दुनिया के सबसे बड़े खतरे पर हमले को तैयार भारत !

India ready for operation against ISIS if UN adopts resolution: Parrikar

फ़ाइल फ़ोटो: भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर

नई दिल्ली :  भारत भी दुनिया के लिए खतरा बन रहे सबसे बड़े (और खूंखार) आतंकी संगठन, आईएसआईएस पर हमले करने के लिए तैयार है ? ये सवाल इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने आज इस बात के संकेत दे दिए हैं. 1971 युद्ध के विजय-दिवस के उपलक्ष्य में अमर जवान ज्योति पर श्रृद्धांजलि अर्पित करने के बाद तीनों सेनाओं के प्रमुखों की मौजूदगी में रक्षा मंत्री ने ऐलान किया. उन्होंने कहा कि अगर संयुक्त-राष्ट्र आईएस के खिलाफ प्रस्ताव पारित करती है तो भारत संयुक्त राष्ट्र के झंडे तले लड़ने के लिए तैयार है.

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का ये बयान ऐसे वक्त में आया है जब एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीनों सेनाओं के संयुक्त कमांडर्स कांफ्रेंस में अपनी रक्षा-नीति का साफ कर दिया था. पहली बार राजधानी दिल्ली से बाहर अरब सागर में विमान-वाहक युद्धपोत, आईएनएस विक्रमादित्य पर हुए इस रक्षा-सम्मेलन में पीएम ने कहा कि सेनाओं को इस बात का ध्यान रखना होगा कि उनकी जिम्मेदारी महज सरहद या फिर देश के तटों तक सीमित नहीं है. दुनिया के किसी भी कोने में अगर हमारे हित या नागरिक खतरें में होंगे तो उन्हे सुरक्षा प्रदान करनी है.

पीएम ने जो बात इशारों में कही थी, रक्षा मंत्री ने उसे लगभग साफ कर दिया है कि जरुरत पड़ने पर भारतीय फौज भी रुस और अमेरिकी सेना की तरह कहीं भी और किसी पर भी हमला कर सकती हैं. ना केवल हमला कर सकती है बल्कि नेस्तानबूत भी कर सकती है. यहां ये बात विदित है कि अमेरिकी सेना के नेतृत्व में नाटो-फोर्सज़ सीरिया और ईराक में आईएसआईस के खिलाफ बिगुल बजाए हुए है. पेरिस में आईएस के हमले के बाद से तो इन हमलों में और तेजी आ गई है. फ्रांस ने भी आईएस के ठिकानों पर हवाई हमले करने शुरु कर दिए हैं. ठीक इसी तरह रुसी सेना भी आईएस के मुखिया (स्वयंभू कलीफा) अल-बगदादी को मारने के लिए लगातार हवाई हमले कर रही है.

ठीक इसी तरह रुसी सेना भी आईएस के मुखिया (स्वयंभू कलीफा) अल-बगदादी को मारने के लिए लगातार हवाई हमले कर रही है. रुस की पनडुब्बी इस युद्ध में शामिल हो गई है. लेकिन अगर भारत के रक्षा मंत्री आईएस के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने का इशारा करते हैं तो हर किसी के कान खड़े हो जाते हैं. दरअसल, अभी तक राजनैतिक कारणों के चलते पश्चिम-एशिया, मिडिल-ईस्ट और खाड़ी देशों के मुद्दो (या संघर्ष और लड़ाई) में भारत तटस्थ भूमिका निभाता आया है.

साथ ही ना तो हमारे देश के लोग और ना ही सेना और राजनैतिक-नेतृत्व श्रीलंका में एलटीटीई (लिट्टे) के खिलाफ शांति सेना की कारवाई को नहीं भूल पाए हैं. जहां भारतीय सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा और वापस बुला लिया गया था. लेकिन मोदी सरकार पिछली सरकारों से अलग है. मोदी सरकार पिछली सरकारों से कैसे अलग है वो जून के महीने में म्यामांर-सीमा पर भारतीय सेना के स्पेशल फोर्स के कमांडो ऑपरेशन ने करके दिखा दिया है.

जब सेना के काफिले पर हमले के आरोपी आतंकी संगठन के कैंप को तहस-नहस कर दिया गया और 20 उग्रवादियों को ढ़ेर कर दिया गया. वैसे भी संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में भारत के सैनिकों का सबसे बड़ा योगदान रहता है. इसके यूएन मिशन में काम करने के चलते भारतीय सेनाओं को मिडिल-ईस्ट और अफ्रीकी देशों में शातिं बहाल करने का लंबा अनुभव है. यही वजह है कि रक्षा मंत्री के बयान को ज्यादा आश्चर्य से देखने की जरुरत नहीं है.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: India ready for operation against ISIS if UN adopts resolution: Parrikar
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: Army attack isis Manohar Parrikar terrorism UN
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017