समलैंगिक संबंध बनाने पर सजा न हो लेकिन शादी पर लगे रोक: RSS

By: | Last Updated: Friday, 18 March 2016 11:45 AM
Homosexuality shouldn’t be considered a criminal offence: RSS

नई दिल्ली: समलैंगिकों के विवाद में आरएसएस के बड़े नेता दत्तात्रेय होसबोले के बयान पर विवाद हो गया है. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में दत्तात्रेय होसबोले ने इस बात की वकालत की कि समलैंगिक संबंध अपराध नहीं होना चाहिए. अब टिवटर पर उनकी ओर से सफाई आई है.

दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि समलैंगिक संबंध के लिए सजा नहीं होनी चाहिए क्योंकि समलैंगिकता समाज के लिए अनैतिक है. हालांकि, दत्तात्रेय ने समलैंगिक शादी का विरोध किया है.

आरएसएस नेता ने कहा कि समलैंगिकता को जुर्म की तरह नहीं देखना चाहिए और इसपर सजा नहीं होनी चाहिए.

समलैंगिक संबंध पर अपनी राय रखते हुए दत्तात्रेय होसबोले नेता ने कहा, “मैं नहीं समझता कि समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी में रख जाना चाहिए, क्योंकि ये दूसरे समाज की ज़िंदगियों पर कोई असर नहीं डालता.”

दत्तात्रेय का साफ कहना है कि तब तक समलैंगिक संबंध अपराध नहीं हैं, जब तक दूसरों के जीवन पर असर नहीं पड़ता हो. यौन संबंध निजी पसंद का विषय है.

होसबोले के बयान का बड़ा असर ये हो सकता है कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस पर सरकार का रुख बदल सकता है.

आपको बता दें कि आज के कानून के मुताबिक आईपीसी की धारा 377 के मुताबिक पुरुष का पुरुष से और महिला का महिला से सेक्स संबंध बनाना अपराध है. समलैंगिक संबंध बनाने पर 10 साल की सजा है.

कांग्रेस का हमला

दत्तात्रेय होसबोले के इस बयान के बाद कांग्रेस ने आरएसएस पर हमला बोल दिया है. कांग्रेस के नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि वो जानना चाहते हैं कि इस मुद्दे पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की क्या राय है. मोहन भागवत अपनी राय रखें.

दरअसल, साल 2009 में दिल्ली हाईकोर्ट ने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साल 2013 में अपने फैसले में पलट दिया था और इसे दोबारा अपराध की श्रेणी में डाल दिया. सुप्रीम कोर्ट इसका आदेश दे चुका है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सरकार ने भी विरोध नहीं किया है. हालांकि, समलैंगिक संबंधों के समर्थक लगातार इसे अपराध की श्रेणी से बाहर रखने की मांग कर रहे हैं.

पिछले साल समलैंगिक कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के साल 2013 के फैसले पर रिव्यू पीटिशन दाखिल किया. इस वक़्त पांच जजों की बेंच के पास ये केस लंबित है.

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