ट्रेनी IAS अधिकारी रिजु की ये कहानी आपको झकझोर देगी

By: | Last Updated: Tuesday, 4 August 2015 3:39 PM
IAS

नई दिल्ली: ”मैं दुआ करती हूं कि देश में कोई बेटी पैदा ना हो”. एक महिला ट्रेनी IAS के इस दर्द भरे बयान ने देश को हिला कर रख दिया है. सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर रिजू बाफना का ये स्टेटस वायरल हो गया है. सवाल उठ रहे हैं जब एक IAS अधिकारी जैसी ताकतवर महिला इतनी परेशान हो सकती है तो बाकी महिलाओं का दर्द कौन सुनेगा?

ये तस्वीर है ट्रेनी IAS अधिकारी रिजु बाफना की है. ये तस्वीर हम दिखा रहे हैं क्योंकि रिजु बाफना ने बड़ी लड़ाई छेड़ी है. यौन उत्पीड़न के मामले में उन्होंने देश की महिलाओं का दर्द सामने रखा है. उन्होंने पूरे सिस्टम में महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता का मुद्दा गंभीरता से उठाया है.

IAS महिला भी सुरक्षित नहीं 

आखिर IAS जैसे शक्तिशाली पद पर बैठी रिजु बाफना को ऐसा क्यों कहना पड़ा. ये पूरी कहानी का खुलासा हुआ सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर रिजु बाफना के एक स्टेटस से.

 

“सेक्सुअल हरासमेंट का केस दर्ज कराने के दौरान न्याय व्यवस्था के साथ अपने अनुभव को मैसेज के तौर पर पोस्ट कर रही हूं. मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग मित्र संतोष चौबे पिछले हफ्ते मुझे अश्लील मैसेज भेज रहे थे. मैंने उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई. उन्हें कलेक्टर भरत यादव ने तत्काल पद से हटा दिया. “आज मैं ज्यूडिशल मजिस्ट्रेट के पास अपना बयान दर्ज कराने गई. वहां ललित शर्मा नाम के वकील बाकी लोगों के साथ मेरी बात सुन रहे थे. मैंने मजिस्ट्रेट से बाकी लोगों को बाहर करने को कहा क्योंकि मैं इतने लोगों के सामने बयान दर्ज कराने में असहज महसूस कर रही थी. मेरे कहने पर ललित शर्मा भड़क गए. कहने लगे कि हमें बाहर जाने के लिए कैसे कह सकती हो. मैं यहां वकील हूं, अधिकारी अपने दफ्तर में होंगी, ये कोर्ट है. मैंने कहा कि मैं गोपनियता IAS अधिकारी होने के नाते नहीं बल्कि एक महिला होने के नाते मांग रही हूं. बहस करने के बाद वो चले गए. देश में महिलाओं की ये हालत है. जब मैंने ज्यूडिशल मजिस्ट्रेट को कहा कि यौन उत्पीड़न मामले में बयान दर्ज कराते समय थोड़ा सावधानी बरतनी चाहिए तो उन्होंने मुझे कहा कि अभी तुम युवा हो इसलिए ऐसी मांग कर रही हो. हे भगवान! मैं यही दुआ कर सकती हूं कि कोई लड़की इस देश में पैदा ना हो. हर कदम पर बेवकूफ भरे पड़े हैं. लोग महिलाओँ की परेशानी के प्रति असंवेदनशील हैं. अगर आप इस देश में पैदा हुए हैं अपनी लड़ाई खुद लड़ने के लिए तैयार रहना होगा.”

 

ये स्टेटस एक अगस्त को फेसबुक पर डाला गया जिसके बाद लोगों ने इसे लाइक करना और शेयर करना शुरू कर दिया. देखते ही देखते ये पोस्ट तेजी से फैल गई. नतीजा ये हुआ कि सरकार भी बचाव की मुद्रा में आ गई. एमपी सरकार ने कहा है कि ये कोर्ट के अंदर का मामला है इसलिए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के संज्ञान में ये बात लाई जाएगी. वहीं वकील ललित शर्मा ने भी मामले में अपनी सफाई पेश की है.

 

इस मामले में रिजु बाफना को अश्लील SMS भेजने वाले मानवाधिकार आयोग के मित्र संतोष चौबे को अपने पद से हटा दिया गया है. हमने संतोष चौबे से बात करने की कोशिश की लेकिन अब तक उनसे संपंर्क नहीं हो पाया है.

 

रिजु बाफना ने अपने कुछ शब्द तो बदल लिए लेकिन उनकी लड़ाई अभी जारी है. ये लड़ाई सिर्फ आरोपी को जेल पहुंचाने की नहीं है बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है जहां यौन उत्पीड़न की पीड़ा से गुजर रही महिला तो न्याय के लिए और तकलीफें उठानी पड़ती हैं.

 

इस पूरी कहानी के सामने आने के बाद महिला अधिकारों से जुड़े लोग भी रिजु बाफना के साथ खड़े हो गए हैँ. वहीं रिजु बाफना ने भी सफाई दी है कि उनकी पोस्ट सिर्फ ऐसे मामलों में व्यवस्था को संवेदनशील बनाने के लिए है. 

 

रिजू बाफना साल 2013 में यूपीएसी सिविल सेवा परीक्षा में 77वें स्थान पर रही थीं. दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स से उन्होंने 2011 में मास्टर्स की डिग्री ली है. ग्रेजुएशन की डिग्री उन्होंने दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से ली. उनकी तैनाती पहले छत्तीसगढ़ में हुई थी कुछ वक्त पहले ही उनकी तैनाती मध्य प्रदेश के सीवनी में हुई थी.

 

जब ये पोस्ट रिजु बाफना ने फेसबुक पर डाली थी तो उन्हें एहसास भी नहीं होगा कि देश भर में उनके पक्ष में आवाजें उठने लगेंगी.  देश भर से आवाजें उठने के बाद रिजु बाफना को एहसास हुआ कि उनकी लड़ाई देश के साथ नहीं बल्कि कुछ व्यक्तियों और एक मानसिकता के खिलाफ है. यही वजह तीन अगस्त को अपनी पोस्ट में बदलाव करने पड़े.

 

मेरी पिछली पोस्ट में लड़कियों के इस देश में जन्म ना लेने की बात है. ये भावनाओं में बह कर लिखा गया था. मुझे खेद है कि कुछ लोगों के दोष के लिए मैंने देश को जिम्मेदार ठहराया. मैंने अपनी पिछली पोस्ट में बदलाव भी कर दिए हैं. पर इस पूरे मामले ने मुझे एहसास कराया है कि हमारी आपराधिक न्याय व्यवस्था यौन अपराधों के प्रति कितनी असंवेदनशील है. 

 

रिजू बाफना ने शब्दों में बदलाव भले ही कर लिए हों लेकिन उनका मतलब इस व्यवस्था में बदलाव का था.

 

युवा महिला के तौर पर कोर्ट के सामने मैंने पाया कि आखिर महिलाएं क्यों सामने आकर यौन उत्पीड़न के केस दर्ज नहीं करना चाहतीं. पूरा अनुभव बेहद भयावह था.

 

ये हैरानी की बात नहीं है कि महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ रहे हैं और महिलाएं यौन उत्पीड़न के मामले में चुप रह जाती हैं. मुझे अश्लील एसएमएस भेजने वाला पहले भी ऐसा करता रहा है. मेरी सहानुभूति उन महिलाओं के साथ है जो चुप रह जाती हैं क्योंकि आपराधिक न्याय व्यवस्था हमें ओपन कोर्ट के सामने सारी पीड़ा बताने को कहती हैं. ‘ऑफिसर ऑफ कोर्ट’ न्याय दिलाने की बजाए महिलाओं को उनकी जगह बताने में ज्यादा इच्छुक रहते हैं.

 

रिजु बाफना कैमरे का सामने नहीं आना चाहतीं. वहीं अश्लील मैसेज करने वाले संतोष चौबे ने आत्महत्या की धमकी देने वाला एक मैसेज कलेक्टर भरत यादव को भी कर दिया.

 

कलेक्टर ऑफिस के पीछे है जिला न्यायालय जहां अधिवक्ता संघ रिजु बाफना के खिलाफ शिकायत तैयार कर रहा है. इन सब के बाद रिजू बाफना ने 4 अगस्त की सुबह एक और पोस्ट की जिसमें उन्होंने फिर महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता की बात की.

 

मैं दोस्तों, सहयोगियों और देश भर के शुभचिन्तकों की तरफ से मिले सहयोग से अभिभूत हूं. मैं मीडिया का भी इस मुद्दे को उठाने के लिए धन्यवाद देती हूं.

 

… मैं फिर जोर देना चाहती हूं कि मेरी पोस्ट ऐसे मामलों में महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता के प्रति थी. रेप केस में अकेले में कार्यवाही चलाने का कानून है, पर इसे यौन उत्पीड़न के तमाम मामलों में भी लागू किया जाना चाहिए.

 

रिजु बाफना के मुद्दे ने एक बार फिर यौन उत्पीड़न के मामलों में सोचने पर मजबूर किया है. सवाल ये है कि ये पूरा मामला क्या पूरे सिस्टम में कोई बदलाव ला पाएगा?

 

इस पोस्ट को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

https://www.facebook.com/rijubafna?fref=ts

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