क्या भारत में पोर्न वेबसाइट्स ब्लॉक की जा रही हैं?

By: | Last Updated: Sunday, 2 August 2015 1:01 PM
ISPs blocking porn websites

नई दिल्ली : क्या भारत में पोर्न वेबसाइट्स को ब्लॉक कर दिया गया है. ऐसा सवाल इसलिए क्योंकि देश में बहुत से इंटरनेट यूजर्स  पॉपुलर पोर्न साइट्स एक्सिस नहीं कर पा रहे हैं.  ट्विटर और रेड-इट यूजर्स का मानना है कि आईएसपी की सेवा देने वाली कंपनियां जैसी एमटीएनएल, बीएसएनएल और प्राईवेट आईएसपी की सेवा देने वाली कंपनियां स्पेक्ट्रानेट, तिकोना, एशियानेट, और हाथवे ने कई बड़ी पोर्न साइट्स को व्लॉक कर रखा है. वोड़ाफोन ने भी कई पोर्न साइट्स को ब्लॉक कर दिया है.

 

जब यूजर्स इन साइट्स पर जाते है तो उन्हें मैसेज दिखता है कि इस साइट्स को सक्षम प्राधिकारी के आदेश से ब्लॉक कर दिया गया है. कुछ यूजर्स को इन वेबसाइट्स पर जाते ही यह मैसेज मिलता है कि इस वेबसाइट को भारत सरकार के आदेश के अनुसार ब्लॉक कर दिया गया है. कुछ यूजर्स का कहना है कि डस-नॉट इक्जिस्ट का इरर मैसेज दिखता है.

 

दिल्ली में यह पाया गया कि वोडाफोन कनेक्शन पर ज्यादातर पोर्न साइट्स को ब्ल़क कर दिया गया है. पोर्न साइट्स को खोलने पर ब्लैंक पेज शो करता है जबकि एयरटेल और दूसरी कंपनियों के कनेक्शन से ये साइट्स आसानी से खुल जाती है.

 

एक रेड-इट यूजर्स ने कमेंट करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में पोर्न साइट्स एक या दो कंपनियों के कनेक्शन पर ही सही तरीके से काम कर रही हैं, जिसे बढ़ाने की जरूरत है. स्पेक्ट्रा नेट कनेक्शन पर दिल्ली में 13 में से 11 पोर्न साइट्स ओपन करने पर ब्लैंक पेज शो करता है. जबकि एयरटेल नेटवर्क बेहतर काम कर रहा है.

 

जुलाई में कमलेश वसनावी नाम के एक व्यक्ति ने पोर्न साइट्स की ब्लॉकिंग को लेकर एक पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी. इस पर चीफ जस्टिस एच एल दत्तू ने कहा कि सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए.

 

कोर्ट ने कहा था, “क्या हम पोर्न साइट्स की बलॉकिंग को लेकर एक अंतरिम ऑर्डर पास कर सकते है. हमें इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कोई भी व्यक्ति यह सवाल पूछ सकता है कि यदि मैंने अपने घर की बंद चारदीवारी में पोर्न साइट्स देखा तो यह क्राइम कैसे हुआ. क्या यह व्यक्ति का अधिकार नहीं कि वह बिना किसी कानून को तोड़े बंद कमरे में किसी भी तरह की साइट्स को ओपन कर सके?”

 

कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर पिंकी आनंद से पूछा कि एमएचए ने लिस्टेड साइट्स के खिलाफ कोई एक्शन क्यों नहीं लिया और पिटीशन पर कोर्ट को कोई जवाब क्यों नहीं दिया. आनंद ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि जरूरी कागजात जल्द ही कोर्ट को मुहैया करा दी जाएगी.

 

पिछले साल एंटरनेट सर्विस प्रवाइडर एसोशिएशन ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि वह ग्राहकों को प्रदत्त रूप से इंटरनेट सेवा प्रदान करती रहेगी और पोरनोग्राफिक जैसी साइट्स को कोर्ट या सरकार की अनुमति के बगैर बैन नहीं करेगी. इसी मामले में सरकार ने भी कहा था कि पोरनोग्राफिक की सारी साइट्स को बंद करना संभव नहीं है.

 

सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2013 में टेलिकम्यूनिकेशन विभाग को एक नोटिस जारी करते हुए पूछा था कि देश में वेब साइट्स से पारनोग्राफिक कंटेंट हटाना कैसे संभव.

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Web Title: ISPs blocking porn websites
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