सेना के पास नहीं है युद्ध लड़ने के लिए जरूरी गोला और बारूद

By: | Last Updated: Friday, 8 May 2015 2:21 PM

नई दिल्ली: सेना के पास युद्ध लड़ने के लिए जरूरी गोला-बारूद नहीं है. केवल इतना ही नहीं सेना का वॉर-रिर्जव भी सिर्फ 50 प्रतिशत है. जी हां! यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि ये कहना है सीएजी रिपोर्ट का जिसे शुक्रवार को संसद में पेश किया गया.

 

सीएजी के मुताबिक, थलसेना को युद्ध की परिस्थिति में करीब 40 दिनों के वॉर-रिर्जव की जरूरत है. लेकिन सेना के पास सिर्फ 20 दिनों का ही गोला-बारूद है. सीएजी के मुताबिक, इस कमी के चलते सेना की ऑपेरशनल तैयारियों और ट्रैनिग पर खासा असर पड़ रहा है.

 

सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) की कार्यशैली पर उठाए सवाल. रक्षा मंत्रालय ही सेना के लिए पर्याप्त गोला-बारूद के लिए जिम्मेदार है जबकि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड इस गोला-बारुद का स्रोत केन्द्र है और सेना को सप्लाई करने के लिए जिम्मेदार होता है.

 

सीएजी के मुताबिक, करीब सात हजार करोड़ रूपये का गोला बारूद खराब गुणवत्ता या किन्ही दूसरे कारणों से बेकार पड़ा है. सीएजी के मुताबिक, ओएफबी द्वारा गोला-बारूद की आपूर्ति ना कर पाने के चलते, रक्षा मंत्रालय ने सेना के लिए गोला-बारूद आयात करने का प्लान बनाया था. लेकिन उसकी प्रक्रिया भी बेहद धीमी साबित हुई और सेना को मात्र 20 प्रतिशत की ही प्राप्ति हुई.

 

सीएजी की ये रिपोर्ट 2009 से 2013 के बीच किए गए ऑडिट के आधार पर तैयार की गई है. लेकिन खास बात ये है कि 2011-13 में रक्षा सचिव के पद पर तैनात रहे शशिकांत शर्मा ही इनदिनों सीएजी हैं.

 

गौरतलब है कि, मौजूदा विदेश राज्यमंत्री वी के सिंह जब थलसेना प्रमुख थे तो उन्होनें भी सेना के तोपखाने में गोला बारूद की कमी का मुद्दा उठाया था. इस मामने पर उनके द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखी गई चिठ्ठी के लीक होने से उस वक्त काफी बवाल खड़ा हो गया था.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: INDIAN ARMY
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: Army CAG fight Indian report
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017