खौफनाक शपथ: भारत में कैसे अपना नेटवर्क बना रहा है IS?

ISIS plan for india?

नई दिल्ली: कुख्यात आतंकी संगठन आईएसआईएस अपने सगंठन में युवाओं की भर्ती से पहले एक खौफनाक शपथ दिलाता है. ये शपथ होती है संगठन के मकसद के लिये अपनी जान को कुर्बान कर देने की, आईएस के दुश्मनों से लडने की. जो भी युवक इस शपथ को लेते हैं, आईएस उन पर पूरी तरह से भरोसा करता है, लेकिन शपथ तोडने वालों का अंजाम मौत से कम नहीं होता. नफरत की इस शपथ को आतंकी बैथ कहते हैं.

अरबी जुबान में इसे बैथ कहते हैं. हाल ही में अलग अलग सुरक्षा एजेंसियों ने भारत के कई इलाकों में कार्रवाई करते हुए आईएसआईएस के लिये काम करने वाले डेढ दर्जन लोगों की धरपकड़ की जिन्होंने इसी तरह से बैथ यानी कि शपथ ली थी. इनमें सबसे प्रमुख था मुंबई के पास मुंब्रा इलाके से पकड़ा गया मुद्ब्बिर शेख. मुद्दबिर शेख और उसके साथियों से पूछताछ में ये पता चला कि आईएस भारत के बारे में क्या सोच रहा है, भारत में कैसे अपना नेटवर्क बना रहा है और उसके काम करने का तरीका क्या है?

बैथ लेने का मतलब क्या है और कौन लेता है मौत की शपथ ये जानने से पहले ये समझना जरूरी ही कि आईएस का इंडिया मिशन क्या है? किस तरह से वो भारत के युवाओं को अपनी क्रूर सोच के साथ जोड रहा है? हमने जब इसकी पडताल की तो कई डरावने सच सामने आये?

भारत में आईएसआईएस किस हद तक घुस्पैठ कर चुका है उसका सबूत हैं उससे जुडने वाले करीब 20 युवकों की देश के अलग अलग इलाकों से गिरफ्तारी जिन्होंने आईएस की बैथ ली थी. आईएस न केवल भारत बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप के बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी अपना नेटवर्क खडा कर रहा है. इसके लिये उसने इन देशों में पहले से सक्रीय कट्टरवादी संगठनों से हाथ मिलाया है और अब उनके सदस्यों की भर्ती कर रहा है जैसे भारत में इसने आंतकी संगठन इंडियन मुजाहीदीन से हाथ मिलाया है, अफगानिस्तान में तालिबान लडाकों को ये भर्ती कर रहा है और पाकिस्तान में जैश ए मोहम्मद के सदस्य आईएस से जुड रहे हैं.

डॉ शाहनवाज़,
शफी अरमार,
सुल्तान अरमार
ये वो कुछ चेहरे हैं जो भारत में आईएस की नींव डाल रहे थे.

डॉ. शाहनवाज आलम पर इंडियन मुजाहीदीन से जुडकर भारत में कई आतंकी हमलों की साजिश में शामिल होने का आरोप है. दिल्ली के बाटला हाऊस में साल 2008 में हुए एनकाउंटर के दौरान शाहनवाज पुलिस की गिरफ्त में आने से बच निकला था. इसके बाद वो शफी अरमार और सुलतान अरमार के संपर्क में आया. ये दोनों भी आईएस के सदस्य थे. साल 2008 में जब इंडियन मुजाहीदीन के कई बड़े आतंकियों की धरपकड़ हुई तो ये तीनों दुबई भाग गये और वहां से पाकिस्तान पहुंचे. कुछ साल तक इन्होंने पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर स्थानीय आतंकी गुटों के साथ ट्रेनिंग की और अब भारत में आईएस का जाल बिछाने की साजिश रच रहे हैं.

शफी और सुल्तान ने आय एस के लिए काम शुरू किया तो शाहनवाज़ जैसे दुसरे आतंकी की भी आय एस में आरमार भाइयों के साथ जुड़ गए और तभी मिशन इंडिया के लिए बनाया गया ‘अंसार उल तौहीद’ जो भारत में आय एस का जाला फ़ैलाने में जुट गया और इसमें शामिल हुए इंडियन मुजाहिदीन और सिमी से जुड़े लोग.

अरमार भाईयों की ओर से बनाये गये इस ग्रुप ने अपना काम शुरू किया. सबसे पहले खाडी देशों में बसे भारतियों को जोडने की कोशिश शुरू हुई. इसके लिये मदद ली गई इंटरनेट की.

ग्रुप की ओर से इसालाम धर्म का प्रचार करने वाली वेबसाईट्स, हजारों फेसबुक पेज और टिव्टर हैंडल बनाये गये. जो भी लोग इन साईट्स से जुड़ते उन पर नजर रखी जाती. चैट के जरिये टटोला जाता कि क्या वे आईएस की विचारधारा से जुडने के काबिल हैं? जिन लोगों को चुना जाता उनसे इस ग्रुप के सदस्य सीधे संपर्क करते. जब एक बार इस बात का पक्का विश्वास हो जाता कि संपर्क में आया हुआ युवक उनके मकसद से जुड़ सकता है तो फिर उसके लिये भर्ती की अगली प्रक्रिया शुरू होती.

दूसरा पडाव होता है इस व्यक्ति से संपर्क करना. ये लोग मौलाना, मुफ़्ती बनकर इन लोगों से चैट करकेउनका ब्रेनवाश करते. उनको ऐसे वीडियो और तस्वीरों के लिंक भेजे जाते जिससे उनके मन में ये कहकर नफरत भरी जाती कि उनकी कौम पर कितना अत्याचार हो रहा है. इसके बाद ये महिला या लड़की बनकर उन्हें अपने प्यार या शादी के जाल में फंसाते है. जब वो शख्स इनके जाल में फंस जाता है तब ये लोग अपने प्लान को अंतिम पडाव पर ले जाते है यानी उस शख्स से आमने सामने मुलाकात करते हैं.

इसके बाद नये जुडे सदस्यों को आपस में मिलवाया जाता. उन्हें बताया जाता कि उनकी जैसी सोच वाले कई और भी लोग हैं जो कि जिहाद के लिये तैयार हैं. नई भर्ती हुए युवकों को 3-4 सदस्यों का गुट बनाकर अलग अलग सेल में बांट दिया जाता. अगर मुद्ब्बिर की कहानी को ही देखें तो पता चलता है कि वो खुद भी इसी तरह से आईएस का आतंकी बना.

पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर मुदब्बिर शेख अपने परिवार के साथ खुशहाल ज़िन्दगी जी रहा था लेकिन देश में हुए कुछ दंगों ने मुदब्बिर के मन में नफरत की भावनाएं पैदा कर दी. इस्लाम धर्म को मानने वाला मुदब्बिर साल 2014 में ऑनलाइन आर्टिकल्स पढ़ते पढ़ते आईएस द्वारा बनाई गयी वेबसाइट पर जा पहुंचा. मुदब्बिर का प्रोफाइल देखकर आरमार भाइयों ने ये तय किया मुदब्बिर को इस नेटवर्क में शामिल किया जाये. मुदब्बिर के मन में पैदा हुई नफरत की भावनाओं को और मजबूत किया गया. इसके लिये कभी किसी धर्मगुरु के साथ उसकी चैट करवाई गई तो कभी शफी और सुलतान ने खुद उसके साथ वीडियो चैट किया. मुदब्बिर का विश्वास जीतने के लिए मुंबई के मज़गांव से गिरफ्तार खान मोहम्मद हुसैन और उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से गिरफ्तार खालिद उर्फ़ रिज़वान से उसकी मीटिंग भी कराई गयी ताकि इन तीनों को ये एहसास हो की वे अकेले नहीं हैं बल्कि मिलकर ये लड़ाई लड़ने जा रहे हैं.

मुदब्बिर की तरह ही खान मोहम्मद हुसैन और खालिद उर्फ़ रिज़वान को आरमार भाइयों ने आईएस में शामिल करने के लिए ऑनलाइन वेबसाइट और वेबपेज का सहारा लिया. इन तीनों को बर्गला ने के लिए सीरिया में बैठे आतंक के आकाओं ने कई सारे वीडियो भी भेजे जिन में से एक था कंधार टू दिल्ली. ये वीडियो शफी अमर ने भारत के मुस्लिम नौजवानों को उकसाने के लिए बनाया था. शफी इन दोनों से ट्रिलियन, शुअर स्पॉट एयर स्काइप जैसे वेबसाइट पर वीडियो चैट करके निर्देश देता था जिसमें इन दोनों को सबसे पहले काम दिया गया भारत में आईएस का नेटवर्क बनाने का जिससे नाम दिया गया जुनुद अल खलीफा ए हिन्द.

साल 2014 में मुदब्बिर ने शफी अरमार से बैथ की शपथ ली और नौकरी छोड़ कर पूरी तरह से आईएस के लिये काम करने लगा. मुदब्बिर, रिज़वान और खान मोहम्मद ने मिलकर ऑनलाइन वेबसाइट का इस्तेमाल कर भारत में नेटवर्क बनाने की शुरुवात की. मुदब्बिर और उसके साथी भी फ़र्ज़ी वेबसाइट, वेबपेज या चैट रूम के जरिये लोगों तक पहुंचने लगा. और साल 2014 में शुरू हुआ भारत में आईएस के नेटवर्क में मुदब्बिर और उसके दो साथी रिज़वान और खान मोहम्मद ने मिलकर
हैदराबाद से 4 बैंगलोर से 4 उत्तरप्रदेश से 2 उत्तराखंड से 4 महाराष्ट्र से 1 मंगलौर से 1 टुमकुर से 1 शख्स को जोड़ा.

यानि कुल मिलकर आईएस के इस नेटवर्क में मुदब्बिर के साथ 20 लोग थे जो देश में आतंक का खूनी खेल खेलने के लिए तैयार थे. इस काम को अंजाम देने के लिए शफी अरमार ने मुदब्बिर को आमिर बनाया तो रिज़वान को नायब आमिर. वहीँ नजमुल हूडा को मिलिट्री हेड तो नफीस खान को फायनांस चीफ बनाया गया. शफी के निर्देश थे कि इसी तरह के सेल देश के हर राज्य हर शेहर में बनने चाहिए.

मुदब्बिर शफी अरमार को पल पल की जानकरी देता. सीरिया में बैठे शफी आरमार ने अपने प्लान को आगे बढ़ाया. प्लान था देश में अलग अलग सेल बनाकर आईएस का एक बड़ा नेटवर्क तैयार करने का.

प्लान के मुताबिक शफी अरमार के कहने पर कुल 5 सेल बनाये गए महाराष्ट्र, कर्नाटक, हैदराबाद, उत्तरप्रदेश और उत्तरखंड में. हर सेल को जिम्मेदारी दी गयी थी उनके साथ लोगों को जोड़ने की. इन लोगों को आगे चलकर भारत में आतंकी हमले के लिये तैयार किया जाना था.

सूत्रों के मुताबिक ऑनलाइन मिलने के साथ साथ ये लोग मीटिंग भी करने लगे थे. साल 2015 में करीब 8 मीटिंग का ब्यूरा ख़ुफ़िया एजेंसियों के पास मौजूद है. जिनमें से 3 लखनऊ और एक एक मीटिंग पुणे, हैदराबाद, बैंगलोर, सहारनपुर और मैंगलोर में की गई. इस मीटिंग में मुदब्बिर और रिज़वान के अलावा लोकल सेल के 4 से 5 लोग मौजूद रहते.

इन मीटिंग्स में तय किया गया की कुछ लोग सीरिया जाएंगे, तो कुछ को भारत में ही बम बनाने और हथियार चलने की ट्रेनिंग दी जाने वाली थी. मुद्दबीर और खालिद नेटवर्क फ़ैलाने में जुटे थे, तो मुंबई का खान मोहम्मद हुसैन हवाला के जरिये पैसे लाने और नेटवर्क की ज़रूरतों को देखता था.

टेक्नोलॉजी में माहिर और बहुत चालक अक्सर अपने आईडी बदलते और अपने प्लान के बारे में कोड वर्ड में बात करते. अप्रैल 2015 को इनकी पहली जानकारी ख़ुफ़िया एजेंसियों को मिली. इन पर नज़र राखी गयी लेकिन जब इन लोगों ने धमाकों के लिए सामान लाकर बम बनाना शुरू किया तब पुलिस इन सब को गिरफ्तार किया. अधिकारियों को बंगलोर से हाइड्रोजन पैराऑक्साइड मिला तो ह्यडएराब्द से सफ़ेद पाउडर. इनके घरों और अन्य जगहों पर हुई छापेमारी में पाइप्स, सर्किट टाइमर भी बरामद किये गए. ये लोग 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर ही कुछ करने की तयारी में थे. लेकिन ख़ुफ़िया एजेंसियों के 6 महीने चले इस ऑपरेशन के बाद इन सब को धरदबोचा.

इन लोगों की गिरफ्तारी सुरक्षा एजेंसियों के लिये एक बड़ी कामयाबी तो है, लेकिन इस बात की जांच अभी भी जारी है कि इन्होंने कितने लोगों को बैथ यानी कि आतंक की शपथ दिलाई है?

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