नागा संगठन एनएससीएन से समझौते में क्या है खास?

By: | Last Updated: Wednesday, 5 August 2015 4:07 PM
historic Naga peace

नई दिल्ली: नागा संगठन एनएससीएन से कल हुए शांति समझौते को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऐतिहासिक करार दिया है. इस समझौते से पिछले 60 सालों से चला आ रहा गतिरोध लगभग समाप्त हो गया है. इस एग्रीमेंट को उत्तर-पूर्व में शांति स्थापित करने में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. एनएससीएन (आईएम) नागा संगठनों का सबसे बड़ा ग्रुप है. इस ग्रुप का अध्यक्ष ईसाक स्वू है और महासचिव टी मुईवा है.

 

सोमवार को भारत सरकार से समझौता मुईवा ने किया था, क्योंकि ईसाक बीमार है और अस्पताल में भर्ती है. लेकिन समझौते पर दोनों ईसाक और मुईवा के हस्ताक्षर हैं. इन दोनों के नाम पर ही संगठन का नाम एनएससीएन (आई एम-ईसाक मुईवा) है.

 

1980 में नागालैंड के अलगाववादी विद्रोहियों ने एनएससीएन यानि नागालैंड सोशिलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड की स्थापना की थी. लेकिन 1988 में  इस संगठन के एक सक्रिय और सीनियर मेम्बर एस एस खापलांग ने अपना अलग संगठन तैयार कर उसे एनएससीएन (के यानि खापलांग) नाम दिया. उसके बाद से ही पुराने एनएससीएन को आई-एम नाम से जाना जाने लगा.

 

1997 में आई-एम ने सरकार से युद्धविराम संधि की.

 

मोदी सरकार की तरफ से नागा संगठनों के लिए मध्यस्थ चुना गया ज्वाइंट इंटेलीजेंस कमेटी के चीफ, आर एन रवि को. केरल कैडर के सीनियर आईपीएस , रवि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार( एनएसए) अजित डोवाल के खासोमखास माने जाते हैं. आर एन रवि ने खुद नागालैंड और मणिपुर में पीएमओ राज्यमंत्री जीतेन्द्र सिंह के साथ मिलकर नागा संगठनों से बातचीत की, तब जाकर ये शांति समझौति हुआ है. एक ऐसी ही मीटिंग में मणिपुर की राजधानी इंफाल में (11 जून) एबीपी न्यूज की टीम भी मौजूद थी.

 

लेकिन इस समझौते में एनएससीएन का वो धड़ा शामिल नहीं है जिसने 4 जून को भारतीय सेना के काफिले पर हमला कर 18 जवानों को मौत के घाट उतार दिया था. ऐसे में इस बात की भी आंशका जताई जा रही है कि इस समझौते के बाद एनएससीएन का खापलांग ग्रुप एक बार फिर से  अपनी हिंसक गतिविधियां तेज ना कर दे. लेकिन सूत्रों की मानें तो सरकार ने सेना और दूसरे सुरक्षा-बलों को खापलांग ग्रुप के खिलाफ ऑपरेशन तेज करने का आदेश दिया है. सोमवार को जब ये समझौता हो रहा था तब सेना खापलांग ग्रुप के उग्रवादी को गिरफ्तार कर रही थी.

 

हालांकि सरकार ने इस समझौते को ऐतिहासिक करार दिया है और इससे देश में सबसे पुरानी हिंसक समस्या सुलझने के आसार दिखाई दे रहे हैं, लेकिन सरकार ने इस समझौते की शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया है.

 

प्रधानमंत्री ऑफिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि ” इससे पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में शांति स्‍थापित होगी और समृद्धि का मार्ग प्रशस्‍त होगा. इससे उनका जीवन सम्मानित होगा और नगाओं की बेजोड़ मेधाविता तथा उनकी संस्‍कृति और परंपराओ के आधार पर उन्हें समान अवसर और समानता आधारित आजीविका मिलेगी.”

 

एबीपी न्यूज को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ऐसा है करार…

 

1. एनएससीएन को ग्रेटर-नागालिम की मांग को छोड़ना होगा. नागा ग्रुप की मांग थी कि नागालैंड और मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, असम और म्यांमार के कुछ इलाकों को मिलाकर ग्रेटर-नागालिम बनाया जाए. ये इलाका नागा बहुल इलाका होगा और नागाओं की सरकार भी होगी.

 

2. एनएससीएन (आईएम) ग्रुप को अपने सभी हथियार और गोला-बारुद सरकार को सरेंडर करना होगा-हालांकि जब 1997 में एनएससीएन के साथ युद्धविराम संधि हुई थी, तब से ही एनएससीएन के सदस्यों पर पुलिस और दूसरे सुरक्षाबलों की नजर रहती है और कैंपो पर सुरक्षा-बलों की तैनाती रहती है. 

 

3. एनएससीएन के सदस्य किसी भी तरह से नागालैंड और दूसरे उत्तर-पूर्व के राज्यों में उगाही, अपहरण या स्थानीय लोगों को किसी भी तरह से प्रताड़ित नहीं करेंगे.

 

4. हिंसा त्यागने और अपने हथियार सरेंडर करने के एवज में एनएससीएन के सभी सदस्य मुख्य-धारा में शामिल हो जाएंगे. इसके लिए सरकार उनकी पुर्नवास योजना लेकर आएगी. साथ ही सभी सदस्यों को रोजगार भी दिया जायेगा. जरुरी हुआ तो उन्हे पुलिस या फिर अद्धसैनिक बलों में नौकरी दी जायेगी.

 

5. क्या सरकार एनएसीएन के सदस्यों को किसी तरह का राजनैतिक संरक्षण या आरक्षण देगी इस पर सस्पेंस बरकरार है. साथ ही किस तरह इस समझौते से सांस्कृतिक विस्तार होगा इसके बारे में भी अभी खुलासा होने बाकी है.

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