'सिख-विरोधी दंगों के आरोपियों को दंडित करने में भारत विफल'

By: | Last Updated: Wednesday, 29 October 2014 3:19 PM

नई दिल्ली: भारत 1984 के सिख-विरोधी दंगों के लिए जिम्मेदार रहे लोगों को दंडित करने में विफल रहा है और यह सांप्रदायिक हिंसा से निपटने के मामले में देश के कमजोर प्रयास को दर्शाता है. एक अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार समूह ने बुधवार को यह बात कही.

 

ह्यूमन राइट्स वाच (एचआरडब्ल्यू) ने एक बयान में कहा, “भारत सरकार 1984 के सिख विरोधी दंगों और हिंसक वारदातों के लिए जिम्मेदार लोगों को कानून के कटघरे में खड़ा करने में लगातार विफल रही है, जो सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में भारत के कमजोर प्रयासों को दर्शाता है.”

 

संस्था ने कहा है कि नई सरकार को पुलिस सुधार और सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ कानून लाने चाहिए, जिससे लोक सेवक इस तरह की घटनाओं में मिलीभगत और कर्तव्य की उपेक्षा के लिए उत्तरदायी ठहराए जाएं.

 

एचआरडब्ल्यू की दक्षिण एशियाई निदेशक मीनाक्षी गांगुली ने कहा, “1984 के दंगों के जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाने में भारत की विफलता न सिर्फ सिखों के साथ अन्याय है, बल्कि इससे भारत में सांप्रदायिक हिंसा का खतरा और बढ़ा है.”

 

उन्होंने कहा कि प्रशासन और सरकार ने जिम्मेदार लोगों को बचाने के लिए बार-बार जांच में रोक टोक की और बाधा पहुंचाई, जिसके कारण इससे भारत की न्याय प्रणाली पर से लोगों का भरोसा उठ गया है.

 

गांगुली ने कहा, “त्रासदीपूर्ण सिख विरोधी दंगों के लगभग 30 सालों बाद भी भारत में गाहे बगाहे सांप्रदायिक दंगे होते हैं और उत्तरदायित्व का प्रश्न बार बार उठता है.”

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Web Title: India failed to punish Anti-Sikh riots accused
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