प्रधानमंत्री ने देश में बना सबसे बड़ा युद्धपोत INS कोलकाता देश को सौंपा

By: | Last Updated: Saturday, 16 August 2014 2:20 AM
INS Kolkata’s inducted, PM says military might best deterrent

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वदेश निर्मित सबसे बड़े युद्धपोत आईएनएस कोलकाता को राष्ट्र को समर्पित किया. प्रधानमंत्री मोदी नौसेना को संबोधित करते हुए कहा कि आज तक भारत में रक्षा के क्षेत्र में देश में जितने भी निर्माण हुए हैं, उनमें आईएनएस कोलकाता सबसे बड़ा निर्माण है. उद्घाटन से पहले पीएम ने कहा, “आईएनएस कोलकाता नौसेना के माध्यम से राष्ट्र को समर्पित हो रहा है और यह भारत के बुद्धिबल का परिचायक है. हम विश्व को भारत के बुद्धि बल का परिचय दे रहे हैं.”

मोदी ने कहा कि दुनिया को हमारी क्षमता के बारे में पता होगा, तो कोई हमारी तरफ आंख उठाने की हिम्मत नहीं करेगा.”

 

मोदी ने कहा, ‘‘ युद्ध लड़ाना और जीतना इन दिनों इतना कठिन नहीं रह गया है, लेकिन अत्याधुनिक हथियारों से लैस आधुनिक सेना ही युद्ध के खिलाफ गारंटी है. जब हम सक्षम होंगे, कोई हमें चुनौती देने का साहस नहीं कर सकता.’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब लोगों को हमारी सैन्य क्षमता का आभास होगा तब कोई हमारे देश पर दुष्टतापूर्ण नजर रखने का साहस नहीं कर सकता.’’ वैश्विक कारोबार और वाणिज्य को तेजी से बढ़ाने के लिए नौवहन सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वृहद तटीय क्षेत्र होने के कारण भारत इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘ आने वाले दिनों में आईएनएस कोलकाता नौवहन कारोबार में शामिल लोगों में भरोसा जगायेगा.’’ विध्वंसक पोत के निर्माण को भारत के तकनीशियनों, इंजीनियरों और सुरक्षा विशेषज्ञों की बड़ी उपलब्धि करार देते हुए मोदी ने कहा कि सरकार प्रतिरक्षा बलों के आधुनिकीकरण को प्रतिबद्ध है ताकि ‘हमारे जवानों को नहीं लगे कि किसी कमी के कारण वे हमारे देश की सुरक्षा में पीछे रह रहे हैं.’

 

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ जब मैं आईएनएस कोलकाता को राष्ट्र को समर्पित कर रहा हूं तब मुझे विश्वास है कि यह हमारे सैन्य कौशल को बढ़ावा देगा और हमारे सैनिकों में विश्वास जगायेगा.’’ रक्षा क्षेत्र में 49 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश : एफडीआई : की अनुमति देने के निर्णय का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि सरकार ने बजट में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय किए हंै और रक्षा क्षेत्र को उन्नत बनाने और वैश्विक प्रौद्योगिकी लाने को प्राथमिकता दी है. दुनिया के सर्वश्रेष्ठ हथियार एवं उपकरण निर्माताओं को भारत में सुविधा स्थापित करने के लिए बुलाया जायेगा और आने वाले समय में देश रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकेगा.

 

मोदी ने कहा, ‘‘ छोटी वस्तुओं (सैन्य हार्डवेयर) का आयात करने की बजाए हम चाहते हैं कि अगले कुछ वषरे में भारत इन उपकरणों का निर्यातक बने.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ बदलती दुनिया में केवल सैन्य शक्ति ही नहीं बल्कि ‘बुद्धि बल’ भी महत्वपूर्ण है. विध्वंसक को पेश करना भारत की बौद्धिक क्षमता का सबूत है.’’ वषरे से भारत की नौसैनिक क्षमता के निर्माण का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ जब मैं महाराष्ट्र के तट पर खड़ा हूं और नौसेना के बारे में बोल रहा हूं, तब स्वाभाविक रूप से छत्रपति शिवाजी की याद आती है. भारत के नौवहन हितों को सुरक्षित बनाने के लिए नौसेना की उत्पत्ति और इसकी अवधारणा में उनका प्रथम योगदान था.’