बजट सिर्फ शुरूआत है, मैंने वही किया जो मैं कर सकता था: जेटली

By: | Last Updated: Sunday, 13 July 2014 11:14 AM

नई दिल्ली: बजट में सुधारों के मोर्चे में कुछ ज्यादा नहीं किये जाने की आलोचनाओं को दरकिनार करते हुये वित्त मंत्री अरण जेटली ने कहा है कि यह यात्रा की शुरूआत भर है और उन्होंने वहीं किया जो मौजूदा हालात में किया जा सकता था.

 

जेटली ने कहा ‘‘यह हमारी यात्रा की शुरूआत है न कि अंत. अभी हम जितना कर सकते थे, हमने उतना किया. पहले ही दिन सभी फैसले नहीं किये जाते हैं.’’ जेटली ने 10 जुलाई को अपना पहला बजट पेश किया. रेटिंग एजेंसियां विशेषतौर पर पिछली तारीख से किये गये कर संशोधन को वापस नहीं लेने और उद्योगों को पर्याप्त रियायत प्रदान नहीं करने की आलोचना कर रही हैं.

 

मंत्री ने हालांकि, वेतनभोगियों को राहत देते हुये 22,200 करोड़ रपए के प्रत्यक्ष कर को छोड़ दिया.

 

वित्त मंत्री ने इस आलोचना को खारिज करते हुए कि सरकार ने कई महत्वपूर्ण पहलें की हैं जो आवश्यक थे और पिछले 10 साल में इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाये गये.

 

जेटली ने कहा ‘‘इनमें सभी मुद्दे चाहे बीमा हो या रीयल एस्टेट, रक्षा, पिछली तारीख से कर संशोधन, कराधान का सरलीकरण, ट्रांस्फर प्राइसिंग महत्वपूर्ण थे. इसलिए 45 दिन में हमने इन सब पर ध्यान देने की कोशिश की है और फिर हमने विनिर्माण क्षेत्र पर ध्यान दिया है.’’ उन्होंने कहा ‘‘ये महत्वपूर्ण फैसले हैं. हमारी सरकार का नजरिया उन क्षेत्रों के बारे में बिल्कुल साफ है जिन्हें और राहत देनी है. आम आदमी पर आप कितना बोझ देंगे. यही वजह है कि हमने व्यक्तिगत कराधान को तर्कसंगत बनाने की कोशिश की है. हमने उल्टे कर ढांचे को भी समाप्त किया है.’’

 

बजट में वेतनभोगियों को राहत देते हुये आयकर छूट सीमा 2 लाख रपए से बढ़ाकर 2.50 लाख रपए करने और बचत योजनाओं में निवेश की सीमा 1 लाख रपए सालाना से बढ़ाकर 1.5 लाख रपए करने का प्रस्ताव किया गया है. राजकोषीय मजबूती के मामले में विस्तृत कार्ययोजना पेश नहीं करने की आलोचना के संबंध में उन्होंने कहा ‘‘मैंने इसकी चर्चा विस्तार से नहीं की है क्यांेकि मैंने व्यय प्रबंधन आयोग गठित करने का प्रस्ताव किया है और यदि किसी को लगता है कि 45 दिन के भीतर सब्सिडी को तर्कसंगत बनाने की योजना लाई जा सकती है जिसका लोग पिछले 66 साल में कोई हल नहीं ढूंढ पाये हैं तो हमें एजेंसियों का साख निर्धारण करना चाहिए.’’ उन्होंने कहा राजकोषीय घाटा कम करने के दो तरीके हैं – या तो आप कम खर्च करें या फिर ज्यादा कमाई करें.

 

उन्होंने कहा ‘‘आदर्श स्थिति यह है कि आपको ज्यादा आय अर्जित करनी चाहिए क्योंकि यदि आप कम खर्च करते हैं तो आपका व्यय कम होने लगता है और हो सकता है कि अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्से में संकुचन हो सकता है .. मैंने उन समस्याओं पर विचार किया है जिनका समाधान उन्होंने (संप्रग सरकार) नहीं किया है या फिर उन्होंने उसे छोड़ दिया.’’ उन्होंने कहा कि 45 दिन की अवधि में उन्होंने ज्यादातर समस्याओं पर ध्यान देने का प्रयास किया है.

 

बजट में राजकोषीय घाटे को इस साल सकल घरेलू उत्पाद के 4.1 प्रतिशत और 2016-17 तक 3 प्रतिशत पर लाने का प्रस्ताव किया है. यह संप्रग सरकार द्वारा तैयार ढांचे के अनुरूप है.

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