म्यांमार में घुस दुश्मनों को मारने वाले कमांडोज को पैराशूट की कमी: CAG

Indian Army  para commandos have less parachute : CAG

नई दिल्ली : क्या आप यकीन कर सकते हैं कि देश की एलीट पैरा कमांडो फोर्स पैराशूट की कमी से जूझ रही है ! लेकिन, यह सच है और ये खुलासा हुआ है सीएजी की रिपोर्ट से. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि सेना की स्पेशल फोर्स (पैरा) कमांडो यूनिट के पास पर्याप्त पैराशूट तक नहीं है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले 10 सालों से कमांडो यूनिट इस कमी से जूझ रही है.

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सीएजी ने इस कमी के लिए रक्षा मंत्रालय को भी आड़े हाथों लिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कमी के बारे में सीएजी ने जब रक्षा मंत्रालय से सवाल पूछा तो कोई जवाब तक नहीं आया. आप को बताते चलें कि स्पेशल फोर्स के कमांडो बेहद मुश्किल हालात में अपने ऑपरेशन्स को अंजाम देते हैं. हाल ही म्यांमार सीमा पर जिन उग्रवादी कैंपों को नष्ट किया गया था उसे स्पेशल फोर्स ने अंजाम दिया था.

ये कमांडो अमूमन अपने ऑपरेशन के लिए बेहद ही खुफिया तरीके अपनाते हैं. इसके लिए मौके तक पहुंचने के लिए कमांडोज़ हेलीकॉप्टर या फिर हवाई जहाज का सहारा लेते हैं. फिर पैराशूट से दुश्मन के जमीन पर उतरकर त्वरित कारवाई करते हैं. इसीलिए स्पेशल-फोर्स के कमांडोज़ को ‘पैरा-कमांडो’ भी कहा जाता है और उनकी कारवाई को ‘सर्जिकल-स्ट्राईक’. लेकिन पैरा-कमांडोज़ ही पैराशूट की कमी से जूझ रहे हैं.

अपनी रिपोर्ट में सीएजी ने कहा कि 2001 में सेना को विशेष प्रकार के करीब 1031 पैराशूट (कॉम्बेट फ्री फॉल) की जरुरत थी. इनमें से 410 पैराशूट तो अमेरिका से खरीद लिए गए. लेकिन बाकी के लिए सरकारी कंपनी, कानपुर स्थित ऑर्डिनेंस पैराशूट बोर्ड को सप्लाई ऑर्डर दिया गया.

2010 में ऑर्डिनेस बोर्ड ने जब पैराशूट सप्लाई किए तो उनमें बेहद खामिंया पाई गईं. ऐसे खामिंयां कि अगर इन पैराशूट को इस्तेमाल किया जाता तो जान को भी खतरा हो सकता था. सीएजी के मुताबिक, पैरा-कमांडोज़ को 400 अतिरिक्त पैराशूट 2008 में मिल पाए जब वायुसेना ने अमेरिका से सी-130जे सुपर हरक्युलिस विमान खरीदे.

ये खास पैराशूट इन विमानों के साथ वायुसेना को मिले थे, और वायुसेना ने स्पेशल फोर्स को दे दिए. यानि अभी भी स्पेशल फोर्स बटालियन 200 से ज्यादा पैराशूट की कमी से ग्रस्त है.  इसके अलावा सीएजी ने सेना की एवियशन कोर में हेलीकॉप्टर की कमी को भी उजागर किया है. सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक सेना के हवाई बेड़े में 32 प्रतिशत की कमी है.

जबकि 50 प्रतिशत हेलीकॉप्टर बेहद पुराने हो चुके हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना बीएमपी टैंकों की कमी से भी जूझ रही है. सेना की मैकिनाईज़ड इंफ्रेंटी में 47 प्रतिशत बीएमपी टैंकों की कमी है. सीएजी ने वायुसेना को भी अपनी रिपोर्ट में आड़े लेते हुए कहा है कि अमेरिका से 5 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के एयर टू एयर रिफ्यूलर एयरक्राफ्ट तो खरीद लिए गए लेकिन पर्याप्त ट्रैनिंग ना होने के कारण इनका ठीक से इस्तेमाल नहीं किया जा सका.

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Web Title: Indian Army para commandos have less parachute : CAG
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