क्या आलोचकों का मुंह बंद कर पाईं स्मृति?

By: | Last Updated: Thursday, 25 February 2016 4:31 PM
Is Smriti Irani’s speech satisfied critics?

नई दिल्ली: जेएनयू और रोहित वेमुला खुदकुशी केस को लेकर सरकार विरोधियों के निशाने पर है. कल संसद में बहस हुई तकरार हुई. सरकार की ओर से जवाब देने का मोर्चा शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी ने संभाला. स्मृति ईरानी ने करारे तेवर दिखाए. राजनीति के दिग्गजों को ललकारा. न मायावती को बख्शा, न राहुल गांधी को. सरकार और अपने ऊपर लग रहे आरोपों को जवाब स्मृति ने दिया लेकिन सवाल ये है कि क्या आलोचकों का मुंह बंद कर पाईं स्मृति?

स्मृति ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी रोहित वेमुला की मौत पर राजनीति करने गए थे. स्मृति ने पूछा कि जब तेलंगाना आंदोलन में छात्रों की मौत हुई थी तो राहुल क्यों नहीं गए थे?

smriti 2हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित खुदकुशी पर आज राज्यसभा में जबर्दस्त हंगामा हुआ. राज्यसभा में स्मृति ईरानी और मायावती में जोरदार बहस हुई. मायावती ने रोहित की खुदकुशी के लिए शिक्षा मंत्रालय को जिम्मेदार बताते हुए स्मृति ईरानी पर कार्रवाई की मांग की तो स्मृति ईरानी ने उन्हें खुली चुनौती दे डाली.

रोहित वेमुला सुसाइड मामले पर बीएसपी चीफ मायावती बुधवार सुबह से ही राज्यसभा में चर्चा चाहती थीं. इसके लिए उन्होंने नोटिस भी दिया था. बीएसपी सांसद लगातार वेल में आकर नारेबाजी कर रहे थे.

दो दिग्गज महिला नेता- एक मोदी सरकार की ताकतवर मंत्री औऱ दूसरी बीएसपी की अध्यक्ष मायावती. रोहित वेमुला की खुदकुशी पर राज्यसभा में बहस हुई तो दोनों ने एक-दूसरे पर जमकर हमला बोला.

मायावती और स्मृति ईरानी दोनों ने जबर्दस्त तरीके से अपना पक्ष रखा. मायावती ने जब कहा कि रोहित वेमुला की खुदकुशी की जांच करने वाली न्यायिक समिति में कोई दलित भी शामिल हो. तो स्मृति ईरानी ने कहा जांच समिति में दलित शामिल हैं, साथ ही ये भी पूछ डाला कि क्या जिसको मायावती सर्टिफिकेट देंगी वही दलित हैं?

मायावती ने कहा, ”पहले मानव संसाधन विकास मंत्री से एक सवाल का जवाब चाहती हूं कि मामले की जांच करने वाली न्यायिक समिति में कोई दलित सदस्य है या नहीं?” इस पर एचआरडी मिनिस्टर स्मृति ईरानी ने कहा, ”सदस्य चर्चा होने दें और मैं सवाल का जवाब देने को तैयार हूं.”

फिर भी बीएसपी सांसद वेल में आकर नारेबाजी करने लगे. मंत्री ने मायावती से कहा, “मैं आपसे विनम्र निवेदन करती हूं. आप मुझसे जो जवाब चाहती हैं, उन सभी के जवाब दूंगी. मैं आपसे कहती हूं कि यदि आप मेरे जवाब से संतुष्ट न हों, आज इस सभा में कहती हूं, बसपा के एक-एक कार्यकर्ताओं और नेताओं से कहती हूं. यदि आप मेरे जवाब से संतुष्ट न हों तो मैं सिर कलम करके आपके चरणों में रख दूंगी.”

मायावती ने कहा, “मैं केवल सरकार से इतना ही चाहती हूं, जो न्यायिक जांच कमेटी के आदेश दिए गए हैं उनमें दलित को रखना है या नहीं रखना.”

स्मृति ने रोकते हुए कहा, “उस कमेटी में दलित थे, लेकिन आप उसे नहीं मानते. आप यह कहना चाहती हैं कि जांच कमेटी बनी थी उसमें दलित नहीं था. उसमें दलित प्रोफेसर को शामिल किया गया था.” स्मृति ने कहा, ”आप एक मर चुके बच्चे का इस्तेमाल पॉलिटिकल टूल के तौर पर कर रही हैं.”

राज्यसभा में मायावती के समर्थन में कांग्रेस, सीपीएम और जेडीयू ने भी आवाज बुलंद की. साथ ही कई नेताओं ने रोहित वेमुला के साथ जेएनयू विवाद पर भी चर्चा की मांग कर डाली.

राज्यसभा के स्पीकर ने साफ कर दिया है कि जेएनयू विवाद पर चर्चा का नोटिस किसी ने नहीं दिया है इसलिए सिर्फ रोहित वेमुला पर ही बहस होगी. कल भी बहस जारी रहेगी उसके बाद सरकार इस पर जवाब देगी. रोहित वेमुला के बहाने दलित राजनीति का मुद्दा फिर गरमा गया है. अगले साल यूपी में विधानसभा चुनाव के पहले दो दिग्गज महिला नेता फिर आमने-सामने हैं.

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Web Title: Is Smriti Irani’s speech satisfied critics?
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