IN DEPTH: वो कौन से हालात थे जिनकी वजह से रोहित वेमुला ने खुदकुशी की?

By: | Last Updated: Tuesday, 19 January 2016 5:47 PM
IN DEPTH STORY OF ROHITH VEMULA SUICIDE

नई दिल्ली: पीएचडी छात्र रोहित वेमुला हैदराबाद विश्वविद्यालय के आंबेडकर छात्र संगठन से जुड़ा हुआ था. अगस्त के महीने में इस संगठन ने 1993 ब्लास्ट के आरोपी याकूब मेमन को फांसी दिए जाने का विरोध किया. जिस पर बीजेपी से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी ने आपत्ति जताई. इसी दौरान एबीवीपी ने विश्वविद्यालय में मुजफ्फरनगर दंगो से जुड़ी फिल्म दिखाए जाने का विरोध किया.

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जिस पर आंबेडकर छात्र संघ ने एबीवीपी के खिलाफ कैंपस में प्रदर्शन किया. इसके जवाब में एबीवीपी के अध्यक्ष सुशील कुमार ने 3 अगस्त 2015 को फेसबुक पर एक कमेंट में आंबेडकर छात्र संगठन के लोगों को गुंडा कहा. इससे गुस्साए आंबेडकर छात्र संगठन के लोगों ने सुशील कुमार पर माफी मांगने का दबाव डाला.

आंबेडकर छात्र संगठन के मुताबिक एबीवीपी अध्यक्ष सुशील कुमार ने माफी मांग ली और बात खत्म हो गई लेकिन सुशील कुमार ने आरोप लगाया कि आंबेडकर छात्र संगठन के छात्रों ने उसके कमरे में आकर उसकी पिटाई की. जिन छात्रों पर पिटाई का आरोप लगा उनमें रोहित समेत वो पांचों छात्र थे जिन्हें बाद में सस्पेंड किया गया. एबीवीपी ने कथित पिटाई के खिलाफ पुलिस में शिकायत की.

वहीं आरोपों की जांच के लिए 5 अगस्त को चीफ प्रॉक्टर की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बनाई गई. इस कमेटी को अपनी जांच में पिटाई के कोई पुख्ता सबूत तो नहीं मिले लेकिन एबीवीपी अध्यक्ष सुशील कुमार की शिकायत के आधार पर रोहित समेत आंबेंडकर छात्र संगठन के 5 छात्रों को दोषी माना गया. लेकिन आंबेडकर छात्र संगठन के विरोध के बाद छात्रों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और दूसरी जांच कमेटी बनाई गई.

इसी बीच एबीवीपी ने सिकंदराबाद से सांसद और केंद्रीय मंत्री बंडारू द्त्तात्रेय से मामले में दखल देने की अपील की. जिसके जवाब में दत्तात्रेय ने 17 अगस्त को मानव संसाधन मंत्रालय से इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन पर कार्रवाई करने का दबाव बनाने के लिए कहा. उस चिट्ठी में दत्तात्रेय ने हैदराबाद विश्वविद्यालय को जातिवादी, चरमपंथी और राष्ट्रविरोधी राजनीति का गढ़ कहा.

दत्तात्रेय की चिट्टी के बाद से मानवसंसाधन मंत्रालय की तरफ से विश्वविद्यालय को इस मामले में कार्रवाई के लिए 4 चिट्ठियां लिखी गईं. एबीपी न्यूज के पास ये चारों चिट्ठियां मौजूद हैं. 24 सितंबर को लिखी पहली चिट्ठी में सब्जेक्ट के तौर एबीवीपी अध्यक्ष सुशील कुमार पर हमले की बात लिखी गई है, इसके बाद से 6 अक्टूबर, 20 अक्टूबर और 19 नवंबर को लिखी चिट्ठियों में लगातार विश्वविद्यालय से इस मामले में कार्रवाई के बारे में पूछा गया.

माना जा रहा है कि इसके बाद ही विश्वविद्यालय प्रशासन एक बार फिर हरकत में आया और पुरानी जांच के आधार पर 17 दिसंबर को रोहित समेत पांचो छात्रों को निलंबित करने का फरमान जारी कर दिया गया. इस समय तक विश्वविद्यालय के उपकुलपति बदल चुके थे. आंबेडकर छात्र संगठन ने पांचो छात्रों के निलंबन के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की.

7 जनवरी को विश्वविद्यालय ने ये साफ किया कि छात्रों के निलंबन का मतलब सिर्फ ये है कि वो छात्रावास में नहीं रह सकते और किसी राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं हो सकते. उनके पढ़ाई जारी रखने पर कोई रोक नहीं थी.

आंबेडकर छात्र संगठन के मुताबिक रोहित और उसके 4 साथियों पर एबीवीपी अध्यक्ष सुशील कुमार की पिटाई का आरोप गलत है. इसीलिए निलंबन की कार्रवाई के विरोध में पांचो छात्र धरने पर बैठे थे. जिस दिन रोहित ने आत्महत्या की, उस दिन भी आंबेडकर छात्र संगठन के छात्र आगे की रणनीति पर चर्चा कर रहे थे लेकिन रोहित अचानक बीच में उठकर चला गया जिसके बाद उसका शव एक पंखे से लटका हुआ पाया गया.

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Web Title: IN DEPTH STORY OF ROHITH VEMULA SUICIDE
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