक किसी भी दिन फैसला आ सकता है.

 

कौन हैं रामपाल

 

1951 में हरियाणा के सोनीपत में जन्मे रामपाल पढ़ाई पूरी करने के बाद हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर थे. इसी दौरान उनकी भेंट 107 साल के कबीरपंथी संत स्वामी रामदेवानंद महाराज से हुई. रामपाल उनके शिष्य बन गये. इसके बाद 1995 में उन्होंने 18 साल लंबी अपनी नौकरी छोड दी और सत्संग करने लगे. 1999 में उन्होंने सतलोक आश्रम की नींव रखी.

 

क्या है इनका ज्ञान

नशीले पदार्थों के सेवन का विरोध – संत रामपाल अपने अनुयायइयों को हुक्का, शराब, बीयर, तम्बाखु, बीड़ी, सिगरेट, हुलास सुंघना, गुटखा, मांस, अण्डा, सुल्फा, अफीम, गांजा और अन्य नशीली चीजों का सेवन तो दूर रहने की बात कहते हैं.

 

तीर्थ स्थानों पर जाना निषेध – संत रामपाल किसी भी तरह के व्रत, पूजा पाठ को नहीं मानते. साथी ही गंगा स्नान, मंदिरों में जाने को भी बुरा मानते हैं.

 

जन्म-मरण के बाद होने वाले किसी भी तरह के पूजा पाठ का विरोध करते हैं. साथ ही पितरों के पूजा का भी विरोध करते हैं

 

मांसाहारी भोजन और समाज में छूआछूत का विरोध करते हैं. किसी भी अवसर पर किए जाने वाले नाच-गान को अश्लील मानते हैं और उसका पूर्ण रूप से विरोध करते हैं.

 

विवाह के मौके पर दिए जाने वाले किसी भी तरह के दहेज के लेन देन के खिलाफ हैं. उनका कहना है कि दहेज लेना व देना कुरीति है तथा मानव मात्र की अशांति का कारण है

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