'असहिष्णुता' पर उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने फिर जताई चिंता

By: | Last Updated: Wednesday, 18 November 2015 3:32 AM

नई दिल्ली : उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने  कहा है कि विविधता और असहमति के प्रति बढ़ती असहिष्णुता चिंता का विषय है. उपराष्ट्रपति अंसारी ने समानता, न्याय और सशक्तीकरण को लेकर सामाजिक तौर पर आम सहमति बनाने की वकालत की है. अंसारी ने कहा कि मानवाधिकार के लिए सम्मान में विविधता की स्वीकार्यता भी शामिल है.

 

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अंसारी ने कहा, यही कारण है कि भारतीय संविधान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा का प्रावधान है. सामाजिक नवाचार इसलिए सौहार्द, स्थिरता और समाज में व्याप्त सुरक्षा के स्तरों से जुड़ जाता है. समानता, सशक्तीकरण और न्याय लोकतांत्रिक समाज के बुनियादी मूल्य हैं.

 

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उल्लेखनीय है कि देश में कथित असहिष्णुता को लेकर काफी बयानबाजी हो रही है. एक वर्ग सरकार पर असहिष्णु होने का आरोप लगा रहा है तो सरकार की ओर से इसे खारिज किया जा रहा है. कैबिनेट मंत्री अरुण जेटली ने बयान दिया है कि असहिष्णुता पर चर्चा बेमानी है जबकि एक अन्य मंत्री वी.के. सिंह ने कहा है कि पैसा देकर यह चर्चा कराई जा रही है.

 

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Web Title: Intolerance of Diversity, Dissent Reason for Concern: Vice President
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