भारत को चीन बनने की जरूरत नहीं: मोदी

By: | Last Updated: Sunday, 21 September 2014 4:55 PM

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के पास अपने अतीत के गौरव को पाने का अवसर है और उनके पास देश के लोगों की क्षमता को दिशा देने की एक स्पष्ट योजना है. भारत को चीन बनने की जरूरत नहीं है, बल्कि भारत को भारत ही बनना चाहिए.

 

 सीएनएन के फरीद जकारिया को दिए विशेष साक्षात्कार में मोदी ने कहा कि वर्तमान युग एशिया का है और भारत और चीन तेजी से विकास कर रहे हैं और वे वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान कर रहे हैं. यह साक्षात्कार रविवार को प्रसारित किया गया.

 

जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत अपने पड़ोसी की तरह जीडीपी हासिल कर सकता है, इसके जवाब में मोदी ने कहा, “अगर आप 5-10 सदियों का विवरण देखें तो पाएंगे कि भारत और चीन समान गति से विकास कर रहे थे. वैश्विक जीडीपी में उनका योगदान समान रूप से बढ़ रहा था और समान रूप से गिर रहा था. भारत और चीन दोनों तेजी से विकास कर रहे हैं.” मोदी ने कहा कि उन्हें भारतीयों की क्षमता पर अटूट विश्वास है.

 

सीएनएन-आईबीएन नेटवर्क के अनुसार मोदी ने कहा, “मेरा अटूट विश्वास है कि भारतीयों में असीमित प्रतिभा है. हमारी क्षमताओं को लेकर मेरे मन में जरा भी संदेह नहीं है. हमारे 1.25 अरब लोगों में उद्यमी क्षमता को लेकर मुझे पूरा भरोसा है. और मेरे पास इसे दिशा देने का एक स्पष्ट खाका है.”

 

उन्होंने कहा, “भारत को कुछ और बनने की जरूरत नहीं है. भारत को केवल भारत बनना है. इस देश को एक समय सोने की चिड़िया कहा जाता था. हम वहां से नीचे गिरे हैं और अब हमारे पास अवसर है कि फिर से विकास कर सकें.”

 

मोदी ने कहा, “भारत की मिट्टी अलग प्रकार की है. सवा सौ करोड़ का देश है. हर छोटी मोटी चीजों से चिंतित होकर देश नहीं चलता है. लेकिन समस्याओं की तरफ हम आंख बंद करके भी नहीं रह सकते हैं. हम अट्ठारहवीं शताब्दी में नहीं रह रहे हैं. सहभागिता का युग है यह. और हर किसी को हर किसी की मदद लेनी पड़ेगी और हर किसी को हर किसी की मदद करनी पड़ेगी.”

 

उन्होंने कहा, “चीन भी एक बहुत पुरातन सांस्कृतिक विरासत वाला देश है. और जिस प्रकार से चीन में आर्थिक विकास की ओर ध्यान गया है, तो वो भी विश्व से अलग होना पसंद करेगा, ऐसा मैं नहीं मानता हूं. हम भी चीन की समझदारी में भरोसा करें, विश्वास करें, कि वह वैश्विक कानूनों को स्वीकार करेगा, और सबके साथ मिलजुलकर आगे बढ़ने में वह अपनी भूमिका निभाएगा.”

 

यह पूछे जाने पर कि क्या आप नहीं चाहेंगे कि चीन सरकार की शक्ति जैसी अथॉरिटी आपके पास हो? इस पर मोदी ने कहा, “देखिए, मैंने तो लोकतंत्र की ताकत देखी है. अगर लोकतंत्र न होता, तो मोदी जैसा एक गरीब परिवार में पैदा हुआ बच्चा यहां कैसे बैठता? ये ताकत लोकतंत्र की है.”

 

अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक गठबंधन विकसित कर पाना संभव है? इस मोदी ने कहा, “बिल्कुल. भारत और अमेरिका के बीच में कई समानताएं हैं, अब पिछली कुछ सदियों की ओर देखेंगे, दो चीजें ध्यान में आएंगी, दुनिया के हर किसी को अमेरिका ने अपने में समाया है. और हर भारतीय ने दुनिया में हर इलाके में अपने आप को बसाया है. यह एक बहुत टिपिकल नेचर है, दोनों समाजों की. प्राकृतिक रूप से सहअस्तित्व के स्वभाव के ये दोनों देश हैं. ऐतेहासिक रूप से, सांस्कृतिक विरासत के रूप में इन दोनों देशों की कई साम्यताएं हैं, वो हमें जोड़कर रखती हैं. और मुझे लगता है, कि और आगे गहरे होंगे.”

 

महिला हिंसा पर मोदी ने कहा, “महिला का सम्मान, यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है और इसमें कोई समझौता नहीं चाहिए. पारिवारिक संस्कृति को भी हमें एक बार फिर से पुनर्जीवित करना पड़ेगा, जिसमें नारी का सम्मान हो, नारी को समानता मिले, उसका गौरव बढ़े.”

 

आतंकवाद और भारतीय मुसलमानों पर एक सवाल के जवाब में मोदी ने कहा, “भारत का मुसलमान हिंदुस्तान के लिए जिएगा. हिंदुस्तान के लिए मरेगा. हिंदुस्तान का बुरा हो, ऐसा कुछ भी वह नहीं चाहेगा.”

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