नेशनल हेरल्ड : जानिए क्या है मामला, अबतक क्या हुआ

By: | Last Updated: Saturday, 19 December 2015 1:57 PM
Information about National Herald Case

नई दिल्ली : पिछली पेशी के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी को पेशी से फौरी राहत मिली थी. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने अगली सुनवाई यानी 19 दिसंबर को नेशनल हेरल्ड केस में शामिल सभी नेताओं को कोर्ट में पेश होले का आदेश दिया था.

सुनवाई के दौरान सोनिया राहुल के वकील ने दलील देते हुए कहा कि उनको हाइकोर्ट के सोमवार के फैसले की कॉपी देर शाम मिली इसी वजह से आज सुनवाई के दौरान वह आ नहीं पाये लिहाज़ा आज उनको पेशी से छूट दे दी जाए. साथ ही भरोसा दिलाया की मामले की अगली सुनवाई के दौरान वो अदालत में पेश होंगे. आपको बता दें पटियाला हाउस कोर्ट ने सोनिया राहुल पेश होने का आदेश दिया था जिसके खिलाफ कांग्रेस हाई कोर्ट गई थी. हाई कोर्ट ने कांग्रेस की अपील खारिज कर दी थी.

नेशनल हेरल्ड की कहानी ?

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 9 सितंबर 1938 को लखनऊ में द नेशनल हेरल्ड अखबार की शुरुआत की थी. उस समय एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड ने नेशनल हेरल्ड के साथ हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज अखबार की भी शुरुआत हुई थी.

पंडित नेहरू नेशनल हेरल्ड अखबार के पहले संपादक थे और देश के पहले प्रधानमंत्री बनने तक वो नेशनल हेरल्ड बोर्ड के चेयरमैन भी रहे. कांग्रेस का मुखपत्र माना जानेवाला नेशनल हेरल्ड शुरू से आर्थिक संकट को झेलता रहा और 1977 में इंदिरा गांधी की हार के बाद दो साल तक अखबार बंद भी रहा था.

1986 में भी ये अखबार बंद होने के कगार पर पहुंच गया था लेकिन तब के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने आर्थिक मदद देकर इसे बंद होने से बचाया था. बाद में भारी घाटे की वजह से ये अखबार 1 अप्रैल 2008 को पूरी तरह बंद हो गया. उसी के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने इसे 90 करोड़ का कर्ज दिया था.

क्या है नेशल हेरल्ड मामला?
नेशनल हेरल्ड केस की नींव साल 2008 में पड़ी जब नेशनल हेरल्ड अखबार को चलानेवाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड पर 90 करोड़ का कर्ज चढ़ गया था और इस कर्ज की वजह से अखबार को बंद करना पड़ा. एजीएल को ऋणमुक्त करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व ने पार्टी कोष से 90 करोड़ का कर्ज दिया.

कर्ज देते वक्त सोनिया गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष थीं और उस समय सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज ने मिलकर पांच लाख की राशि से एक नई कंपनी यंग इंडिया बनाई. इस कंपनी में सोनिया और राहुल गांधी की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी थी और बाकी दोनों नेताओं की 12-12 फीसदी हिस्सेदारी थी.

यंग इंडिया ने एसोसिएटेड जर्नल्स का कर्ज चुकाने के लिए शर्त रखी थी कि 90 करोड़ के कर्ज के बदले एसोसिएटेड जर्नल्स 10-10 रुपये कीमत के 9 करोड़ शेयर यंग इंडिया के नाम करेगा. 9 करोड़ के शेयर एसोसिएटेड जर्नल्स की कुल संपत्ति के 99 फीसदी के बराबर थे.

इस सौदे की वजह से सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कंपनी यंग इंडिया को एसोसिएटेड जर्नल्स की संपत्ति का मालिकाना हक मिल गया. इसी सौदे को आधार बनाकर सुब्रमण्यम स्वामी ने साल 2012 में सोनिया और राहुल गांधी के खिलाफ धोखाधड़ी और दूसरे मामलों के तहत कोर्ट में याचिका दायर की.

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