पहली ही कोशिश में मंगल पर पहुंचा भारत, रूस, अमेरिका सब पीछे छूटे

By: | Last Updated: Wednesday, 24 September 2014 12:54 AM
India creates history, Mangalyaan enters Martian orbit

नई दिल्ली:  यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक लम्हा है. आज मंगलयान को इसरो के वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक मंगल पर स्थापित कर दिया. भारत पहली  बार ये मुकाम हासिल करने वाला पहला देश बन गया है. भारत ने लिक्विड मोटर इंजन की तकनीक से मंगलयान को मंगल की कक्षा में स्थापित किया. आमतौर पर चांद तक पहुंचने के लिए इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन इतने लंबे मिशन पर भारत से पहले किसी ने लिक्विड मोटर इंजन का इस्तेमाल नहीं किया था.

 

एक ओर मंगल मिशन इतिहास के पन्नों पर स्वयं को सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा रहा था वहीं दूसरी ओर यहां स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के कमांड केंद्र में अंतिम पल बेहद व्याकुलता भरे थे. अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के साथ मंगल मिशन की सफलता के साक्षी बने मोदी ने कहा, “विषमताएं हमारे साथ रहीं और मंगल के 51 मिशनों में से 21 मिशन ही सफल हुए हैं, लेकिन हम सफल रहे.” खुशी से फूले नहीं समा रहे प्रधानमंत्री ने इसरो के अध्यक्ष के राधाकृष्णन की पीठ थपथपाई और अंतरिक्ष की यह अहम उपलब्धि हासिल कर इतिहास रचने के लिए भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को बधाई दी.

 

कब क्या हुआ-

सुबह 7 बज कर 17 मिनट पर 440 न्यूटन लिक्विड एपोजी मोटर (एलएएम), यान को मंगल की कक्षा में प्रविष्ट कराने वाले थ्रस्टर्स के साथ तेजी से सक्रिय हुयी ताकि मंगल ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) यान की गति इतनी धीमी हो जाए कि लाल ग्रह उसे खींच ले.  मंगल यान को लाल ग्रह की कक्षा खींच सके, इसके लिए यान की गति 22.1 किमी प्रति सेकंड से घटा कर 4.4 किमी प्रति सेकंड की गई और फिर यान में डाले गए कमांड द्वारा ‘मार्स ऑर्बिटर इन्सर्शन’ (मंगल परिक्रमा प्रवेश) की प्रक्रिया संपन्न हुई. यह यान सोमवार को मंगल के बेहद करीब पहुंच गया था.

 

जिस समय एमओएम कक्षा में प्रविष्ट हुआ, पृथ्वी तक इसके संकेतों को पहुंचने में करीब 12 मिनट 28 सेकंड का समय लगा. ये संकेत नासा के कैनबरा और गोल्डस्टोन स्थित डीप स्पेस नेटवर्क स्टेशनों ने ग्रहण किये और आंकड़े वास्तविक समय (रीयल टाइम) पर यहां इसरो स्टेशन भेजे गए. अंतिम पलों में सफलता का पहला संकेत तब मिला जब इसरो ने घोषणा की कि भारतीय मंगल ऑर्बिटर के इंजनों के प्रज्ज्वलन की पुष्टि हो गई है.

 

इतिहास रचे जाने का संकेत देते हुए इसरो ने कहा, ‘मंगल ऑर्बिटर के सभी इंजन शक्तिशाली हो रहे हैं. प्रज्ज्वलन की पुष्टि हो गई है.’ मुख्य इंजन का प्रज्ज्वलित होना महत्वपूर्ण था क्योंकि यह करीब 300 दिन से निष्क्रिय था और सोमवार को मात्र 4 सेकेंड के लिए सक्रिय हुआ था.

 

यह पूरी तरह ‘इस पार या उस पार’ वाली स्थिति थी क्योंकि तमाम कौशल के बावजूद एक मामूली सी भूल ऑर्बिटर को अंतरिक्ष की गहराइयों में धकेल सकती थी. यान की पूरी कौशल युक्त प्रक्रिया मंगल के पीछे हुई जैसा कि पृथ्वी से देखा गया. इसका मतलब यह था कि ‘मार्स ऑर्बिटर इन्सर्शन’ (एमओई) प्रज्ज्वलन में लगे 4 मिनट के समय से लेकर प्रक्रिया के निर्धारित समय पर समापन के तीन मिनट बाद तक पृथ्वी पर मौजूद वैज्ञानिक दल यान की प्रगति नहीं देख पाए.

 

ऑर्बिटर अपने उपकरणों के साथ कम से कम 6 माह तक दीर्घ वृत्ताकार पथ पर घूमता रहेगा और उपकरण एकत्र आंकड़े पृथ्वी पर भेजते रहेंगे.

 

इस अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण 5 नवंबर 2013 को आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से स्वदेश निर्मित पीएसएलवी रॉकेट से किया गया था. यह 1 दिसंबर 2013 को पृथ्वी के गुरूत्वाकषर्ण से बाहर निकल गया था. नासा का मंगल यान मावेन 22 सितंबर को मंगल की कक्षा में प्रविष्ट हुआ था. भारत के एमओएम की कुल लागत मावेन की लागत का मात्र दसवां हिस्सा है.

 

मंगल अभियान की सफलता ऐतिहासिक: नरेन्द्र मोदी

इस यादगार दिन के गवाह देश के प्रधानमंत्री मोदी बने. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाने के लिए इसरो सेंटर में मौजूद हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों और इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दिया.

 

इस मौके पर मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों और देशवासियों को बधाई दी. पीएम ने कहा, “हमारे वैज्ञानिकों ने इसे इतने कम बजट में कर दिखाया है कि जो कई हॉलिवुड फिल्मों के बजट से भी कम है. किसी भी देश को अपने पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली, भारत एकमात्र देश है जो अपने पहले ही प्रयास में सफल रहा.”

 

मोदी ने कहा कि मैंने वैज्ञानिकों से कहा था कि वे असफलता की चिंता न करें, अगर हम असफल होते तो यह मेरी जिम्मेदारी होती. मोदी ने यहां एक कविता भी सुनाई- “विफल होते हैं तो आलोचना के शिकार होते हैं, सफल होते हैं तो ईष्या के शिकार होते हैं.”

 

यहां क्लिक करके सुनें पीएम मोदी का स्पीच-