ऑपरेशन दुपट्टा: इंद्राणी की जुबानी, क्यों, कब और कैसे किया बेटी का कत्ल?

By: | Last Updated: Thursday, 15 October 2015 3:27 PM
indrani mukherjee

नई दिल्ली: शीना बोरा हत्याकांड यानी ऑपरेशन दुपट्टा. देश की आठ भाषाओं में 48 चैनल चलाने वाली कंपनी स्टार इंडिया के पूर्व सीईओ की पत्नी इंद्राणी मुखर्जी ने पुलिस की पूछताछ में अपन दिल में दफ्न गुनाह की कहानी उगल दी है. इंद्राणी से पूछे गए जांच एजेंसी के 70 सवालों के जवाब में सामने आई गुनाह की वो दास्तान जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे.

 

1) आपका पूरा नाम क्या है?

इंद्राणी मुखर्जी उर्फ पोरी बोरा

 

2) आपका निक नेम क्या है ?

मेरा कोई निक नाम नहीं है.  मेरे कुछ करीबी मुझे इंडी बुलाते हैं.

 

ये उसी इंद्राणी मुखर्जी से पुलिस की पूछताछ की वो झलक है जिसे देश का मीडिया जगत आईएनएक्स मीडिया की सीईओ के तौर पर जानता है और आप इन्हें अपनी ही बेटी शीना बोरा की हत्या के आरोप में जेल जा चुकी मां के तौर पर जानते हैं.

 

ये एक साड़ी के जरिए रची गई साजिश की कहानी है.

 

इंद्राणी: मैंने पहले शीना को अमरसन्स शोरूम से एक साड़ी दिलवाई ताकि उसे शक ना हो.

 

ये एक दुपट्टे की कहानी है

 

इंद्राणी: मैंने और संजीव ने शीना के दुपट्टे से ही उसका गला घोंटा

 

ये एक सूटकेस की कहानी है

 

लाश को सूटकेस में डाला और नीचे खाई में धकेल दिया.

 

इंद्राणी: शीना मेरी बेटी ज़रूर थी लेकिन वो मुझे ब्लैकमेल करने लगी थी धमकाने लगी थी. 

 

पैसों की भूखी एक मां ने क्यों मार दिया अपनी बेटी को?

 

इंद्राणी: मुझे डर था की शीना और राहुल की अगर शादी हो गई तो शीना मेरी मुश्किल बढ़ा देगी.

 

इससे पहले कि इंद्राणी की जुबानी देश के सबसे हाईप्रोफाइल मर्डर की कहानी सुनाएं आपको याद दिला दें कि स्टार इंडिया के पूर्व सीईओ की पत्नी इंद्राणी मुखर्जी का इस हत्याकांड में नाम तब सामने आया था जब इंद्राणी मुखर्जी के ड्राइवर श्यामवर राय को पुलिस ने 22 अगस्त 2015 को हिरासत में लिया था. गैरकानूनी हथियार रखने के जुर्म में पकड़े जाने के बाद ड्राइवर श्यामवर राय ने पुलिस के सामने एक बड़ा राज उगल दिया. श्यामवर राय ने बताया कि उसने और इंद्राणी बोरा ने मिलकर तीन साल पहले 24 अप्रैल 2012 को शीना बोरा की हत्या की थी. इसके बाद इंद्राणी मुखर्जी को गिरफ्तार कर लिया गया और शीना बोरा की हत्या में शामिल तीसरे किरदार का नाम भी सामने आ गया. इंद्राणी और उनके ड्राइवर श्यामवर राय के अलावा तीसरा नाम था इंद्राणी के पहले पति संजीव खन्ना का.

 

इंद्राणी बोरा ने जांच एजेंसी की कड़ी पूछताछ में उगले हैं ऐसे राज जिस पर देश भर में लगातार कयास लगाए जाते रहे लेकिन पूरा सच कभी सामने नहीं आया. शीना बोरा हत्याकांड की मुख्य आरोपी ने खुद बताया है कि शीना बोरा कत्ल कब कैसे और किन हालात में हुआ? इंद्राणी की जिंदगी के राज भी खुलेंगे और शीना की मौत के पलों से पर्दा भी उठेगा.

 

देश भर का मीडिया कत्ल की इस गुत्थी को लगातार कवर करता रहा लेकिन पूरा सच कभी आपकी नजरों के सामने नहीं आया. वजह ये है कि शीना बोरा की हत्या और मां इंद्राणी पर लगा हत्या का इल्जाम दरअसल रिश्तों की उस उलझी हुई कहानी का हिस्सा है जिसे समझना जितना मुश्किल है उतना ही जरूरी भी.

 

महाराष्ट्र की पेण पुलिस ने जब इंद्राणी के ड्राइवर श्यामवर राय को गैरकानूनी हथियार के साथ इसी साल अगस्त महीने में पकड़ा था तो उसने ना सिर्फ तीन साल पहले शीना बोरा की हत्या का राज उगला था बल्कि जिस जगह पर शीना की लाश को ठिकाने लगाया था उसकी निशानदेही भी की थी. लेकिन जब महाराष्ट्र के पेण इलाके के उस जंगल में जांच एजेंसियों शीना हत्याकांड के सबूतों की तलाश में पहुंचीं तो सारी निशानियां मिट चुकी थीं मिला था तो सिर्फ वो सूटकेस जिसमें शीना की लाश को ठिकाने लगाया गाया था.

 

एक सवाल भी पुलिस को परेशान कर रहा था कि क्या इंद्राणी अकेले 24 साल की एक युवा लड़की की हत्या कर सकती है? और ना सिर्फ हत्या, क्या वो लाश को अकेले ठिकाने लगा सकती है.

 

जांच एजेंसियों को उलझी हुई कहानी का कोई सिरा पकड़ में नहीं आ रहा था. फोरेंसिक सबूत वक्त ने मिटा दिए थे. इंद्राणी के मौजूदा पति और स्टार इंडिया के पूर्व सीईओ पीटर मुखर्जी से पूछताछ में कोई सुराग नहीं मिला. इंद्राणी के पहले पति संजीव खन्ना का इस साजिश में शामिल होना तो दूर की कौड़ी थी. इंद्राणी पुलिस की गिरफ्त में तो थी लेकिन उसने अपने होंठ सिल लिए थे.

 

और तब सामने आया 24 साल की उम्र में मारी जा चुकी शीना बोरा का सगा भाई मिखाइल बोरा. उसने साफ कहा कि जिस शीना को इंद्राणी अपनी बहन बताती रही है वो उसकी बेटी है और मिखाइल खुद उसका बेटा. उसने ये भी कहा कि या तो इंद्राणी सच उगले या फिर मैं सच बोलूंगा.

 

इंद्राणी तब पुलिस की गिरफ्त में थी और मिखाइल ने राज खोला कि इंद्राणी ने ना सिर्फ शीना बोरा की हत्या की बल्कि मिखाइल की हत्या की कोशिश भी की थी. और अब इंद्राणी ने खुद जांच एजेंसियों को बता दिया है कि मिखाइल को भी मारने की कोशिश हुई थी.

 

क्या उसी दिन मिखाइल को मारने की साजिश भी रची थी?

 

संजीव और मैंने प्लान किया था कि एक ही दिन दोनों की हत्या कर देंगे क्योंकि शीना के बाद मिखाइल भी मेरे लिए खतरा था. मैंने मिखाइल को मिलने के बहाने 24 अप्रैल को मुंबई बुलाया. हमने दो सूटकेस भी ले रखे थे. शीना की हत्या करने के बाद हम वर्ली पहुंचे. उस रात करीब 9.30 से – 10 बजे के बीच मिखाइल वर्ली वाले घर पर पहुंचा. संजीव ने मिखाइल की ड्रिंक में भी बेहोशी की दवा मिलाई. हमने वर्ली के फ्लोर रेस्टोरेंट से चाइनीज फ़ूड आर्डर किया. खाना और दवा मिली ड्रिंक पीने के बाद मिखाइल होश खोने लगा था लेकिन संजीव और मेरे ड्राइवर श्याम राय ने मुझसे कहा कि दो-दो लाश एक साथ ले जाना मुश्किल होगा. मिखाइल का वजन भी ज्यादा था इसीलिए हमने मिखाइल को उस समय नहीं मारा. हम लोग शीना की लाश को लेकर पेन चले गए. अगले दिन सुबह पता चला कि मिखाइल वहां से भाग निकला था.

 

शीना बोरा का कत्ल इंद्राणी ने कैसे किया? ये बताने से पहले आपको बताते हैं इंद्राणी का वो कबूलनामा जिसमें दर्ज है उस इंद्राणी की जिंदगी की उलझी हुई तस्वीर जिसे उसके माता पिता परी बोरा के नाम से बुलाते थे.

 

परी बोरा आखिर इंद्राणी कैसे बनी? उसने असम के गुवाहाटी से मुंबई तक का सफर कैसे तय किया. रिश्तों को बनाने- उन्हें छिपाने और उलझ जाएं तो मिटा देने वाली इंद्राणी मुखर्जी की दास्तान का हर पन्ना एक ऐसा राज खोलता है जिसे इंद्राणी और उसके परिवार ने कभी सामने नहीं आने दिया. इंद्राणी ने पुलिस की पूछताछ में इन उलझे हुए रिश्तों की पूरी कहानी बयां की है.

 

इंद्राणी की कहानी बार बार बदलते रिश्तों की कहानी भी है और पैसे, शोहरत और इज्जत की बेपनाह भूख से गुजरती उस लड़की की कहानी भी जिसने जिंदगी में सुकून की तलाश में इंसानियत के सबसे बड़े जुर्म को अंजाम दे डाला.

 

इंद्राणी ने सुनाई है उस दौर की कहानी जब वो महज 8-9 साल की थी और तब वो अपने सौतेले पिता की गंदी नीयत का शिकार हो चुकी थी.

 

क्या आपके बचपन या परवरिश के दौरान आपको मुश्किलें पेश आई थीं.

इंद्राणी: हम एक मिडिल क्लास परिवार से थे. पैसों की समस्या थी. पिता के गुजर जाने के बाद मेरी मां ने उपेन्द्र कुमार बोरा से शादी कर ली. मैं जब 8-9 साल की थी तब मेरे सौतेले पिता ने मेरा शारीरिक शोषण शुरू किया, ये करीब 2 से 3 साल तक चला. 17 साल की उम्र में मैंने घर छोड़ दिया और गुवाहाटी से कोलकत्ता आ गई.

 

शायद यही वजह रही होगी कि इंद्राणी ने गुवाहाटी में अपना घर छोड़ने का फैसला कर लिया था. 45 साल की इंद्राणी की शादियां और और रिश्ते लोगों के लिए हमेशा पहेली बने रहे. जब पुलिस ने इंद्राणी से उसकी शादियों के बारे में सवाल किया तो पढ़िए इंद्राणी ने क्या कहा?

 

क्या आपकी शादी हुई है. आपके पति का क्या नाम है?

इंद्राणी: मेरी दो शादियां हुई हैं. मेरे मौजूदा पति का नाम पीटर मुख़र्जी है और मैं उनके साथ ही रहती हूं. पीटर से मेरी शादी 2002 में मुंबई में हुई थी. इससे पहले मैंने कोलकाता के बिज़नेसमैन संजीव खन्ना से शादी की थी. मेरी और संजीव की एक बेटी है जिसका नाम विधि है. साल 2001 में मेरा और संजीव का तलाक हो गया था.

 

इन शादियों से अलग इंद्राणी की जिंदगी में एक और शख्स भी था. महज 14 साल की उम्र में इंद्राणी की जिंदगी में सिद्धार्थ दास की एंट्री हो चुकी थी. इंद्राणी ने जांच एजेंसियों को बताया कि वो गुवाहाटी छोड़ कर घर से दूर पढ़ने के लिए शिलॉन्ग आ चुकी थी यहां पहली बार उसकी मुलाकात हुई सिद्धार्थ दास नाम के एक शख्स से. उसी मुलाकात ने सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री के बीज बो दिए थे.

 

लेकिन इन दो शादियों से अलग मेरा एक और रिश्ता भी था जो तब बना जब मैं सिर्फ 14-15 साल की थी. साल 1986 में मेरी मुलाकात शिलॉन्ग में लेडी कीन कॉलेज में सिद्धार्थ दास से हुई थी. ये हमारी पहली मुलाकात थी. मुझे सिद्धार्थ से प्यार हो गया और इसके बाद हम एक साथ रहने लगे लेकिन हमारी शादी नहीं हुई थी.

 

सिद्धार्थ दास सबसे पहले एबीपी न्यूज पर सामने आए थे और उन्होंने कुबूल किया था कि पैसों के लिए इंद्राणी ने सिद्धार्थ को सिर्फ पैसों की तंगी की वजह से छोड़ दिया था?

 

सिद्धार्थ के इस दावे पर अब इंद्राणी ने भी मुहर लगा दी है. इंद्राणी ने बताया कि कैसे उसने 14-15 साल की उम्र में ही बेहतर जिंदगी के लिए अपने प्यार और अपने दो छोटे-छोटे बच्चों को छोड़कर दूसरे शहर कोलकाता जाने का फैसला कर लिया था.

 

सिद्धार्थ दास और आप कब और क्यों अलग हुईं?

 

इंद्राणी: तीन साल बाद मैं और सिद्धार्थ अलग हो गए. हमारे लिव इन रिलेशनशिप से शीना और मिखाइल दो बच्चे हुए थे. लेकिन फिर आस पड़ोस के लोगों ने बातें करना शुरू कर दिया. हमारा जीना मुश्किल हो गया था. इसके अलावा सिद्धार्थ से अलग होने की सबसे बड़ी वजह पैसा थी. सिद्धार्थ पैसे नहीं कमा पा रहा था जिसकी वजह से हमारा घर चलाने में भी बहुत परेशानी होने लगी थी.

 

मिखाइल ने भी यही सच मीडिया को बताया था.

शिलांग में रहते हुए ही उनकी मां इंद्राणी का सिद्धार्थ दास से अफेयर शुरू हो गया था. ऐसा रिश्ता जिसकी वजह से मेरा और शीना का जन्म हुआ. शीना और मैं एक साथ बड़े हुए. शीना का जन्म 28 फरवरी, 1989 को हुआ और मैं 9 सितंबर 1990 को पैदा हुआ.

 

1990 में जब इंद्राणी ने जब सिद्धार्थ दास से नाता तोड़ा तो शीना महज डेढ़ साल की और मिखाइल गोद में.

 

मिखाइल ने जो कुछ भी बताया वो सच था क्योंकि 17 साल की उम्र में शीना और मिखाइल की मां उन दोनों को छोड़कर अपना करियर बनाने कोलकाता आ चुकी थी. जांच एजेंसियों ने इंद्राणी से कोलकाता की जिंदगी के बारे में भी सवाल पूछे.

 

आप गुवाहाटी से कोलकाता कब आईं?

इंद्राणी: 1990 में 17 साल की उम्र में मैं गुवाहाटी छोड़कर कोलकाता चली आई. तब मैं सिर्फ 17 साल की थी लेकिन मैं दो बच्चों की मां भी थी. मैंने दोनों बच्चों शीना और मिखाइल को अपनी मां के पास गुवाहाटी में छोड़ दिया. मैंने उनसे बच्चों के माता पिता बनकर परवरिश करने को कहा. मैं उनकी पढाई के लिए पैसे दिया करती थी. मेरे एक बैंक में 1 करोड़ का फिक्स डिपॉजिट था जिसका ब्याज मैं उन्हें गुवाहाटी भेजा करती थी.

 

अब तक आप ये जान चुके होंगे कि जिस शीना बोरा को इंद्राणी दुनिया के सामने अपनी बहन बताती थी वो उसकी बहन नहीं बेटी थी जिसे इंद्राणी ने जिंदगी में बड़ा मुकाम हासिल करने के लिए गुवाहाटी की उस दुनिया में छोड़ दिया था जिसे उसने कभी पलटकर नहीं देखा.

 

12 साल बाद गुवाहाटी उसकी जिंदगी में क्यों और कैसे लौटा?  

शीना बोरा की हत्या से कैसे जुड़ा है कोलकाता का कनेक्शन.

 

शीना हत्याकांड की साजिश के तार कोलकाता की इन गलियों से भी जुड़ते हैं क्योंकि कोलकाता से जुड़ी हुई है इंद्राणी की पिछली जिंदगी. इतना ही नहीं यहीं रहता है शीना की हत्या में इंद्राणी की मदद करने वाला आरोपी संजीव खन्ना.

 

दरअसल शीना हत्याकांड में पुलिस ने इंद्राणी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया

पहली आरोपी – इंद्राणी

दूसरा आरोपी- इंद्राणी का पहला पति संजीव खन्ना

और तीसरा आरोपी- ड्राइवर श्याम

 

संजीव खन्ना और इंद्राणी के रिश्ते की शुरुआत कोलकाता में हुई थी क्योंकि अपने दोनों बच्चों शीना और मिखाइल को भुलाकर वो एक नई जिंदगी शुरू करने का फैसला कर चुकी थी.

 

पहले पति संजीव खन्ना से मुलाकात कब और कहां हुई?

इंद्राणी: कोलकाता आने के तीन साल बाद 1993 में तोलीगंज के एक होटल में मेरी और संजीव की मुलाकात हुई. उसी साल हमारी शादी हुई और चार साल बाद 1997 में विधि का जन्म हुआ.

 

जिंदगी चल पड़ी थी. इंद्राणी और संजीव और उनकी बेटी विधि कोलकाता में एक आम परिवार की तरह रह रहे थे लेकिन इंद्राणी के दिमाग में कुछ और खिचड़ी पक रही थी. उसे जो जिंदगी में चाहिए था वो संजीव के पास नहीं मिल सकता था.

 

अपने सपनों को पूरा करने के लिए इंद्राणी ने एक और फैसला किया वो संजीव के साथ ही मुंबई आ गई थी लेकिन सपनों के शहर मुंबई आने के बाद भी संजीव और इंद्राणी का रिश्ता नहीं बच पाया क्योंकि इंद्राणी बहुत तेज चल रही थी संजीव कदम नहीं मिला पाया.

 

संजीव खन्ना से तलाक क्यों लिया ?

इंद्राणी: विधि के पैदा होने के बाद से घर का माहौल ठीक नहीं था. संजीव ठीक से कमाता नहीं था और मैं भी अपने करियर में आगे नहीं बढ़ पा रही थी. 2001 में हम दोनों मुंबई भी आए लेकिन कुछ नहीं बदला. इसके बाद हमने अलग होने का फैसला कर लिया. उसी साल 2001 में हमारा तलाक हो गया. विधि की कस्टडी को लेकर हमारे बीच बहुत झगड़े हुए लेकिन पीटर की मदद से मुझे विधि की कस्टडी मिली.

 

इस सवाल का जवाब भी इंद्राणी ने जांच एजेंसियों को दिया कि साल 2001 में तलाक लेने के बावजूद इंद्राणी की जिंदगी में संजीव खन्ना की मौजूदगी इंद्राणी की जिंदगी हमेशा क्यों बनी रही औऱ वो इंद्राणी की अपनी ही बेटी की हत्या करने की साजिश में शामिल क्यों हुआ?

 

शीना बोरा के कत्ल को तब अंजाम दिया गया था जब इंद्राणी कोलकाता और अपने पहले पति संजीव खन्ना से नाता तोड़ चुकी थीं. अब उनकी नई दुनिया थी मुंबई जहां उन्होंने स्टार इंडिया के सीईओ पीटर मुखर्जी से शादी कर ली थी और वर्ली के मार्लो हाउस में नई गृहस्थी बसा ली थी. इंद्राणी ने जांच एजेंसियों को अपनी जिंदगी के इस हिस्से की कहानी भी सुनाई है.

 

इंद्राणी की जिंदगी में आखिरकार वो दिन भी आया जब उनकी बरसों पुरानी चाहत तो मंजिल मिल गई. यानी वो पैसा, शोहरत और इज्जत जिसके लिए इंद्राणी ने एक के बाद एक रिश्तों की बलि चढ़ाई थी.

 

इंद्राणी ने जो चाहा वो सब कुछ इंद्राणी के कदम चूम रहा था. और इसकी इकलौती वजह थे पीटर मुखर्जी. स्टार इंडिया के पूर्व सीईओ पीटर जो इंद्राणी का तीसरा प्यार थे और दूसरे पति बने.

 

इंद्राणी ने जांच एजेंसियों को ये भी बताया कि पीटर के साथ शादी के बाद उनका करियर कैसे चमक गया. और उन्होंने वो आईएनएक्स मीडिया कंपनी कैसे बनाई जिसकी वो खुद सीईओ थीं और पीटर मुखर्जी उसका हिस्सा.

 

इस नए रिश्ते ने इंद्राणी के दिल में पल रही सारी महात्वाकांक्षाए तो पूरी की लेकिन निजी जिंदगी और उलझ गई थी. इंद्राणी की ये दूसरी शादी थी तो वहीं पीटर की भी ये दूसरी शादी थी. पीटर की पहली शादी से एक बेटा राहुल भी था. यानी अब इंद्राणी की नई जिंदगी का नक्शा कुछ ऐसा हो चुका था.

 

पीटर की पहली शादी से बेटा राहुल

इंद्राणी की अपनी पहली शादी से बेटी विधि

और गुवाहाटी में नाना-नानी के पास पल रहे दो बच्चे शीना और मिखाइल

 

मामला तब उलझ गया जब शीना और राहुल जो रिश्तों की इस कहानी में सौतेले भाई बहन थे एक दूसरे के प्यार में पड़ गए. इंद्राणी ने पुलिस से इस रिश्ते का भी खुलासा किया है.

 

इंद्राणी बोरा ने रिश्ते बनाए और फिर तोड़ दिए. इंद्राणी बोरा शहर दर शहर नई दुनिया बसाती रही और उसे उजाड़ती भी रही लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि वो एक दिन अपनी ही बेटी की कातिल भी बन जाएगी. शीना बोरा के कत्ल की गुत्थी अब इंद्राणी के कबूलनामे ने सुलझा दी है. सबसे पहले आपको बताते हैं कि जब इंद्राणी मुंबई में अलग दुनिया बसा चुकी थी और बेटी शीना बोरा अपने भाई मिखाइल के साथ गुवाहाटी में नाना नानी के घर पर रह रही थी तो फिर ऐसा क्या हुआ कि इंद्राणी मुखर्जी की जिंदगी में शीना बोरा की एंट्री दोबारा हो गई.

 

शीना और मिखाइल तो गुवाहाटी में थे आपकी जिंदगी में उनकी एंट्री कैसे हुई?

इंद्राणी: 1990 के बाद से मैं उनसे नहीं मिली थी. लेकिन साल 2002 में पीटर से शादी करते ही मैं एक सेलिब्रिटी बन गई थी. अक्सर मेरी तस्वीरें अख़बारों, वेबसाइट पर या मैगजीन में छपती थी. तभी साल 2004 में शीना और मिखाइल ने मेरे बारे में पढ़ा. और दोनों ने मुझे स्टार इंडिया के पते पर खत लिखना शुरू किया. पहली बार उनका खत देखकर मैं डर गई थी कि अगर इन्होंने किसी तरह पीटर को भी खत लिखकर मेरे बारे में बताया तो मुश्किल हो जाएगी. मैंने साल 2004 में शीना और मिखाइल को मुंबई बुलाया. उन्हें मुंबई के ओबेरॉय होटल कुछ दिन ठहराया. मैंने उन्हें समझाया कि वो मुझे मां नहीं बल्कि दीदी या बहन बुलाये. इस पर मिखाइल ने ऐतराज़ जताया लेकिन मेरे जोर देने पर वो भी मान गया. मैंने उन्हें अपने कंट्रोल में रखने के लिए पैसों का लालच दिया और उन्हें विदेश भी घुमाया. 2004 में मैंने शीना, मिखाइल और मेरे माता-पिता को सिंगापुर भी भेजा. मैंने शीना को मुंबई बुलाया और मिखाइल को गुवाहाटी में पढ़ाया. पीटर की मदद से मैंने शीना का मुंबई के सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज में एडमिशन करवाया. शीना को मैंने कोलाबा के एक पीजी में रखा और बीच-बीच में उसे बहन बताकर वर्ली के घर में भी रखा. इसी दौरान राहुल और शीना एक दूसरे के करीब आए.

 

हम आपको बता चुके हैं कि राहुल दरअसल पीटर मुखर्जी की पहली शादी से हुआ बेटा था. जो अब अपने ननिहाल देहरादून में रहता है लेकिन पीटर ने इंद्राणी से दूसरी शादी के बावजुद राहुल को कभी खुद से दूर नहीं किया था. जिस दौरान शीना मुंबई आई थी उस दौर में राहुल भी मुंबई में ही था और वहीं दोनों के रिश्ते परवान चढ़ रहे थे.

 

क्या राहुल और शीना लिव-इन में रह रहे थे ?

इंद्राणी: राहुल और शीना की मुलाकात 2007-08 में वर्ली के हमारे घर पर हुई थी. राहुल हमारे साथ ही रहता था और शीना कभी-कभी वहां आया करती थी. दोनों में प्यार हुआ लेकिन मेरे डर से उन्होंने कभी कबूल नहीं किया. मुझे इस बात का पता चला तो मैंने पीटर से कहकर दोनों को अलग करने का सोचा. पीटर ने राहुल को वर्ली के घर से निकालकर बांद्रा के एक किराये के फ्लैट में भेजा तो इन दोनों के मिलने का रास्ता साफ़ हो गया. ये दोनों अक्सर मिलते और साथ रहते. मुझे पता नहीं चले इसीलिए हर 7 या 8 महीने में घर भी बदलते रहते थे.

 

इस रिश्ते ने इंद्राणी के दिल में एक डर पैदा कर दिया. जांच एजेंसियों को उसने बताया कि उसे लगता था कि पीटर मुखर्जी को उसका ये झूठ पता चल जाएगा कि शीना उसकी बहन नहीं बल्कि बेटी है.

 

राहुल और शीना के रिश्ता का विरोध क्यों था?

इंद्राणी: मुझे डर था की शीना और राहुल की अगर शादी हो गई तो शीना मेरी मुश्किल बढ़ा देगी और मेरे राज़ सब को पता चल जाएंगे. 

 

हुआ भी वही. आपका अपना चैनल एबीपी न्यूज आपको बता भी चुका है कि जो राज इंद्राणी छिपाना चाहती थीं वो उसके मौजूदा पति पीटर मुखर्जी को पता चल गई थी. दरअसल शीना ने खुद पीटर मुखर्जी से कहा था कि वो इंद्राणी की बेटी है लेकिन इंद्राणी ने किसी तरह पीटर को समझा दिया था कि शीना झूठ बोल रही है. इंद्राणी के दिल में तभी से शीना को लेकर एक डर पलने लगा था. 

 

अब अगर आप ये सोच रहे हैं कि सिर्फ राज छिपाने के डर ने इंद्राणी को शीना बोरा का कातिल बनने पर मजबूर कर दिया तो ये पूरा सच नहीं है. इंद्राणी ने जांच एजेंसियों के सामने हत्या का जो मकसद बयां किया है वो भी कम चौंकाने वाला नहीं है लेकिन पहले पढ़िए हत्या की साजिश की पूरी कहानी.

 

शीना बोरा की हत्या 25 अप्रैल 2012 को की गई. साल 2012 तक शीना बोरा और उसकी मां इंद्राणी के रिश्ते कड़वाहट से भर चुके थे. इंद्राणी उसे राहुल से अलग करना चाहती थी. ऐसे में शीना ने इंद्राणी से बात तक करना बंद कर दिया था. इंद्राणी ने अपने कबूलनामे में बताया है कि इन हालात में उसने शीना को हत्या की जगह यानी वर्ली के मार्लो हाउस में कैसे बुलाया.

 

क्या आपने अपनी बेटी शीना की हत्या की है?

इंद्राणी: हां

 

इस हत्या में और कौन- कौन शामिल है?

इंद्राणी: मेरे पहले पति संजीव खन्ना और ड्राइवर श्याम राय.

 

शीना की हत्या कैसे की थी?

इंद्राणी: हत्या की प्लानिंग हमने बहुत पहले कर ली थी. मैं, पीटर और विधि लंदन में ब्रिस्टल में थे. मैंने पीटर के सामने भारत आने के लिए काम और शीना के एडमिशन का बहाना बनाया और अकेले मुंबई आ गई. हत्या से पहले शीना का भरोसा जीतना जरूरी था क्योंकि क्यूंकि शीना और मेरे बीच रिश्ते अच्छे नहीं थे. हत्या से करीब 15 दिन पहले मैंने शीना को डिनर के लिए बुलाया था. वो आने के लिए तैयार हो हई और फिर हमने उस दिन बांद्रा के होटल ताज लैंड्स एंड में डिनर किया.  उस दिन मैंने शीना से कहा कि मुझे तुम्हारा और राहुल का रिश्ता मंजूर है. फिर हमारी बातचीत होने लगी. मैंने 22 तारीख को ड्राइवर श्याम राय से वर्ली केएएम मोटर्स से किराये पर गाड़ी मंगवाई. संजीव को 24 अप्रैल की सुबह मुंबई बुलाया और उसे घर के सामने होटल हिलटॉप में रुकवाया. प्लान के मुताबिक मैंने वर्ली से बेहोशी की दवा ली और दादर से सूटकेस.  24  अप्रैल को संजीव मुंबई पहुंचा और हमने बातचीत करके प्लान आगे बढ़ाया.

 

 

इंद्राणी के कबूलनामे के मुताबिक 24 अप्रैल साल 2012 तक हत्या की पूरी साजिश रची जा चुकी थी. अब साजिश को अंजाम तक पहुंचाना था. सबसे बड़ी मुश्किल ये थी आखिर शीना बोरा को जाल में कैसे फंसाया जाए? इंद्राणी ने इसका भी हल खोज लिया था.

 

इंद्राणी: उस दिन दोपहर को मैंने शीना को फोन किया और उसे बांद्रा के बांद्रा नेशनल कॉलेज के पास बुलाया. शाम को करीब 6.30 से 7 बजे के बीच मैं, संजीव और ड्राइवर श्याम राय गाड़ी लेकर जॉकी के शोरूम पहुंचे, शीना भी आई. मैंने पहले शीना को अमरसन्स शोरूम से एक साड़ी दिलवाई ताकि उसे शक ना हो. शॉपिंग करने के बाद हम गाड़ी में वापस आए तब तक संजीव ने पानी की बोतल में बेहोशी की दवा मिला दी थी. गाड़ी में बैठने के बाद शीना को पानी दिया और कुछ देर बाद दवाई ने असर किया शीना बेहोश होने लगी. शीना के बेहोश होते ही हम नेशनल कॉलेज के पीछे की सुनसान गली में पहुंचे. मैंने और संजीव ने शीना के दुपट्टे से ही उसका गला घोंटा और ड्राइवर श्याम राय ने शीना के पैर पकड़े. शीना को मारने के बाद हम वर्ली के घर पहुंचे. गाड़ी गैराज में लगाई और फिर हम तीनों ने शीना के शव को सूटकेस में डाल दिया और सूटकेस गाड़ी की डिक्की में रख दिया और ड्राइवर श्याम को पहरा देने के लिए कहा.

 

आखिरकार इंद्राणी ने अपनी ही बेटी शीना बोरा की जान ले ली. जांच एजेसी के पास पहले से मौजूद थी इंद्राणी के ड्राइवर श्यामवर राय की गवाही जिसके मुताबिक उसने मुंबई के करीब पेण इलाके में लाश को ठिकाने लगाने में मदद की थी. अब उसी कहानी को दोबारा सुनाने की बारी थी इंद्राणी मुखर्जी की.

 

लाश को ठिकाने कैसे लगाया?

इंद्राणी: उस रात लाश गैराज में ही रखी और अगले दिन 25 अप्रैल की सुबह करीब 4 बजे हम रायगढ़ के पेन के लिए निकले. ड्राइवर श्याम राय और मैंने पेन के गगोदे की उस जगह की रेकी शीना को मारने के एक दिन पहले 23 अप्रैल को ही कर ली थी. इस जगह को मैंने चुना था. क्योंकि कुछ साल पहले गगोदे के एक फॉर्म हाउस पर पार्टी की थी इसलिए मुझे ये जगह याद थी. 23 तारीख को ही रेकी करने के बाद लौटते समय हमने खोपोली के एक पेट्रोल पंप से पेट्रोल भी खरीद लिया था. शीना की लाश सूटकेस से निकालकर मैंने अपने और संजीव के बीच बिठा ली थी. क्योंकि हमने सोचा कि अगर लाश को सूटकेस में डालकर लेकर जायेंगे तो फंस सकते है रस्ते में चेकिंग हुई तो पकड़े जा सकते थे. इसलिए संजीव और अपने बीच शीना को बिठाकर मैंने उसके बाल बनाए, उसके होंठो पर लिपस्टिक लगाई और परफ्यूम भी ताकि किसी को शक न हो. 

 

इंद्राणी के मुताबिक शीना की हत्या रात 10 बजे के करीब की गई थी. और सुबह 4 बजे ही वो शव को गाड़ी में लेकर वर्ली के मार्लो हाउस के लिए रवाना हो गए. हत्या के कम से कम आठ घंटे बाद शव अकड़ जाता है और उसे मनचाही दिशा में मोड़ा नहीं जा सकता लेकिन चूंकि हत्या को सिर्फ पांच छह घंटे ही हुए थे इसलिए शव को गाड़ी में बिठाने में संजीव और इंद्राणी को मुश्किल नहीं पेश आई.

 

इंद्राणी: हम सुबह करीब 5.30 बजे गगोदे की उस जगह पर पहुंचे. लाश को सूटकेस में डाला और नीचे खाई में धकेल दिया. नीचे जाकर सूटकेस पर पेट्रोल डाला और आग लगा दी लेकिन आग लगते ही एक ज़ोरदार धमाका हुआ. धमाके से हम डर गए और वहां से भाग निकले.

 

पुलिस को इंद्राणी की बताई हुई जगह से ही शीना की लाश को ठिकाने लगाने में इस्तेमाल हुआ सूटकेस अधजली हालत में मिला था. इंद्राणी के गुनाह का सबसे बड़ा सबूत था वो सूटकेस. इंद्राणी मुखर्जी ने खुद को बचाने के लिए भी बड़ी चालाकी से योजना तैयार की थी.

 

25 अप्रैल 2012 को इंद्राणी मुखर्जी ने अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के बाद खुद को बचाने के लिए भी बड़ी चालाकी साजिशें रचती रही. जांच एजेंसियों के सामने इंद्राणी ने ये भी बताया कि हत्या के फौरन बाद और फिर उसके तीन साल बाद तक शीना बोरा की गुमशुदगी पर आखिर कैसे पर्दा डाला.

 

लाश को ठिकाने लगाने के बाद क्या किया?

इंद्राणी: हम पेन से सीधे एयरपोर्ट पहुंचे और कोलकाता के लिए रवाना हुए. मैंने ड्राइवर श्याम को किराए पर मंगाई गाड़ी को ठीक से धोकर वापस करने को कहा. अगले दिन यानि 26 अप्रैल को मैंने कोलकाता में संजीव का जन्मदिन मनाया और फिर मैं मुंबई वापस आ गई. पीटर भी लंदन से भारत लौट गए थे. हम छुट्टियां मनाने गोवा गए. मैंने राहुल को भी गोवा बुलाया ताकि कुछ दिनों तक वो शीना की पूछताछ ना कर सके लेकिन उसने आने से इंकार कर दिया था.

 

राहुल तब सामने नहीं आया लेकिन कुछ दिनों बाद ही उसने शीना बोरा की गुमशुदगी की शिकायत मुंबई के वर्ली और बांद्रा थाने में दर्ज करवाई थी. पीटर भी शीना बोरा के बारे में जानकारियां मांगा करते थे लेकिन इंद्राणी ने बड़ी चालाकी से सबको ये समझा दिया कि इंद्राणी अमेरिका जा चुकी है और वहां अपने पैर जमाने के बाद ही सबको संपर्क करेगी. यही नहीं इंद्राणी बीच बीच में शीना के फर्जी ईमेल एकाउंट से मेल करके उसके जिंदा होने के सबूत भी पेश करती रही.

 

क्या आपने शीना के नाम से फर्जी ईमेल अकाउंट भी बनाया था?

इंद्राणी: मैंने अपनी कंपनी में काम करने वाली एक लड़की की मदद से शीना का हॉटमेल अकाउंट बनाया. मैंने उससे कहा कि शीना अमेरिका में है और उसे एक ईमेल अकाउंट की जरूरत है. उसने मेरे कहने पर शीना के नाम का ईमेल अकाउंट बनाया और उसका पासवर्ड मुझे दे दिया. इसका इस्तेमाल करके में शीना बनकर ईमेल किया करती थी. मैं इस ईमेल के जरिए शीना बनकर पीटर, मिखाइल और विधि से बात किया करती थी ताकि किसी को शीना के गायब होने का शक न हो सके.

 

यही नहीं इंद्राणी ने पूछताछ में ये भी बताया कि शीना बोरा के दफ्तर से गायब होने और हत्या हो जाने के बाद उसका इस्तीफा उसके दफ्तर कैसे पहुंचा?

 

शीना बोरा अपनी मां के हाथों कत्ल हुई लेकिन क्यों – ये वो सबसे बड़ा सवाल था जिसका सिरा पकड़ना जांच एजेंसियों के लिए भी टेढ़ी खीर साबित हुआ. लेकिन इंद्राणी ने अपने कबूलना में बता दिया अपनी ही बेटी शीना के कत्ल का असल मकसद.

 

अपनी बेटी शीना को क्यों मारा?

इंद्राणी: शीना मेरी बेटी ज़रूर थी लेकिन वो मुझे ब्लैकमेल करने लगी थी धमकाने लगी थी. शीना को मैं ही मुंबई लेकर आई, पढ़ाया लिखाया लेकिन वो सबकुछ भूलकर मुझे धमकियां दे रही थी. शीना जानती थी कि मैंने पीटर और सारी दुनिया को ये बताया है कि शीना मेरी सौतेली बहन है. सिद्धार्थ दास से मेरे रिश्ते और उस रिश्ते हुए दोनों बच्चों शीना और मिखाइल के बारे में वो सारे राज खोलने की धमकी दे रही थी. मैं वो जिंदगी कब की छोड़ चुकी थी. अपनी मेहनत से इस मुकाम को हासिल किया था और शीना इसी को बर्बाद करने पर तुली थी. मुझे लगा कि अब मुझसे सबकुछ छिन जाएगा. शीना ने पैसे मांगने शुरू कर दिए थे और बांद्रा इलाके में राहुल और अपने लिए एक फ्लैट की डिमांड भी रखी थी. मेरे मना करने के बावजूद उसने राहुल से रिश्ता बनाया. देहरादून में दोनों की सगाई भी हो गई थी. अब वो शादी करने जा रही थी. शीना को ऐसा लगता था की मैंने शोहरत के लिए उन्हें छोड़ा, खुद ऐशो आराम की ज़िन्दगी जी और उन्हें गुवाहाटी में दाने दाने के लिए तरसाया.  लेकिन ऐसा नहीं था उनका पूरा खर्चा मैं ही उठा रही थी. शीना ने मेरी एक नहीं सुनी और फिर मैंने उसे ही मारने की साजिश रच डाली.

 

इंद्राणी मुखर्जी ने उसी पैसे के लिए अपनी बेटी को भी मार दिया जिसके लिए वो सारी जिंदगी रिश्तों से खेलती रही थीं. खूनी खेल की ये साजिश इंद्राणी के दिमाग की उपज थी. जांच एजेसियां अब ये समझना चाहती थीं कि आखिर इंद्राणी से तलाक ले चुके संजीव खन्ना और इंद्राणी के ड्राइवर के पास शीना की हत्या में शामिल होने की क्या वजह थी.

 

संजीव खन्ना और ड्राइवर श्याम राय हत्या में शामिल होने के लिए कैसे तैयार हुए?

तलाक होने के बाद भी मेरी और संजीव की बातचीत होती थी. मैंने संजीव को बताया कि शीना मुझे बहुत परेशान करती है अगर उसकी शादी राहुल से हो गई तो विधि और उसके नाम कुछ नहीं बचेगा. पीटर अपनी सारी प्रॉपर्टी अपने बेटे राहुल और बहू शीना के नाम कर देगा. इतना कहने पर ही संजीव शीना की हत्या में मेरा साथ देने के लिए मान गया. श्याम राय मेरा वफादार ड्राइवर था. मैंने उसे कई बार बड़ी रकम दी थी, मैंने उसे भी शीना से हो रही तकलीफ के बारे में बताया मेरी मुश्किलों के बारे में जानकर वो भी मेरा साथ देने के लिए तैयार हो गया. मैंने दोनों को इस काम के लिए कोई पैसे भी नहीं दिए थे.

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Web Title: indrani mukherjee
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