ABP न्यूज की खबर पर हरजीत की मुहर, सभी 39 भारतीयों को IS ने मारी गोली

By: | Last Updated: Thursday, 14 May 2015 11:21 AM
IS had killed 39 indians!

नई दिल्ली: हरजीत मसीह मीडिया के सामने आया और पूरी कहानी बताई. हरजीत मसीह ने कहा कि आईएस ने हमें किडनैप किया था. हरजीत मसीह इराक में आईएस के कब्जे से भागा था. इराक के इरबिल के आतंकी संगठन ISIS के जरिए अगवा किए गए हरजीत मसीह भारत लौट आया है.

 

हरजीत मसीह की जुबानी आईएस की पूरी करतूत.. उस वक्त की पूरी कहानी

हम कंपनी में काम कर रहे थे वहां थोड़ी गड़बड़ हो गई. हमने कंपनी में काम करने वालों से पूछा कि यहां क्या हो रहा है वो बोले कि कुछ नहीं. एक दो दिन में खत्म हो जाएगा. सभी कंपनी वाले वहां से भाग गए और बस हम और बांग्लादेशी लोग वहां रह गए. दो तीन दिन बाद ISIS वाले हमारे कंपनी के पास आए. वहां आकर हमें किडनैप कर लिया.

 

पहले तो वो बोले तुम्हे कुछ नहीं होगा तुम्हे सुरक्षित तुम्हारे घर पहुंचा देंगे. रात 8-9 बजे के करीब फिर आए और बोले तैयार हो जाओ तुम्हे तुम्हारे देश में छोड़कर आना है. हम सब तैयार होकर इनके साथ इनकी गाड़ी में चले गए.

 

उन्होंने हमें एक बिल्डिंग में ले जाकर खड़ा कर दिया. वहां दो लॉन्चर हमारे ऊपर गिरे लेकिन हम वहां से भागे. ISIS वाले भी हमारे साथ भागे. बांग्लादेशी भी हमारे साथ थे. 40 भारतीय थे और 50 बांग्लादेशी थे. फिर उन्होंने हमें एक सुरक्षित जगह रख दिया. पासपोर्ट का इंतजार करते-करते पूरी रात गुजर गई. सुबह हमने पूछा कि हमारे पासपोर्ट कहां है हमें भेज दो यहां हमें खतरा है.

 

फिर अगले दिन शाम को 4 बजे कहा कि बैठो आपको छोड़कर आ रहे हैं हम फिर उनके साथ गाड़ी में बैठ गए. फिर दूसरी जगह ले जाकर एक दूसरे ग्रुप के हवाले कर दिया. हम वहां अपने पासपोर्ट का इंतजार करते रहे. दो दिन हम वहां रुके वो खाना-पीना देते रहे कोई दिक्कत नहीं थी.

 

हमें अपने पास रखा और शाम 4 बजे कहा कि चलो तुम्हे छोड़कर आ रहे हैं तुम्हारे देश में. फिर बोले कि भारतीय एक तरफ हो जाओ और बांग्लादेशी एक तरफ हो जाओ. फिर हमें गाड़ी में बिठाकर ले गए. एक बंद गाड़ी में 40 लोगों को बिठा दिया गया. गाड़ी बंद होने की वजह से सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी. हमने गाड़ी रोकने के लिए भी कहा लेकिन गाड़ी चलती रही. करीब आधे घंटे तक गाड़ी में ही रखा और फिर एक पहाड़ पर ले जाकर उतार दिया.

 

बांग्लादेशी को उन्होंने वहीं छोड़ दिया. बोले पहले भारतीयों को छोड़कर आएंगे फिर बांग्लादेशियों को. पहाड़ पर ले जाकर हमसे कहा कि लाइन में खड़े हो जाओ और जो भी तुम्हारे पास मोबाइल और पैसे हैं सब दे दो. हमने पैसे और एक दो महीने की सैलरी सब दे दी. फिर बोले नीचे बैठ जाओ. नीचे बिठाकर हमारे पीछे खड़े हुए और हमें शूट कर दिया. जब गोली मारी उस वक्त मैं बीच में खड़ा हुआ था. मेरे बगल वाले को गोली लगी और उसकी टांग मेरी पीठ पर आ गई. उन्होंने सब लोगों को गोली मारकर खत्म कर दिया. 15 मिनट तक मैं वहां पड़ा रहा. जब मैंने उठकर देखा तो सारे आदमी वहां पड़े हुए थे. 

 

जो नजारा मैंने देखा उसके बाद मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या देखूं क्या नहीं. कम से कम 2 से 3 मिनट तक फायरिंग हुई थी. जैसे मैं बच गया शायद कोई भी बच गया हो. लेकिन लगता यही कि कोई भी नहीं बचा होगा.

 

मैंने आवाज दी कि मेरी तरह कोई पड़ा होगा तो उठ जाएगा. सब मेरे करीबी दोस्त थे उन सबमें मैं ही सबसे छोटा था. वो सब मुझे प्यार करते थे. लेकिन इतनी हिम्मत नहीं थी कि एक-एक को हिलाकर देखूं कि जान बाकी है या नहीं. जब किसी ने आवाज नहीं दी तो मैं वहां से भागा.

 

मैं वहां से काफी दूर तक भागता रहा. तब मुझे सड़क दिखाई दी. एक टैक्सी से मैंने लिफ्ट मांगी. मैंने उससे कहा कि मुझे इरबिल पहुंचा दो तो उसने कहा कि ये सड़क इरबिल नहीं जाती. मैंने कहा एक रात मुझे अपने साथ ही रख ले. उसने थोड़ी दूर जाकर अपनी गाड़ी को खड़ा कर दिया. और दूसरी तरफ से जो गाड़ी आई उसमें बिठा दिया.

 

उसकी गाड़ी में हथियार थे. मैं बैठने से डर रहा था उसने मुझे धमकाया कि बैठ जा. फिर जिन लोगों ने मुझे गोली मारी थी उन लोगों को ही जाकर दे दिया. वो मुझे पूछने लगे कि तू कौन है कहां से आया है उनको मैंने झूठ बोला कि मैं बांग्लादेशी हूं मेरा नाम अली है मुझसे पासपोर्ट मांगा तो मैंने कहा कि कहीं गिर गया है.

 

मेरे गले में एक धागा था मुझे कहा कि मुसलमान तो ये कुछ नहीं पहनते मैंने उसे तोड़ा और नीचे फेंक दिया. फिर मुझसे पूछा कि तुम्हारे लोग कहां हैं मैंने झूठ बोल दिया कि मेरे लोग कंपनी में हैं.

 

फिर उन्होंने मुझे वहां बिठाया और खाना भी दिया. फिर हाथ पीछे बांधकर एक गाड़ी में बिठाया.  फिर मुझे दूसरी जगह ले गए वहां भी ISIS के लोग थे. वो एक बिल्डिंग में मुझे ऊपर ले गए. वहां कुछ आर्मी और इराक के लोग बंधे हुए थे. उनको देखकर मैं घबरा गया कि वो मुझे भी मार देंगे. उसके बाद फिर वहां से वो मुझे मेरी कंपनी में ले गए.

 

जब मैं अपनी कंपनी में गया तो वहां नजदीक में एक दूधवाला था. रात के 11 बजे थे. उसको मैंने बताया कि मेरे सारे लोगों को मार दिया है. फिर कंपनी का आदमी आया उसने पूछा तो मैंने उसको भी बताया. उसने नाम- ले लेकर पूछा तो मैंने कहा हां सबको मार दिया है उसको मुझ पर विश्वास नहीं हुआ बोला तू झूठ बोल रहा है. फिर मैंने उसे अपनी पैंट उतारकर दिखाई ये देखो मुझे गोली लगी है. उस वक्त खून बह रहा था उसने कहा किसी को मत बताना मैं तुम्हे सुबह इरबिल छोड़ आऊंगा. बोला बांग्लादेशी हैं रूम में उनके पास बैठ जाओ.

 

फिर मैंने बांग्लादेशियों को सारी बात बताई वो भी यही बोले कि तू झूठ बोल रहा है. मैंने बताया कि सबके मोबाइल पैसे सब छीन लिए हैं और सबको मार दिया है मैं किसी तरह वहां से भागकर आया हूं. सुबह हुई तो दुकान वाला दो गाड़ी लेकर आया और कहा कि किसी को कुछ मत बताना बस उन लोगों के बीच में बैठ जाना. मैं उनके बीच में बैठ गया और वो मुझे इरबिल चेकपोस्ट पर छोड़ आया. फिर फौजियों ने हमें दो दिन ब्रिज के नीचे रखा. चेकपोस्ट से भी हम छिपकर भागे.  आगे एक और चेकपोस्ट मिली हम वहां फंस गए. मेरे पास एंबेसी का नंबर था मैंने एंबेसी को फोन किया  अपने घर फोन किया फिर एंबेसी वाले मेरे पास आए. फिर वो मुझे लेकर एंबेसी में चले गए.

 

एक हफ्ते एंबेसी में रखकर पूछताछ करते रहे कि क्या हुआ कैसे हुआ तुम्हारे बाकी आदमी कहां हैं मैंने बता दिया कि सारे लोगों को मार दिया है फिर एक हफ्ते के बाद वो मुझे भारत ले आए. पहले तीन महीने तक ग्रेटर नोएडा में रखा. मैं उनको बोलता रहा मुझे घर भेज दो बोले कि अभी तुम्हे घर नहीं भेजना अभी तुम्हे खतरा है. ISIS तुम्हे ढूंढ रही है तुम्हे उनसे खतरा है तुम्हे मारे देंगे वो.

 

तीन महीने ग्रेटर नोएडा में रखने के बाद दो महीने  के लिए बैंगलोर भेज दिया.

 

सुषमा स्वराज ने कहा कि सरकार किसी भी कोशिश में कमी नहीं कर रही है. अभी हमारे पास 8वां सबूत आया है. मैं अभी भी अपना तलाश जारी रखूंगी. मुझे अभी भी हरजीत मसीह के बयान पर भरोसा नहीं है. भगवान पर भरोसा रखो और सरकार पर भरोसा रखो. एबीपी न्यूज की खबर पर मुहर लगने के बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने सरकार से पूछा है कि अगर अगवा भारतीय जिंदा हैं तो सरकार सबूत पेश करे .

 

अब आपको याद होगा – 27 नवंबर 2014 को एबीपी न्यूज पर हमने खुलासा किया था कि इराक में आईएसआईएस के कब्जे में 40 भारतीयों में से 39 भारतीयों को मारा जा चुका है.

 

ये दावा दो बांग्लादेशियों ने किया था और इन्हें 39 भारतीयों की हत्या की बात जिंदा बचे चश्मदीद हरजीत मसीह ने बताई थी.

 

इस खुलासे के अगले दिन सरकार ने संसद में बताया था कि उनके पास अगवा भारतीयों के जिंदा या मरने के कोई सबूत नहीं है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने तब कहा था कि उनकी खोज जारी है. 145 दिन बीत चुके हैं लेकिन कहां हैं वो 39 भारतीय ये जवाब अब तक नहीं मिला है.

 

करीब 10 महीने पहले खूंखार आतंकवादी संगठन आईएसआईएस ने 92 लोगों का इराक में अपहरण कर लिया था . अपहृत लोगों में थे 40 भारतीय और 52 बांग्लादेशी. आईएसआईएस ने बाद में सभी 52 बांग्लादेशियों को छोड़ दिया था. आईएसआईएस के शिकंजे से छुटे बांग्लादेशियों के हवाले से एबीपी न्यूज ने एक बड़ा खुलासा किया था .

 

अगवा हुए भारतीयों को आईएसआईएस ने मार डाला था. आईएसआईएस के चंगुल से एक मात्र भारतीय निकलने में कामयाब रहा था वो था गुरदासपुर का हरजीत मसीह. भारतीयों के मारे जाने के बारे में हरजीत मसीह ने ही बांग्लादेशियों को बताया था.

 

एबीपी न्यूज के खुलासे के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में कहा था कि हरजीत मसीह के खुलासे को सच मानकर भारत सरकार अगवा भारतीयों की पड़ताल बंद नहीं कर सकती. लेकिन विदेश मंत्री ने ये भी साफ किया था कि न तो अगवा भारतीयों के जिंदा होने के और न ही मारे जाने के सुबूत सरकार के पास है.

 

गायब लोगों के परिवारवाले पूछ रहे हैं कहां हैं उनके लाडले? सरकार के पास अगवा लोगों के बारे में क्या है जानकारी? आखिर वो कौन सा राज है जिसके हरजीत मसीह की जुबान से खुलने से भारत सरकार को डर है ? कहां हैं 39 भारतीय?

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