व्यक्ति विशेष: गुवाहाटी की ‘माया मेमसाब’ की बेहिसाब तरक्की और बेशुमार दौलत की अनसुनी कहानी!

By: | Last Updated: Saturday, 29 August 2015 4:11 PM
व्यक्ति विशेष: गुवाहाटी की ‘माया मेमसाब’ की बेहिसाब तरक्की और बेशुमार दौलत की अनसुनी कहानी!

कितने अजीब रिश्ते हैं यहां पे, दो पल मिलते हैं साथ – साथ चलते हैं जब मोड़ आए तो बचके निकलते हैं. रिश्तों की दुनिया भी एक अजीब ही दुनिया होती है. कहने को तो एक इंसान की जिंदगी में कुछ रिश्ते खून के होते हैं और बाकी सब नसीब से बनते हैं और खास बात ये भी है कि रिश्तों की ये दुनिया जितना सुकून देती है उतनी ही उलझने भी पैदा करती है. क्योंकि कभी रिश्ते फूलों की तरह महकते हैं तो कभी कांटे बनकर जिंदगी का सुख और चैन ही छीन लेते है. लेकिन नसीब से बने रिश्तों से अलग कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जो बनते नहीं बल्कि किन्ही वजहों से बनाए जाते है. कुछ रिश्ते जताए जाते हैं तो कुछ रिश्ते सिर्फ दिखाए जाते हैं और ऐसा ही एक रिश्ता था एक मां और एक बेटी के बीच जिसका राज जब खुला तो उस रिश्ते का ही खून हो गया. इंद्राणी मुंखर्जी ये वो नाम है जो पिछले कुछ दिनों से देश भर में चर्चा का केंद्र बन गया है. इंद्राणी पर आरोप है कि उन्होंने अपनी ही उस बेटी शीना बोरा का बेरहमी से कत्ल कर दिया है जिसे वो जमाने के सामने अपनी बहन बताती थीं. दरअसल इंद्राणी मुखर्जी और शीना बोरा के रिश्ते की इस पहेली के पीछे रिश्तों का एक ऐसा जाल बुना गया है जो अब इंद्राणी के लिए ही जी का जंजाज बन चुका है.

 

आखिर क्यों अपनी ही बेटी शीना बोरा की इंद्राणी मुखर्जी ने ले ली जान. स्टार इंडिया के पूर्व सीईओ पीटर मुखर्जी की पत्नी इंद्राणी मुखर्जी एक सेलेब्रिटी हैं, वो मीडिया जगत का एक बड़ा नाम है. एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली इंद्राणी मुखर्जी आईएनएक्स मीडिया ग्रुप की सीईओ रह चुकी है. देश की इलीट क्लास यानी उच्चवर्गीय बिरादरी में इंद्राणी अपने स्टाइल और कम वक्त में शानदार कामयाबी हासिल करने के लिए भी चर्चित रही हैं यहीं नहीं देश के रसूखदार और दौलतमंद लोगों के बीच उनका – उठना बैठना रहा है. लेकिन जिस तेजी से कामयाबी के आसमान पर इंद्राणी मुखर्जी का सितारा चमका उतनी ही तेजी से वो टूट कर उस वक्त जमीन पर आ गिरा जब उन्हें शीना बोरा नाम की लड़की के कत्ल के आरोप में गिरफ्तार किया गया. करीब तीन साल पहले हुए इस हाईप्रोफाइल मर्डर केस की जांच में अब उतने ही चौकानें वाले खुलासे हो रहे हैं जितनी चौंकाने वाली इंद्राणी की गिरफ्तारी रही है. दअरसल इंद्राणी मुखर्जी की ये कहानी रिश्तों का एक ऐसा मकड़जाल नजर आ रही है जिसके हर धागे का सिरा रहस्य से भरा हुआ है. इंद्राणी के रिश्तों की उलझन का सबसे अहम पहलू उनकी बेटी शीना बोरा ही थी जिनके कत्ल का इल्जाम उन पर लगा है. दरअसल इंद्राणी मुखर्जी अपने फ्रेंड सर्कल में शीना बोरा को अपनी बहन के तौर पर इंट्रोड्यूज कराती थी. उन्होंने अपने तीसरे पति, स्टार इंडिया के पूर्व सीईओ पीटर मुखर्जी को भी यही बताया था कि शीना बोरा उनकी बहन है लेकिन इंद्राणी मुखर्जी का ये राज उस वक्त खुल गया जब उन्हें शीना बोरा की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया.

 

इंद्राणी मुखर्जी ने अपनी ही बेटी शीना बोरा की हत्या आखिरकार क्यों की. इस सवाल का जवाब तो सामने आना अभी बाकी है लेकिन खुद इंद्राणी की जो कहानी अतीत के पर्दों से झांक रही हैं वो इंसानी रिश्तों की अहमियत और उनके बदलते मिजाज को लेकर तमाम सवाल खड़े कर रही है.

 

इंद्राणी का जन्म गुवाहाटी के ही एक मिडिल क्लास परिवार में हुआ था और उनके पिता एक रेस्टोरेंट चलाया करते थे. खुद इंद्राणी ने भी अपनी शुरुआती पढ़ाई लिखाई गुवाहाटी से ही पूरी की थी. फिर आखिर ऐसा क्या चमत्कार हुआ कि चंद सालों में ही गुवाहाटी की एक आम लड़की इंद्राणी मुंबई की दमकती दुनिया में बन गई माया मेमसाब.

 

इंद्राणी मुखर्जी की उड़ान ऊंचे शिखर तक पहुंच गई. जहां बड़ी- बड़ी हस्तियां उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी थीं और खुद इंद्राणी उनके लिए एक ऐसा नाम जिसकी मुट्ठी में एक दो नहीं बल्कि 17 टीवी चैनल थे. इंद्राणी मुखर्जी ने असम के एक मध्यमवर्गीय परिवार से मुंबई के मीडिया जगत की सबसे युवा सीईओ के शिखर तक ऊंची उड़ान भरी है. इंद्राणी की कामयाबी की ये कहानी जितनी दिलचस्प है उतनी ही हैरतअंगेज भी है. लेकिन ये कहानी पल – पल बदलते रिश्तों की दास्तान भी है. वो रिश्ते जो खून के हैं, वो रिश्ते जो नसीब से बने और वो रिश्ते भी जो इंद्राणी मुखर्जी ने कामयाबी हासिल करने के लिए बनाए और फिर एक के बाद एक मिटा भी दिए. और इसीलिए गुवाहाटी की एक आम लड़की बन सकी मुंबई की माया मेमसाब! लेकिन इंद्राणी की इस कामयाबी के केंद्र में उनकी महत्वकांक्षा की वो कहानी भी छिपी है जिसके बीज करीब 30 साल पहले गुवाहाटी में पड़ चुके थे.

 

मायानगरी मुंबई से करीब ढाई हजार किलोमीटूर दूर असम का खूबसूरत शहर है गुवाहाटी. और यहीं इंद्राणी मुखर्जी का जन्म हुआ था और तब मां – बाप ने प्यार से उनका नाम परी रखा था. नन्हीं परी का बचपन गुवाहाटी के मोहल्ले में खेलते – कूदते हुए गुजरा था और यहीं के इस मशहूर सेंट मैरी स्कूल से उन्होंने 10 वीं क्लास तक की पढाई भी पूरी की थी.

 

अंग्रेजी अखबार टेलीग्राफ में इंद्राणी मुखर्जी के स्कूल फ्रैन्ड के हवाले से खबर छपी है कि 1982 के आस-पास का ये वो दौर था जब परी बोरा उर्फ इंद्राणी बोरा पहली बार अपना घर छोड़ कर भाग गई थीं. हांलाकि गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से पकड़ कर उन्हें दोबारा घर वापस ले आया गया था. इस घटना की वजह से ही इंद्राणी सेंट मैरी स्कूल में दसवीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हो सकी थी और बाद में उन्होंने दसवीं का प्राइवेट इम्तिहान दिया था. गुवाहाटी में ही दसवीं तक की पढाई पूरी करने के बाद इंद्राणी बोरा अपना घर छोड़ कर शिलांग चली गईं जहां उन्होंने प्री यूनीवर्सिटी कोर्स के लिए लेडी केनी कॉलेज में दाखिला ले लिया था.

 

मेघालय की राजधानी शिलांग के इसी मशहूर लेडी केनी कॉलेज से इंद्राणी मुखर्जी ने कॉलेज की अपनी पढाई पूरी की है लेकिन कॉलेज से डिग्री हासिल करने के बाद इंद्राणी ने शिलांग को भी अलविदा कह दिया था और नौकरी की तलाश में वो पहले जमशेदपुर गई और फिर नई दिल्ली होते हुए कोलकाता जा पहुंची थी. लेकिन इस दौरान इंद्राणी बोरा की जिंदगी में ऐसा बहुत कुछ घटा था जिसका जिक्र उन्होंने कभी किसी से खुल कर नहीं किया.

 

टेलीग्राफ अखबार की खबर के मुताबिक शिलांग में जब इंद्राणी मुखर्जी पढ रही थी तभी वो पहली बार सिद्धार्थ दास नाम के शख्स के संपर्क में आई थीं. सिद्धार्थ से उनका पहले प्यार हुआ और फिर दोनों ने शादी कर भी कर ली थी.

 

इंद्राणी मुखर्जी ने बेहद कम उम्र में ही अपना घर बसा लिया था. गुवाहाटी में बोरा परिवार के करीबी बताते हैं कि शादी करने के बाद के दिनों में इंद्राणी को अक्सर अपने पति के साथ काइनेटिक स्कूटर पर गुवाहाटी की सड़कों पर घूमते हुए देख जाता था उन दिनों उनकी गोद में दो साल की उनकी बेटी शीना बोरा भी नजर आती थी.

 

खबरों के मुताबिक उन दिनों इंद्राणी के पति एस दास ज्यादातर उनके घर पर ही रहा करते थे. संघर्ष के उन दिनों में इंद्राणी के सौतेले पिता उपेंद्र बोरा ने उन्हें राजधानी दिशपुर के पास गणेशगुरी इलाके में एक फूड शॉप खोलने में मदद भी की थी. हांलाकि ये दुकान चल नहीं सकी और कुछ ही महीनों में इसे बंद कर दिया गया और फिर इसके बाद से ही परी उर्फ इंद्राणी बोरा नौकरी की तलाश में घर छोड़कर निकल गई थीं. इंद्राणी कहां – कहां गई और उन्होंने क्या किया ये बात आज भी एक राज ही है लेकिन गुवाहाटी में इंद्राणी के पड़ोसी बताते हैं कि अस्सी के दशक के बाद उन्हें फिर कभी गुवाहटी में नहीं देखा गया.

 

इंद्राणी मुखर्जी को सिद्धार्थ दास से हुई अपनी पहली शादी से बेटी शीना बोरा हुई थी जिसके कत्ल का इल्जाम अब इंद्राणी मुखर्जी पर लगा है. सिद्धार्थ दास से इंद्राणी को एक बेटा मिखाइल बोरा भी हुआ जो खुद भी अब अपनी कहानी सुना रहे हैं. मिखाइल बोरा के मुताबिक शिलांग में रहते हुए ही उनकी मां इंद्राणी का सिद्धार्थ दास से अफेयर शुरू हो गया था. ऐसा रिश्ता जिसकी वजह से मेरा और शीना का जन्म हुआ. शीना और मैं एक साथ बड़े हुए. शीना का जन्म 28 फरवरी, 1989 को हुआ और मैं 9 सितंबर 1990 को पैदा हुआ.

 

यहीं नहीं मिखाइल बोरा ये भी बताते हैं कि उनकी मां इंद्राणी मुखर्जी के बगैर गुवाहाटी में उनकी और उनकी बहन शीना बोरा की जिंदगी किस तरह बीती है. शीना मेरे लिए दुनिया की सबसे प्यारी बच्ची थी. वो मेरे लिए सब कुछ थी. हम अपनी भावनाएं एक दूसरे से ही बताया करते थे क्योंकि हमारे माता-पिता तो हमारे साथ नहीं थे, बस काका (नानाजी) और अइता (नानी) ही थीं.

 

शीना और मिखाइल इंद्राणी मुखर्जी के ही बच्चे हैं और सिद्धार्थ दास उनके पहले पति हैं ये बात इंद्राणी के उस शपथपत्र से भी साफ हो चुकी है जो उन्होंने अपने पहले पति सिद्धार्थ दास से तलाक लेते वक्त अदालत में दाखिल किया था. इंद्राणी के शपथपत्र के मुताबिक – मैं आपसी सहमति से अपने पति श्री एस दास से अलग हो गई हूं और मेरा उनसे साल 1989 से कोई संबंध नहीं है. मेरी जानकारी के मुताबिक ये सच है. मेरा बेटा मिखाइल बोरा और शीना बोरा जिनकी उम्र करीब तीन और चार साल हैं, मेरे साथ हैं और उनका मुझ से अलग हुए पति से कोई संबंध नहीं है.

 

इंद्राणी के इसी शपथपत्र से ये खुलासा भी हुआ है कि उन्होंने अपने दोनों बच्चों मिखाइल और शीना की कानूनी तौर पर देख – रेख का जिम्मा अपने पिता उपेंद्र बोरा और मां दुर्गा रानी बोरा को सौंप दिया था.

 

गुवाहाटी में इंद्राणी के पड़ोसी भी साल 1990 का वो दौर याद करते हुए बताते हैं कि इंद्राणी मुखर्जी शादी करके जितनी जल्दबाजी में गुवाहाटी वापस लौटी थी उतने ही चुपचाप तरीके से वो अपने बच्चों को मां-बाप के हवाले करके एक बार फिर गुवाहाटी से गायब भी हो गईं थीं और इस बार इंद्राणी की जिंदगी का पड़ाव था शहर कोलकाता.

 

साल 1990 में अपने बच्चों को अपने मां –बाप के हवाले करने के बाद इंद्राणी बोरा ने कोलकाता में एक नया अवतार लिया, इस शहर में इंद्राणी बोरा ने एक नए हमसफर के साथ एक नई जिंदगी की शुरुआत करते हुए संजीव खन्ना के साथ दूसरा ब्याह रचा लिया था और इस तरह वो इंद्राणी बोरा से इंद्राणी खन्ना बन गई थी. खास बात ये है कि गुवाहाटी में इंद्राणी की इस दूसरी शादी में ना तो उनके परिवार का कोई शख्स शरीक हुआ था और ना ही इसके बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी थी. इंद्राणी के दूसरे पति संजीव खन्ना का वायरलेस के अलावा हेरीटेज टूरिज्म का कारोबार बताया जाता है. कहा जाता है कि कोलकाता के चौरंगी पार्क स्ट्रीट एरिया में वो एक रेस्टोरेंट भी चलाते है. कोलकाता के पॉश इलाके हेस्टिंग एरिया में रहने वाले संजीव खन्ना को करीब से जानने वाले ये भी बताते हैं कि उन्होंने मेयो कॉलेज अजमेर से पढाई की है और कोलकाता के रईसों के सीसीएफसी नाम के क्लब का वो जाना पहचाना चेहरा रहे हैं.

 

संजीव खन्ना की जानकार सूची क्लेयर के मुताबिक मैं संजीव को उसके स्कूल डे से जानती हूं जब हम लोग इधर पोस्टिंग आ गए 87 में खड़गपुर से मेरे पति यहां पर नंबर 2 थे एयरफोर्स में कमाडिंग ऑफिसर्स में उस वक्त में हमारी संजीव से साथ में मुलाकात शुरू हुई औऱ उनके पैरेंट को भी हैस्टलिंग से जाने हम लोग भी वहीं रहते थे. तो मेरे साथ उसके मां बेटे जैसे रिलेशन था क्योंकि मेरे हसबैंड से वो बहुत जुनियर और मेरे बेटे से वो सीनियर था. ऐसे दिल का तो वो इतना अच्छा लड़का है तो वो शुरु से ही सबको हेल्प करना और वो अपना जाब भी करता था उसके बिजनैस एशोसिएशन भी थे मेयो कालेज के लिए बहुत कुछ करता था आप एक एक आदमी से पूछिएगा सीसीएनएफ एक नान क्लब है जहां पर संजीव खन्ना बोलने से सब लोग जान छिड़कते हैं.

 

शीना बोरा मर्डर केस में संजीव खन्ना को भी पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है लेकिन गिरफ्तार होने से पहले अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में संजीव खन्ना ने इंद्राणी से अपनी शादी की पूरी कहानी सुनाई है. संजीव खन्ना के मुताबिक मैं इंद्राणी से 1990 में मिला था. वो कुछ महीने पहले ही कोलकाता आई थी. वो एक कंप्यूटर कोर्स कर रही थी और पेइंग गेस्ट के तौर पर रहती थी. कुछ वक्त तक हमारी मुलाकातें होती रहीं और फिर तीन साल बाद 1993 में हमनें शादी का फैसला कर लिया.

 

संजीव खन्ना की जानकार सूची क्लेयर के मुताबिक इंद्राणी से उसकी शादी जहां तक मैं गलत न हो और मुझे याद हो तो शायद 91 में हुई थी और जब हम लोग क्लब में जाते थे तो वो उस वक्त प्रेगनेंट थी और उसकी बेटी होने वाली थी संजीव और इंद्राणी की बेटी होने वाली थी तब भी मेरा उसके साथ बहुत लगाव था और वो भी मेरे को बहुत मानती थी और पूछना मेरे से कि कैसे मेरी बेबी होगी और ये तो मैंने बोला कि मैं मां की तरह हूं तो कभी भी कोई जरूरत पड़े तो जरुर बोलना.

 

गुवाहाटी से करीब एक हजार किलोमीटर दूर कोलकाता में इंद्राणी नए जीवनसाथी के साथ जिंदगी के एक नए सफर पर निकल चुकी थीं. वो अब इंद्राणी बोरा से इंद्राणी खन्ना बन चुकी थी बावजूद इसके अपने पहले पति से हुए अपने बच्चों शीना और मिखाइल की याद तब भी उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा हुआ करती थी. इंद्राणी हमेशा शीना और मिखाइल की तस्वीरें अपने साथ रखा करती थीं. टाइम्स ऑफ इंडिया को संजीव खन्ना ने बताया है कि ये तब की बात है जब हमारी शादी हो चुकी थी. जब मैंने उससे पूछा कि वो कौन हैं उसने बताया कि वो दोनों उसके भाई और बहन हैं. मैंने उसे समझाने की कोशिश की कि वो अपने परिवार से रिश्ते सुधारने की कोशिश करे लेकिन उसने मना कर दिया.

 

इंद्राणी के दूसरे पति संजीव खन्ना के इस बयान से साफ जाहिर है कि सिर्फ 21 साल की उम्र में इंद्राणी ने ये तय कर लिया था कि वो अपने अतीत के उन पन्नों को कभी दुनिया के सामने नहीं आने देगीं जिनमें उनके दो बच्चों शीना बोरा और मिखाइल बोरा का नाम लिखा है.

 

संजीव खन्ना के साथ आठ साल गुजारने के बाद इंद्राणी का वैवाहिक जीवन एक बार फिर दरकने लगा था. साल 2001 में संजीव खन्ना और इंद्राणी की बेटी विधि जब पांच साल की थी तब इंद्राणी ने अपने पति संजीव खन्ना को छोड़ दिया था. दरअसल इंद्राणी अपने उन सपनों को पूरा करने के लिए मायानगरी मुंबई चली आई थीं जो सपने उसकी आंखों में बचपन से महक रहे थे.

 

संजीव खन्ना की जानकार सूची क्लेयर बताती हैं कि जब वो यहां से चली गई जब उसकी शादी टूटने पर आ गई थी तब उस समय से मैं और मेरा बेटा भी चला गया था. उसका तलाक का तो मैं आपको नहीं बता सकती पर वो अपनी नन्हीं सी बच्ची को लेकर मुंबई चली गई थी. और तब संजीव बहुत अपने ख्यालों में रहता था और हम लोग उसकी देखभाल करते थे इस दौरान हम लोग उसके साथ मजाक करते थे और उसे घर बुला लिया करते पर उसे महसूस हो गया था कि इंद्राणी अब वापस नहीं आएगी.

 

साल 2001 का ये वो वक्त था जब कोलकाता में संजीव खन्ना अपनी जिंदगी में तन्हा रह गए थे. इंद्राणी अपनी बेटी विधि के साथ जिंदगी के एक नए सफर पर निकल चुकी थी वो सफर जो उन्हें कामयाबी की नई बुलंदियों तक पहुंचा सके. वो सफर जो उन्हें शोहरत और दौलत के ऊंचे मुकाम तक पहुंचा सके. ऐसा करते हुए इंद्राणी एक बार फिर वक्त से आगे निकलने की कोशिश में थी और उनकी इस कोशिश में एक बार फिर एक रिश्ता पीछे छूट गया, एक बार फिर उनका एक रिश्ता टूट गया लेकिन रिश्तों की इस टूटन से बेपरवाह इंद्राणी कोलकाता की अपनी दुनिया को भुला कर मुंबई की नई चमकती दुनिया में एक नई जिंदगी में मस्त हो गई.

 

संजीव खन्ना की जानकार सूची क्लेयर बताती हैं कि उसने लीगली तलाक कब लिया मैं आपको ये बता नहीं सकती पर इतना जरूर था कि मैं हमेशा पूछती थी कि बच्ची कैसी है तो वो बोलता था कि इंद्राणी ने कस्टडी ले ली है और वो उस वक्त जैसे भी माहौल में थी वो उच्च महत्वाकांक्षा में गई थी और उसको पैसे वैसे खूब सूट किया हो तो उसने कोलकाता के साथ में सारा नाता ही तोड़ दिया था.

 

गुवाहाटी के बाद कोलकाता और कोलकाता के बाद मुंबई अब इंद्राणी का नया ठिकाना बन चुका था. साल 2001 में मुंबई आकर इंद्राणी खन्ना ने अपनी प्लेसमेंट एजेंसी खोल ली थी. इसके अलावा वो एचआर कन्सलटेंट का काम भी करने लगी थी लेकिन रात के अंधेरे में रोशनी से दमकने वाले इस शहर में इंद्राणी के लिए अपने उन सपनों को पूरा करने की ये एक शुरुआत भर थी जो सपने उन्होंने जागती आंखों से देखे थे और फिर साल 2002 में एक तारीख ऐसी भी आई जिसने इंद्राणी खन्ना के सपनों को हकीकत में तब्दील करके रख दिया.  विज्ञापन जगत की मशहूर शख्सियत सुहेल सेठ इंद्राणी के उस दिन को याद कर बताते हैं कि मैंने पीटर मुखर्जी, सुमंत्र दत्ता और मुरली देवड़ा को प्रेसिडेंट होटल के लाईब्रेरी बार बुलाया था. हम बैठे ही थे कि तभी एलेक पद्मसी के साथ एक खूबसूरत महिला दाखिल हुई. एलेक ने हमें हैलो कहा और मैंने इंद्राणी को (एलेक को नहीं) साथ बैठने को कहा. उसी मेज पर तब पीटर की गर्लफ्रेंड सपना भी बैठी थी.

 

इंद्राणी की इस कहानी पर आगे बढने से पहले यहां आप ये भी जान ले कि एलेक पद्मसी विज्ञापन की दुनिया का एक बड़ा नाम है तो वहीं पीटर मुखर्जी मीडिया जगत का बड़ा नाम है और वो स्टार इंडिया के सीईओ भी रह चुके हैं. ऐसी हाईप्रोफाइल लोगों के बीच इंद्राणी की स्टार इंडिया के पूर्व सीईओ पीटर मुखर्जी से ये पहली मुलाकात थी लेकिन ये पहली मुलाकात ही इंद्राणी की तकदीर बदलने वाली है ये बात शायद खुद इंद्राणी ने भी ना सोची होगी. इंद्राणी की ये पूरी कहानी शीना बोरा मर्डर केस में उनकी गिरफ्तारी के बाद सुहेल सेठ ने दुनिया के सामने रखी है. सुहेल सेठ आगे लिखते हैं कि मैं दो दिन बाद दिल्ली वापस आ गया और इंद्राणी को फोन लगाया. जैसे ही मैंने फोन नीचे रखा मेरे पास पीटर मुखर्जी का फोन आया और उन्होंने कहा कि वो इंद्राणी को लेकर गंभीर हैं और उनसे शादी करना चाहते हैं. इसलिए मुझे अब इंद्राणी को दूसरी नजर से देखना चाहिए.

 

जाहिर है कि स्टार इंडिया के पूर्व सीईओ पीटर मुखर्जी से शादी करने से पहले इंद्राणी दो बार शादी कर चुकी थीं. कोलकाता के कारोबारी संजीव खन्ना से दूसरा ब्याह रचाने के बाद इंद्राणी गुजरते वक्त के साथ कैसे एक मीडिया कंपनी की सीईओ बन कर, बन गई मुंबई की माया मेमसाब.

 

इंद्राणी उर्फ परी बोरा पहली बार 2002 में अखबारों की सुर्खियों में जब आई थीं उस वक्त ये अफवाहें उड़ रही थीं कि ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री के सबसे ताकतवर शख्स प्रतिम उर्फ पीटर मुखर्जी अपने से 16 साल छोटी महिला को डेट कर रहे हैं. शादीशुदा पीटर उस वक्त 46 साल के थे उनको अपनी पहली पत्नी से दो बेटे राहुल और रॉबिन मुखर्जी भी थे. उधर इंद्राणी भी पहले से शादीशुदा थीं और उनकी एक पांच साल की बेटी भी थी, जिसका नाम विधि था. लेकिन इंद्राणी के लिए पीटर मुखर्जी के करीब आना जैसे उनकी मनमांगी मुराद के पूरे होने जैसा था क्योंकि इस वक्त तक पीटर मुखर्जी मार्केटिंग की दुनिया से निकलकर स्टार इंडिया जैसे उस बड़े टीवी नेटवर्क के सीईओ बने थे जो भारत में मनोरंजन की परिभाषा बदल रहा थे. दरअसल स्टार इंडिया में पीटर मुखर्जी के कार्यकाल के दौरान ही सास भी कभी बहू थी जैसे टीवी सीरियल नजर आए, वहीं अमिताभ बच्चन जैसा फिल्मी सितारा भी पहली बार स्टार टीवी के लिए शो करने को तैयार हुआ था.

 

सिंगापुर से भारत आकर पीटर मुखर्जी ने भारतीय टीवी मनोरंजन की दुनिया को एक दम से बदल दिया था और इसीलिए उस वक्त मीडिया जगत में उनके नाम का डंका बज रहा था. खास बात ये है कि पीटर मुखर्जी ने इंद्राणी से शादी करने से पहले उन्हें भी स्टार इंडिया में नौकरी दिलवा दी थी. जब दोनों की दूसरी शादी हुई तब इंद्राणी स्टार इंडिया में ह्यूमन रिसोर्स डिपार्टमेंट की हेड थीं और उम्र में पीटर मुखर्जी से 16 साल छोटी थी. सुहेल सेठ के मुताबिक पीटर और इंद्राणी ने एक दूसरे के साथ वक्त बिताना शुरू कर दिया और करीब तीन महीने बाद पीटर ने मुझे फोन करके बताया कि वो शादी कर रहे हैं. ये शादी दिल्ली के पंचकुइंया रोड के उनके घर पर हुई थी और ये बेहद निजी समारोह था. मैंने उसमें इंद्राणी के परिवार से किसी को नहीं देखा लेकिन इंद्राणी की बेटी विधि वहां आई थी.

 

दरअसल पीटर से शादी करने से पहले इंद्राणी ने संजीव खन्ना से तलाक ले लिया था और इसीलिए संजीव और इंद्राणी के बीच बेटी विधि की कस्टडी को लेकर कानूनी जंग भी छिड़ी थी. इस कानूनी लड़ाई में पीटर मुखर्जी ने इंद्राणी का साथ दिया और जब इंद्राणी को विधि की कस्टडी मिल गई तब पीटर मुखर्जी ने ना सिर्फ इंद्राणी से ब्याह रचाया बल्कि उनकी बेटी विधि को गोद लेकर अपनी बेटी भी बना लिया था.

 

ब्रिटेन में जन्मे पीटर मुखर्जी ने अप्रैल 2002 में जब इंद्राणी से शादी की तो ये खबर अखबारों की सुर्खियां भी बनी और ऐसा इसलिए क्योंकि उस वक्त तक पीटर मुखर्जी मीडिया इंडस्ट्री की बड़ी शख्सियत बन चुके थे. ग्लोबल मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक ने उन्हें इंडिया में अपनी कंपनी की कमान सौंपी थी और ब्रॉडकास्ट बिजनेस उस वक्त भारत में आकार ले ही रहा था. स्टार इंडिया के सीईओ के तौर पर पीटर मुखर्जी उस वक्त मीडिया में छाए हुए थे और इसी वजह से उनकी ग्लैमरस पत्नी इंद्राणी मुखर्जी को भी उतनी ही तवज्जो मिल रही थी. उन दिनों स्टार इंडिया में इंद्राणी मुखर्जी के साथ काम कर रही रवीना राज कोहली, इंद्राणी की महत्वकांक्षाओं की कहानी कुछ इस तरह से बयान करती हैं.

 

स्टार न्यूज की पूर्व सीईओ रवीना राज कोहली बताती हैं कि उन दिनों में स्टार इंडिया में और मैं स्टार इंडिया को जब सेटअप कर रही थी तभी इंद्राणी मेरी जिंदगी में आईं उसकी शादी होने वाली थी पीटर के साथ तो हम लोग ना नहीं बोल सके क्योंकि वो हमारे सहयोगी थे तो वो बहुत एंबिशियस थी औऱ ये क्लियर था कि उसे बहुत जल्दी बहुत बड़ा कुछ बनना है. मैंने कहीं पर पढ़ा था कि उसनें कहीं इंटरव्यू में कि वो फोर्ब्स के 50 लोगों के अंदर में आना चाहती है और बड़े बड़े लिस्ट पर चढ़ना चाहती थी लेकिन काबिलियत भी तो होनी चाहिए सिर्फ एक आदमी से शादी करके और उसे यूज करके कोई थोड़े बनता है इतना बड़ा आदमी. तो दिस वाज द प्रॉब्लम.

 

अप्रैल 2002 में पीटर मुखर्जी से शादी करने के बाद करीब चौहद साल बाद इंद्राणी मुखर्जी अपने घर गुवाहाटी भी वापिस लौटी थी. यही वो वक्त था जब वो अपनी बेटी शीना बोरा और मिखाइल बोरा के सीधे संपर्क में भी आई और यहीं से फिर अपने पहले पति के बच्चों के साथ उनकी करीबियत बढ़ती चली गई.

 

इंद्राणी मुखर्जी अब अक्सर गुवाहाटी आने लगी थी उन्होंने ना सिर्फ अपने मां- बाप उपेन और दुर्गा रानी बोरा की आर्थिक मदद की बल्कि वो अपने बेटी शीना और बेटे मिखाइल की पढाई लिखाई में भी मदद करने लगी थी लेकिन मां – और बच्चों के बीच रिश्तें का ये कनेक्शन एक शर्त के फेवीकाल से जोड़ा गया था.

 

रिश्तों का एक अजीब जाल जन्म ले चुका था. एक मां ने दुनिया की नजरों में अपनी बेटी और बेटे को अपना भाई और बहन बना दिया था. खास बात ये है कि इंद्राणी मुखर्जी ने ठीक उसी तरह अपने तीसरे पति पीटर मुखर्जी से भी इन बच्चों का सच छिपाए रखा जैसा उन्होंने अपने दूसरे पति संजीव खन्ना के साथ किया था. पीटर के मुताबिक इंद्राणी ने उनसे भी शीना बोरा को अपनी बहन बताया था.

 

स्टार इंडिया के पूर्व सीईओ पीटर मुखर्जी से सवाल- किस हद तक ये बात सही थी कि शीना और आपके बेटे रिलेशन में थे और कब तक थे? पीटर-मेरे को ठीक से मालूम नहीं है पर शायद दो ढ़ाई साल तो रहा ही होगा.

सवाल- तो इस दौरान आपके बेटे ने जिक्र नहीं किया कि ये बहन नहीं बेटी है और कहीं न कहीं आपको गुमराह किया जा रहा है. पीटर-नहीं मेरे को बताया गय़ा कि वो बेटी नहीं बहन है पर जैसा कि मैंने आपको बताया कि मैंने अपने बेटे की बात नहीं सुनी सोचा ना जाने कंहा से गलत इंफ़ॉर्मेशन लेकर आ रहे हैं हमें बताने को तो मैंने ज्यादा उनका वो नहीं किया.

 

लेकिन इंद्राणी मुखर्जी का बुना रिश्तों का ये जाल उस वक्त और ज्यादा उलझने लगा जब साल 2006 में उनकी बेटी बनी बहन शीना बोरा मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज में पढ़ने पहुंची. पढ़ाई के दौरान ही शीना बोरा पीटर मुखर्जी के बेटे राहुल मुखर्जी के संपर्क में आई और फिर दोनों के बीच प्यार परवान चढ़ने लगा. दोनों लिव इन में भी रहने लगे. रिश्ते में सौतले भाई – बहन राहुल मुखर्जी और शीना बोरा के इस नए रिश्ते ने इंद्राणी और पीटर मुखर्जी के सामने एक नई मुसीबत खड़ी कर दी थी और इसी के बाद से फिर इन चारों के बीच रिश्तों में तल्खियां भी बढ़ती चली गई.

 

स्टार इंडिया के पूर्व सीईओ पीटर मुखर्जी से सवाल- तो क्या आपकी कभी बात हुई शीना से उस दौरान पिछले 3 सालों में कभी ऐसा हुआ हो. पीटर-मेरे तो बात होने का सवाल था ही नहीं क्योंकि मेरा उनके साथ ज्यादा कांटैक्ट था ही नहीं और जिस टाइम उन्होंने मेरे बेटे राहुल के साथ दोस्ती की उससे पहले ही मेरा रिलेशनशीप शीना के साथ ज्यादा इंवाल्वड नहीं था क्योंकि मेरी बातचीत ज्यादा नहीं होती थी क्योंकि वो रिलेशनशीप 100 प्रतिशत न तो मुझे पंसद था और न ही इंद्राणी को पंसद था और बेकार में इनके साथ बातचीत करने में कोई लाभ नहीं था. तो हमनें उस वक्त में उनके साथ ज्यादा बातचीत को किया नहीं फिर उन्होंने हमारे साथ भी बातचीत करना बंद कर दिया क्योंकि वो सोच रहें थे कि हम उनका रिलेशनशिप बिगाड़ना चाहतें हैं.

 

राहुल मुखर्जी और शीना बोरा की मोहब्बत का ये वो शुरुआती दौर था जब इंद्राणी, पीटर मुखर्जी के साथ स्टार इंडिया में ही काम कर रही थीं. लेकिन साल 2007 में ये कपल उस वक्त दोबारा सुर्खियों में आया जब स्टार इंडिया नेटवर्क की हालत खराब होने की वजह से पीटर और इंद्राणी मुखर्जी दोनों को कंपनी छोड़नी पड़ी. पीटर ने स्टार इंडिया छोड़ दिया और एक नए आईएनएक्स ब्रॉडकास्ट नेटवर्क की नींव रखने का फैसला किया. साल 2007 में इस कंपनी के लिए पीटर और इंद्राणी ने बाजार से करीब 800 करोड़ रुपये का निवेश करवाया और इस तरह 17 चैनलों का बड़ा नेटवर्क खड़ा करने का सपना हकीकत में तब्दील होने लगा. चूंकि पीटर मुखर्जी स्टार इंडिया के साथ अपने कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों की वजह से इन नेटवर्क में सीधी भूमिका नहीं निभा सकते थे इसलिए उनकी पत्नी इंद्राणी मुखर्जी इस नए नेटवर्क की मुखिया बनाई गईं और इस तरह इंद्राणी आईएनएक्स मीडिया की सीईओ बनकर गुवाहाटी की एक मध्यमवर्गीय लड़की परी बोरा से बन गई मीडिया जगत की माया मेमसाब.

 

नाइन एक्स चैनल की सीईओ इंद्राणी को तब दुनिया भर में किसी ब्राडकॉस्ट कंपनी का सबसे कम उम्र का सीईओ बताया गया था. यहीं नहीं इंद्राणी को अवॉर्ड मिलने भी शुरू हो गए. 2008 में उन्हें उत्तर रत्न अवॉर्ड मिला. यह अवॉर्ड उन्हें ‘कवाड़ से केबल नेटवर्क शुरू करने वाले विजन’ के लिए दिया गया. इसी साल उन्हें वॉल स्ट्रीट जर्नल के 50 टॉप वुमन एंट्रोप्रेन्योर की लिस्ट में जगह मिली. इस लिस्ट में इंद्रा नुई और पदमा वॉरियर जैसी महिलाएं भी शामिल थीं. लेकिन इंद्राणी मुखर्जी की ऐसी शोहरत के पीछे रवीना राज कोहली पीटर मुखर्जी को बडी वजह मानती है.

 

स्टार न्यूज के पूर्व रवीना राज कोहली बताती हैं कि मेरे को नहीं लगता कि उनकी कोई बड़ी राइज हुई है पीटर की राइज हुई है. पीटर प्रोफेशनल और वो उनकी बीबी हैं तो उनके ऊपर जंप करके उनको प्रॉमिनेंस मिला था लेकिन अपने टैलेंट के दम पर नहीं, इसी वजह से वह पीटर की पत्नी के रूप में जानी जाती थी. सवाल- अगर आपने ओविरक सेल का वो आर्टिकल पढ़ा होगा तो उसमें वो बताती हैं कि उनका रुतबा एक महारानी जैसा था उन्हें ये नहीं मालूम था कि वो क्या कर रही है पर वो दफ्तर में आती थी और दरबारी सा एकदम माहौल था मगर बहुत पावरफूल शख्सियत थी ये पता चलता है उनके बारे में. रवीना- बहुत एंबिसस थी बहुत स्ट्रांग थी और पीटर उनकी हर बात मानते थे वो मुझे पता है और अगर उन्होंने अपना ये रुप अगर दिखलाया होगा news x औऱ जहां पर भी थी वो तो मुझे लगता है उनका कोई रोल मॉडल रहा होगा किसी पिक्चर में उन्होंने देखा होगा कि मीडिया के लोग इस तरह का व्यवहार करते हैं. तो ऐसा तो किया ही होगा क्योंकि उनको तो कोई एक्सपिरिएंश था ही नहीं और कोई तजुर्बा तो था ही नहीं मीडिया का हांलाकि एचआर का भी कोई तजुर्बा नहीं था लेकिन फिर भी चैनल के सारे लोगों का प्लेसमेंट उसी ने किया था उसी के थ्रू हुए थे. तो आपको उसी बात से पता चल जाए कि जो बात पीटर एक्सेप्ट करते थे वही होता था.

 

गुजरते वक्त के साथ इंद्राणी मुखर्जी की शोहरत और उनका रुतबा तो बढता रहा लेकिन उनकी कंपनी आईएनएक्स के चैनल उतने मशहूर नहीं हुए और 2009 में तो पीटर और इंद्राणी मुखर्जी दोनों को ही आईएनएक्स से हटना पड़ा. उन पर फाइनेंशियल और दूसरी गड़बड़ियों के आरोप लगे और इसके बाद ये कपल भारत छोड़ ब्रिटेन में ब्रिस्टल चला गया लेकिन साल 2015 में जब शीना बोरा मर्डर केस का राज खुला तो इसी के साथ खुल गया इंद्राणी मुखर्जी की बेहिसाब तरक्की उनकी बेशुमार दौलत और उनके सिसकते रिश्तों का पूरा मायाजाल. और बेनकाब हो गई गुवाहाटी की माया मेमसाब.

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