भूकंप से निपटने के लिए कितना तैयार है दिल्ली-एनसीआर?

By: | Last Updated: Monday, 27 April 2015 12:03 PM
how much ataintive delhi ncr for earthquake

नई दिल्ली: भूकंप से दिल्ली-एनसीआऱ में किसी नुकसान की खबर नहीं है. शायद वजह थी भूकंप के केंद्र का काफी दूर होना. कभी आपने सोचा है कि अगर भूकंप दिल्ली-एनसीआर में आया तो क्या होगा, कितना तैयार है दिल्ली-एनसीआर इस भूकंप से निपटने के लिए?

 

आज संसद में नेपाल में भूकंप का मुद्दा छाया रहा. आरजेडी नेता प्रेमचंद गुप्ता राज्यसभा में कहा कि दिल्ली-एनसीआर भूकंप से निपटने को तैयार नहीं है. उन्होंने कहा कि भूकंप से ताजमहल और कुतुबमीनार को भी नहीं बचा सकेंगे.

भूकंप से निपटने के लिए तैयार नहीं दिल्ली-एनसीआर- RJD

 

प्रेमचंद गुप्ता ने कहा कि अगर पहाड़ी इलाके की जगह भूकंप मैदानी इलाके में आया होता तो एनसीआर में ऐतिहासिक धरोहरें सुरक्षित नहीं बचती.  शनिवार  दोपहर आए भूकंप का केंद्र तो करीब 880 किलोमीटर दूर नेपाल में था लेकिन इससे दिल्ली-एनसीआर की घरती भी कांप उठी…

 

दिल्ली और एनसीआर में इन झटकों की तीव्रता घटकर पांच के आसपास रह गई थी, फिर भी करीब दो मिनट तक आए झटकों से दिल्ली और आसपास के इलाकों नोएडा, गाजियाबाद, फऱीदाबाद और गुड़गांव में घरों के पंखे जोर-जोर से हिलने लगे…लोग घरों से बाहर निकल आए. भूकंप से सबसे ज्यादा खौफ में दिखे दिल्ली-एनसीआर में ऊंची-ऊंची इमारतों में रहने वाले लोग .

 

दिल्ली और एनसीआर में इन झटकों की तीव्रता घटकर पांच के आसपास रह गई थी इसलिए कोई नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन अगर बड़ी तीव्रता का भूकंप दिल्ली या एनसीआर में आता है तो उससे निपटने के लिए देश का राजधानी क्षेत्र कितना तैयार है?

 

भूकंप से निपटने को तैयार है दिल्ली -एनसीआर?

 

दुनिया में भूकंप के लिहाज़ा से सबसे खतरनाक इलाकों को ‘सीस्मिक ज़ोन पांच’ में रखा जाता है. दिल्ली सीसमिक ज़ोन चार में आता है. यानि दिल्ली सिर्फ एक पायदान ही नीचे है. भूकंप के लिहाज़ से खतरनाक माने जाने वाले दिल्ली और आसपास के इलाके में अगर सात या आसपास की तीव्रता वाला भूकंप आया तो क्या होगा? ये सवाल ही खुद में कंपा देने वाला है. दिल्ली में जिस तरह की इमारतें बनी हैं, उसमें आधी से ज़्यादा इमारते भूकंप का बड़ा झटका नहीं झेल सकतीं.

 

भू वैज्ञानिक डॉ पार्थो चक्रवर्ती के मुताबिक, “दिल्ली- एनसीआर सीसमिक जोन 4 में आते हैं और ये जगह भूकंप के खतरे से बाहर नहीं है . डॉ पार्थो का कहना है कि इसी वजह से पहले दिल्ली में बहुमंजिली इमारतें नहीं बनती थीं लेकिन धीरे धीरे खतरे को नदरअंदाज कर बहुमंजिला इमारतें बनने लगीं और वो भी सारे नियम कायदों को ताक पर रखकर, इसी का नतीजा है कि आज समूचा दिल्ली –एनसीआर भूकंप के लिहाज से बहुत खतरनाक हो गया है.”

 

दिल्ली हिमालय की सबसे ज्यादा हलचल मचाने वाले हलचल के केंद्र से महज ढाई सौ किलोमीटर दूर है और अगर इसे रेंज में कोई बड़ी हलचल होती है तो दिल्ली में भी बड़ा नुकसान हो सकता है, इसका अंदाजा भुज में आए भूकंप से भी लगा सकते हैं.

भुज में 7.7 तीव्रता के भूकंप से करीब ढाई सौ किलोमीटर दूर अहमदाबाद में भी जबरदस्त तबाही हुई थी. जाहिर है अगर इस तरह का भूकंप दिल्ली में आया तो दिल्ली एनसीआर की तमाम इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह सकती हैं.

 

भू वैज्ञानिक डॉ. पंकज श्रीवास्तव मानते हैं कि दिल्ली एमसीआर में भूकंप का दोहरा खतरा है और अगर यहां कोई बड़ा भूंकप आता है तो यहां बहुत बड़ा नुकसान होगा . नेपाल में हुई तबाही के बाद दिल्ली के उप राज्यपाल ने आनन फानन में बैठक बुलाकर भूकंप के संभावित खतरे से निपटने के उपायों पर चर्चा की, गुड़गांव, फरीदाबाद भी ऊंची इमारतों से पट रहे हैं वहां भी खतरा कम नहीं है हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि ऊंची इमारतों में भूकंप से बचाने के लिए पहले से नियम बने हुए हैं, और अगर कुछ सुझाव होते हैं तो उनपर भी विचार किया जाएगा . लेकिन सवाल वही है कानून बना हुआ है और नया कानून भी बन जाएगा लेकिन इन्हें सख्ती से लागू कौन करवाएगा .

 

भू वैज्ञानिक डॉ पंकज श्रीवास्तव का कहना है कि भूकंप से बचाव के लिए पहले से घरों को बनाने की इंजीनियरिंग तय होनी चाहिए और उससे भी बड़ी बात कि ये लागू होनी चाहिए जो कि दिल्ली एनसीआर में हो नहीं रहा है .

 

दिल्ली में भी सबसे ज्यादा खतरा यमुना के किनारे बसे इलाकों में है, पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर, पटपड़गंज के अलावा अक्षरधाम मंदिर सबसे ज्यादा खतरे वाले इलाकों में हैं. 

 

जाहिर है कुदरत पर किसी का बस नहीं कोई ना तो भूकंप को रोक सकता है और ना ही उसकी पहले से भविष्यवाणी की जा सकती है…ऐसे में हमारे हाथ में इतना तो है कि सारी इमारतें भूकंप रोधी तकनीक से बनें जिससे जान माल का नुकसान कम से कम हो.

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