अमित शाह के लिए बिहार की हार जीत के क्या हैं मायने ?

By: | Last Updated: Thursday, 5 November 2015 3:50 PM

नई दिल्ली: बिहार की जनता के फैसले पर टिकी है कई दिग्गजों की किस्मत. यह दिग्गज वो नहीं जो चुनाव लड़ रहे थे बल्कि वो हैं जो चुनाव लड़वा रहे थे. जैसे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह. एक्जिट पोल के नतीजों के मुताबिक बिहार में मुकाबला कांटे का है यानी इस बात पर सस्पेंस बरकरार है कि क्या बिहार में अमित शाह का मास्टरप्लान अपना असर दिखाएगा या फिर उन्हें दिल्ली के बाद लगेगा लगातार दूसरा झटका.

 

बिहार में पांचों चरणों की वोटिंग खत्म होने के साथ जब बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से बिहार चुनाव पर सवाल पूछा गया तो उन्होने कहा, ”अभी कुछ नहीं बोलूंगा जो भी बोलूंगा आठ नवंबर को ही बोलूंगा.” अब सवाल यह है कि 8 नवंबर को अमित शाह क्या बोलेंगे. एबीपी न्यूज-नीलसन के एक्जिट पोल के आंकड़ों पर नजर डालें तो बिहार में लालू नीतीश के महागठबंधन के सामने बीजेपी को बड़ी हार का मुंह देखना पड़ सकता है. लेकिन बाकी चैनलों के 6 एक्जिट पोल का औसत निकाला जाए तो कुल 243 सीटों में से एनडीए को 117 सीटें जबकि लालू और नीतीश के महागठबंधन को 119 सीटें यानी मुकाबला कांटे का होगा.

 

न्यूज 24 चाणक्य के एग्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी पूरे बहुमत के साथ सरकार बनाएगी. अगर ऐसा होता है तो बीजेपी में अमित शाह का कद और ताकत और बढ़ जाएगा. उन्हें चुनौती देने वाला कोई नहीं होगा. इसके इतर अगर बीजेपी हारती है तो यह अमित शाह के लिए बड़ा झटका होगा. अमित शाह ने पिछले एक महीने से बिहार में डेरा डाल रखा है, वो रणनीति भी बना रहे थे, रैलियां भी कर रहे थे और विवादास्पद बयान भी दे रहे थे. उन्होंने बिहार में ही पाकिस्तान वाला बयान दिया था. अमित शाह ने कहा था कि अगर बिहार में बीजेपी हारती है तो पाकिस्तान में पटाखे फूटेंगे.

 

अमित शाह के इस बयान पर खासा विवाद हुआ. लालू ने उन पर सभी बिहारियों को पाकिस्तानी कहने का आरोप लगा दिया. अगर चुनाव के अंतिम नतीजे एनडीए के पक्ष में नहीं होते हैं तो इसके लिए अमित शाह के इस बयान को भी एक बड़ी वजह माना जाएगा. इससे पहले इसी साल दिल्ली के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार को अमित शाह के लिए एक बड़ा झटका माना गया था, अगर बिहार में भी यही होता है तो बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह पर बड़े सवाल उठेंगे लेकिन सवाल ये है कि क्या पार्टी में अमित शाह के कद पर इसका कोई फर्क पड़ेगा.

 

चार चरणों के चुनाव के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अमित शाह को लेकर एक बड़ा बयान दिया. इकोनॉमिक टाइम्स को दिए इंटरव्यू में राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी विधानसभा चुनाव से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को जोड़ने का कोई तर्क नहीं है. यहां तक कि जब मैं भी पार्टी का अध्यक्ष था, पार्टी विधानसभा चुनाव हारी और जीती लेकिन नतीजों पर मेरा मूल्यांकन नहीं किया गया. अमित पार्टी अध्यक्ष का अपना टर्म पूरा करेंगे और उन्हें नया टर्म मिलेगा. इससे पहले खुद अमित शाह ने दो चरणों के चुनाव के बाद ही यह कह दिया था.  किसी भी राज्य का विधानसभा चुनाव केंद्र सरकार के कामकाज पर जनमत संग्रह नहीं हो सकता.

 

अमित शाह और राजनाथ सिंह के इन बयानों का यही मतलब निकलता है कि अगर बीजेपी बिहार में हारती है तो न मोदी उसके लिए जिम्मेदार होंगे न अमित शाह के कद पर कोई फर्क पड़ेगा. लेकिन क्या वाकई ये हार अमित शाह के लिए दिल्ली के बाद दूसरा बड़ा झटका नहीं होगी.

 

अमित शाह को बीजेपी का चाणक्य कहा जाता है 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जबरदस्त जीत के बाद खुद नरेंद्र मोदी ने अमित शाह को मैन ऑफ द मैच कहा था. यूपी की 80 में से 71 सीटें जीतने का सेहरा अमित शाह के सिर बांधा गया. इसके बाद केंद्र में एनडीए की सरकार बनते ही पार्टी की कमान अमित शाह को सौंप दी गई.  लेकिन दिल्ली के विधानसभा चुनाव में अमित शाह की रणनीति ऐसी फेल हुई कि बीजेपी को 70 में से सिर्फ 3 सीटें मिलीं. अब बिहार के नतीजे भी अगर बीजेपी के खिलाफ होते हैं तो सवाल यह है कि क्या अगले साल बंगाल और उसके बाद यूपी के विधानसभा चुनाव में भी अमित शाह ही बीजेपी के चाणक्य बने रहेंगे या मोदी उनका विकल्प तलाशेंगे.

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Web Title: importance of bihar poll result for amit shah
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