आतंकी संगठन IS का एड्स बम

By: | Last Updated: Sunday, 23 August 2015 4:23 PM
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नई दिल्ली: हर बार दुनिया के सामने बर्बरता की एक नई कहानी लिखता आ रहा है आतंकी संगठन आईएस. इराक और सीरिया के कई इलाकों में कब्जा जमाने वाला इस्लामिक स्टेट दुनिया के दूसरे हिस्सों तक अपनी दहशत फैलाना चाहता है और इसके लिए आईएस ने एक नया तरीका निकाला है वो तरीका है एड्स बम का. 

 

आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट एड्स बम से दहशत फैलाएगा. इस्लामिक स्टेट एड्स बम के जरिए दुनिया का दहलाएगा. दुनिया के तमाम कोनों तक पहुंचने के लिए एक नहीं पूरे 16 एड्स बम तैयार हैं. क्रूरता की हर हद पार कर चुका ये सुन्नी चरमपंथी संगठन आतंक और दहशत फैलाने के नए-नए तरीके ढूंढता है.

 

और ऐसा ही एक तरीका है एड्स बम

ये एड्स बम आईएस संगठन के वो 16 लड़के हैं जिन्हें एचाईवी इंफेक्शन हो चुका है. कुर्द न्यूज एजेंसी ARA न्यूज के मुताबिक एचआईवी संक्रमित इन 16 लड़ाकों को आतंकी संगठन आईएस आत्मघाती मिशन पर भेजने की तैयारी में जुटा है. मतलब ये कि इन 16 लड़कों को सुसाइड बॉम्बर के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा.

 

सुसाइड बॉम्बर का मतलब समझते हैं आप, शरीर पर बम बांधकर आईएस के लड़ाके दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाएंगे और मामूसों का खून बहाने के लिए अपनी जान देकर आईएस की दहशत का पैगाम पहुंचाएंगे

 

रिपोर्ट में एक सीरियाई सूत्र के हवाले से दावा किया गया है कि एड्स की जांच परीक्षण में जब इन लड़ाकों को पॉजिटिव पाया गया तो उन्हें फिदायीन हमले के लिए भेजने की योजना बनाई जाने लगी.

 

एचआईवी से पीड़ित आईएस ने इन 16 लड़ाकों को पूर्वी सीरिया के मायादीन शहर में एक अस्पताल में रखा गया है. इन सबको एक अलग कमरे में रखा गया है.

 

एचआईवी संक्रमण का शिकार होने वाले इन 16 लड़ाकों में से ज्यादातर विदेशी आतंकी है जिन्होंने दो मोरक्कन महिलाओं के साथ यौन संबंध बनाए थे. लेकिन इससे पहले कि ये पता चल पाता कि दोनों मोरक्कन महिलाओं को एड्स है ये आईएस के 16 लड़ाके एड्स जैसी लाइलाज  बीमारी का शिकार बन चुके थे.

 

रिपोर्ट के मुताबिक एक स्थानीय सीरियाई डॉक्टर के हवाले से ये सामने आया कि आईएस के लीडर ने आदेश दिया कि इन लड़ाकों को शहर के अस्पताल में एक अलग कमरे में रखा जाए. डॉक्टर के मुताबिक दोनों महिला टर्की से भागने में कामयाब हो गईं. क्योंकि उन्हें इस बात का डर था कि आईएस के लड़ाकों को जानलेवा बीमारी देने की वजह से उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा.

 

अब आईएस संगठन ने उस प्रांत में मौजूद तमाम लड़ाकों को एड्स का टेस्ट करवाने का आदेश दे दिया है. आईएस संगठन को लगा होगा कि ट्रेनिंग करके तैयार हुए उनके ये लड़ाके धीरे-धीरे मौत की तरफ बढ़ेंगे और उनके दहशत के कारोबार को आगे बढ़ाने के काम नहीं आएंगे इसलिए सुन्नी चरमपंथी संगठन आईएस ने लड़ाकों की मौत को भी भुनाने का तरीका निकाल लिया है.

 

इस्लामिक स्टेट ने पिछले साल अपने संगठन के उस लड़ाके का सिर काट दिया था जो एचआईवी संक्रमित था. और जिसके संक्रमित खून को एक दूसरे आतंकी को चढ़ाया गया था. लेकिन अब आईएस ने अपनी रणनीति बदल दी है. वो इन्हें एड्स बम बमाकर दुनिया के अलग-अलग कोनों में भेजकर दहशत फैलाने का काम करेगा.

 

अगस्त महीने में खबर आई कि आतंकी संगठन आईएस के मुखिया अबु बकर अल-बगदादी ने एक अमेरिकी महिला कायला म्यूलर को सेक्स स्लेव बना रखा था. बगदादी उसके साथ बार-बार बलात्कार करता था.

 

कायला सीरिया के लोगों की मदद के लिए वहां गई थीं लेकिन आईएस ने उसका अपहरण कर लिया. कायला की मौत हो चुकी है लेकिन यजीदी महिलाओं पर आईएस के जुल्म की खौफनाक कहानियां सामने आती रही हैं. आईएस ने ये वीडियो खुद जारी किया था जहां यजीदी महिलाओं की बोली लगाई जा रही थी.

 

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