सम्मान समारोह में मोदी और शरीफ को साथ बुलाना चाहती हैं नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई

By: | Last Updated: Saturday, 11 October 2014 2:43 AM
I asked Kailash Satyarthi to request PM Modi to attend Nobel Prize Award

नई दिल्ली: नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने बताया कि उन्होने भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी से  पीएम मोदी को  इस पुस्कार समारोह में शामिल होने के लिए निवेदन करने के लिए कहा है.

 

मलाला ने साथ ही बताया कि -‘ मैं यही निवेदन पाकिस्तान प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से भी करुंगी कि वह भी सम्मान समारोह में आएं.’

 

भारत में बाल मजदूरी के खिलाफ काम करने वाले मशहूर कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान के कट्टपंथियों के सामने लड़कियों की शिक्षा के अधिकार को लेकर उठ खड़ी होने वाली किशोरी मलाला यूसुफजई को संयुक्त रूप से वर्ष 2014 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है. नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने शुक्रवार को यह घोषणा की.

 

सत्यार्थी ने देश के उन हजारों लाखों गरीबों की लड़ाई लड़ते रहने का वादा किया जिन्हें अपने बच्चों को खतरनाक परिस्थितियों में काम पर भेजने के लिए मजबूर होना पड़ता है.

 

सत्यार्थी से पहले इस पुरस्कार से नवाजे गए भारतीय नागरिकों में रवींद्रनाथ टैगोर (1913 साहित्य), सी. वी. रमण (1930 भौतिकी), मदर टेरेसा (1979 शांति) और आमर्त्य सेन (1988 अर्थशास्त्र) शामिल हैं. इसके अलावा 2007 में इस पुरस्कार से नवाजी गई संस्था जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी समिति (आईपीसीसी) की तरफ से राजेंद्र के. पचौरी ने नोबेल पुरस्कार हासिल किया था. पचौरी ने संस्था के प्रमुख की हैसियत से पुरस्कार ग्रहण किया था.

 

सत्यार्थी बचपन बचाओ आंदोलन के प्रमुख हैं और वर्षो से बाल श्रम उन्मूलन के लिए न केवल प्रचार किया बल्कि फैक्ट्रियों और मिठाई की दुकानों पर पर छापामारी कर अवैध रूप से रखे गए और बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किए गए बाल श्रमिकों को मुक्त कराया.

 

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2012 में पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर इलाके में स्कूल से घर जाते समय तालिबान के बंदूकधारियों ने उसे गोली मार दी थी. हमले के बाद उसे विशेष चिकित्सा के लिए ब्रिटेन भेजा गया था.

 

भारत के मध्य प्रदेश के विदिशा में पैदा हुए सत्यार्थी ने 26 वर्ष की उम्र में विद्युत अभियंता की नौकरी छोड़ दी थी और बाल मजदूरी के खिलाफ संघर्ष में कूद पड़े थे.