इबोला के इलाज का दावा करने वाली बेवसाइट से बाबा रामदेव का कोई संबंध नहीं: पतंजलि के प्रवक्ता

By: | Last Updated: Wednesday, 15 October 2014 6:13 AM
Ibola

नई दिल्ली: हाल ही में Ramdevmedicine.com में छपे एक विज्ञापन में यह दावा किया गया था कि उनके एक हेल्थ पैकेज के द्वारा इबोला का इलाज संभव है. इस विज्ञापन में कहा गया था कि उनके इस पैकेज से इबोला से बचा जा सकता है साथ ही इलाज भी संभव है. इस विज्ञापन और हेल्थ पैकेज दोनों पर पर बाबा रामदेव की तस्वीर छपी थी. 

 

बाबा रामदेव की तस्वीर होने की वजह से लोग इस भ्रम में थे कि रामदेव इस बीमारी का इलाज करने का दावा कर रहे हैं. लेकिन अब इस मामले पर पतंजलि योगपीठ के प्रवक्ता तिजारावाला ने  सफाई दी है.

 

तिजारावाला ने एबीपी न्यूज से कहा, “रामदेव मेडिसन डॉट कॉम में जो विज्ञापन छपा है, वो वेबसाइट हमारी नहीं है और हम इस खबर का खंडन करते है.”

 

बेवाइट के इस विज्ञापन में साफतौर पर यह लिखा गया था कि आयुर्वेद के माध्यम से इबोला की रोकथाम और उसका इलाज. इसके लिए रामदेव की छपी तस्वीर के साथ तीन हेल्थ पैकेज ऑफर किया गया था जो कि क्रमश: 65 डॉलर, 117 डॉलर और 165 डॉलर में खरीदे जा सकते थे.

 

हालांकि सोशल मीडिया पर उठे विवाद के बाद इस वेबसाइट ने इस विज्ञापन को हटा दिया है. बाबा रामदेव के प्रवक्ता ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए  कहा है कि उनका इससे कोई लेना देना नहीं है.

 

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय एक अधिकारी का कहना है कि अभी तक हमारे पास कोई प्रूफ नहीं है कि इबोला का इलाज संभव है. अगर ये लोग दावा करते हैं कि आयुर्वेदिक दवाएं आपके प्रतिरोधक (इम्यून) क्षमता बढ़ा सकती हैं इसका मतलब यह नहीं है कि इस दवा से इसका इलाज हो सकता है.

 

आपको बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इबोला का पहला मामला मार्च में सामने आया था. इबोला से अफ्रीकी महाद्वीप के देश सियरा लियोन, गिनी और लाइबेरिया बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. इस बीमारी का विषाणु संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ के संपर्क में आने से फैलता है.

 

डब्लूएचओ के सहायक महानिदेशक ब्रुस एलवर्ड के अनुसार इबोला से अब तक लगभग 4500 लोगों की मौत हो चुकी है.  डब्ल्यूएचओ की ताजा रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है पिछले दो महीने में हर हफ्ते औसतन 10,000 नए केस दर्ज हो रहे हैं.

 

भारत भी इससे निबटने के लिए कमर कस चुका है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बाहर के देशों से आने वाले यात्रियों की जांच में और तेजी लाने का फैसला किया है जिसके तहत हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर आने वाले यात्रियों की ट्रैवल हिस्ट्री का पता लगाने के साथ ही उनकी स्क्रीनिंग भी की जा रही है.

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