गीता के गांव में जश्न, परिवार के लिए सबसे बड़ी दिवाली

By: | Last Updated: Monday, 26 October 2015 2:50 AM
I am very happy, in the village it is just like Diwali : Janardhan Mahto,Geeta’s father

नई दिल्ली : जनार्दन की बूढ़ी आंखों में चमक आ गई है. कई सालों बाद उसका पूरा गांव दिवाली पर इतना खुश है. आसपास के गांवों से भी बधाइयों के संदेश आ रहे हैं. रिश्तेदारों की लाइन लगी हुई है. मौका भी खास है क्योंकि उनकी बेटी एक दशक से भी ज्यादा वक्त के बाद अपने घर आ रही है. इतने दिनों तक पाकिस्तान में फंसी बेटी की सूचना मिलने के बाद से ही वह परेशान थे.

 

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बेटी का स्वागत किस तरह करेंगे, इसे लेकर मन बेचैन जरूर है. लेकिन, जनार्दन महतो का कहना है कि पूरे गांव में जश्न का महौल है. वे अपनी जिंदगी की सबसे बेहतरीन दिवाली मनाने जा रहे हैं. जैसे-जैसे गीता के आने का वक्त करीब आ रहा है, उसके परिजन उसे देखने के लिए और बेकरार हो रहे हैं. आज ही गीता को लेकर एक दल दिल्ली पहुंचेगा.

 

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उल्लेखनीय है कि कई सालों से गीता को वापस लाने की मुहिम चल रही थी. लेकिन, उसे सफलता नहीं मिल रही थी. पिछले कुछ दिनों में गैर सरकारी संगठनों और कार्यकर्ताओं की ओर से इसका प्रयास तेज किया गया. मीडिया में भी यह मुद्दा दोनों देशों में सुर्खियों में आ गया. इसके बाद दोनों देशों की सरकारों ने गीता को लेकर सकारात्मक कदम उठाया.

 

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