मुफ्ती सरकार ने मसरत विवाद पर केंद्र को रिपोर्ट सौंपी

By: | Last Updated: Monday, 9 March 2015 2:52 AM
Jammu and Kashmir: BJP_PDP

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में नई नवेली मुफ्ती सरकार ने मसरत आलम की रिहा करने का विवाद गरमाता जा रहा है. केंद्र सरकार के जवाब मांगने पर मुफ्ती सरकार ने केंद्र को मसरत आलम रिहाई पर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है.

 

रिपोर्ट के अंदर कहा गया है कि रिहाई न्याय प्रक्रिया के तहत की गई है. आज संसद में भी मसरत आलम की रिहाई पर हंगामा होने के आसार है. गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी आज मुफ्ती सरकार की रिपोर्ट और मसरत आलम की रिहाई पर अपनी बात संसद में रखेंगे.

 

इसके साथ ही इकॉनोमिक टाइम्स के हवाले से ये खबर भी आ रही है कि मुफ्ती सरकार एक और कैदी आसिफ हुसैन फक्तू की रिहाई पर भी विचार कर रही है.

 

वहीं कांग्रेस ने मसरत आलम रिहाई मामले पर संसद के दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव पेश कर दिया है.

 

जम्मू कश्मीर में बीजेपी पीडीपी का विवाद बढता जा रहा है. मुफ्ती के फैसलों से नाराज विश्व हिंदू परिषद ने मुफ्ती मोहम्मद सईद से माफी मांगने की मांग की है. प्रवीण तोगड़िया ने कहा है कि अगर मुफ्ती पाकिस्तान परस्ती नहीं छोड़ते तो फिर उन्हें कान पकड़कर हटा देना चाहिए.

वीएचपी की ओर से मांग तो उठी ही है. बीजेपी विधायक रवींद्र रैना ने भी साफ कहा है कि भारत मां के लिए एक नहीं हजार सरकार कुर्बान करने को तैयार हैं.

 

जम्मू में बीजेपी विधायकों और बड़े नेताओं की बीच कल बैठक भी हुई. बैठक में मुफ्ती के फैसलों और विवादित बयानों को लेकर चर्चा की गई. बीजेपी ने कहा ऐसे फैसलों से गठबंधन को खतरा है. कांग्रेस ने पीएम से जवाब मांगा है. हफ्ते भर में ही बात अब गठबंधन टूटने तक पर आ गई है. बीजेपी ने साफ कहा है कि मसरत के मुद्दे पर पार्टी को अंधेरे में रखा गया.

 

विवाद की शुरुआत तो पहले ही दिन हो गई थी . लेकिन यहां तक बात तब पहुंची जब मुफ्ती ने बीजेपी की बात सुननी ही बंद कर दी. पार्टी ने विरोध जताया था फिर भी अलगाववादी नेता मसरत आलम को जेल से रिहा कर दिया गया.

 

कौन है मसरत आलम?

घाटी में मसरत आलम की पहचान देश विरोधी कट्टरपंथी नेता की है. मसरत मुस्लिम लीग का नेता है जो बारामूला की जेल में बंद था. मसरत पर 2010 में भारत विरोधी आंदोलन चलाने का आरोप था जिसकी वजह से गिरॆफ्तारी हुई थी. 11 जून 2010 से शुरू हुई पत्थरबाजी की घटना सितंबर महीने तक चली थी. जिसमें सौ से ज्यादा लोगों की जान गई थी और इस घटना के पीछे मसरत का हाथ माना जाता है.

 

 

मसरत की रिहाई को लेकर कांग्रेस पीएम से जवाब मांग रही है. कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना करते हुए ट्विटर पर अपनी राय रखी. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘बीजेपी-पीडीपी सरकार ने श्रीनगर में मसर्रत आलम को रिहा किया, जम्मू में भाजपा ने विरोध जताया, दिल्ली में सवालों से बचने वाले मिस्टर प्रधानमंत्री बताइये..वह राजनीतिक बंदी है या आतंकवादी?’’ युवा कांग्रेस के पूर्व प्रमुख और पार्टी सांसद राजीव सातव ने भी सरकार पर निशाना साधा.

 

आईसीसी संचार विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘हम मसर्रत आलम की रिहाई की कड़ी निंदा करते हैं. प्रधानमंत्री और भाजपा को यह जवाब देना होगा कि पीडीपी-भाजपा सरकार लगातार एकतरफा फैसले से जम्मू कश्मीर के शांतिपूर्ण माहौल को क्यों बिगाड़ रही है.’’ उन्होंने याद करते हुए कहा कि पीडीपी-भाजपा सरकार के शपथग्रहण के एक घंटे के भीतर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ने राज्य के लोगों, सुरक्षा बलों और चुनाव आयोग को धन्यवाद देने की बजाए अलगाववादियों, आतंकियों और पाकिस्तान का शुक्रिया अदा किया.

 

सुरजेवाला ने कहा, ‘‘पथराव के मुख्य साजिशकर्ता मसर्रत आलम की रिहाई के कारण जम्मू कश्मीर में प्रतिबद्ध लोगों के साथ ही सुरक्षा बलों द्वारा बहुत कठिनाई से जम्मू कश्मीर में हासिल शांति को खतरा हो सकता है.’’ सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री से इस सवाल का जवाब मांगा है कि जम्मू कश्मीर में अपनी पार्टी के गठबंधन सरकार की ओर से ‘ऐसी बीमार सोच वाली टिप्पणी और दुस्साहस’ से क्या वह इत्तेफाक रखते हैं.

 

बीजेपी की आलोचना को पीडीपी ने नहीं दी तवज्जो

मसर्रत आलम को रिहा करने के फैसले पर गठबंधन सरकार में सहयोगी बीजेपी की आलोचना को तवज्जो नहीं देते हुए पीडीपी ने आज कहा कि जम्मू कश्मीर में शांति स्थापित करने के लिए सभी पक्षों को शामिल करना दोनों दलों के न्यूनतम साझा कार्यक्रम का हिस्सा है.

 

पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने कहा, ‘‘इस रिहाई को उचित परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है. राज्य में सुलह और शांति के लिए राज्य के तथा नियंत्रण रेखा के पार के सभी पक्षों को शामिल करने के हमारे न्यूनतम साझा कार्यक्रम का यह महत्वपूर्ण हिस्सा है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप सभी पक्षों के साथ बातचीत करना चाहते हैं, जिनमें ये नेता भी शामिल हों, तो आप उनके खिलाफ कुछ पुख्ता नहीं होने के बाद भी जेल में रखते हुए उन्हें शामिल नहीं कर सकते.’’ अख्तर ने कहा कि कुछ नेताओं की हिरासत पर अदालतों ने हस्तक्षेप किया था और उन्हें रिहा किया था.

 

आलम की रिहाई पर बीजेपी के विरोध के बारे में पूछे जाने पर अख्तर ने कहा कि वह इस मामले में सार्वजनिक बहस में नहीं पड़ना चाहते. उन्होंने कहा, ‘‘उनके अपने विचार हैं लेकिन मैं इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस में नहीं पड़ना चाहता. यह हमारे न्यूनतम साझा कार्यक्रम का हिस्सा है.’’ मुस्लिम लीग के अध्यक्ष मर्सरत आलम को साढ़े चार साल की हिरासत के बाद कल रिहा किया गया था.

 

न्यायिक प्रक्रिया के तहत हुई मेरी रिहाई: मसरत आलम

करीब साढ़े चार साल जेल में बिताने के बाद कल रिहा किए गए कट्टरपंथी अलगाववादी नेता मसर्रत आलम ने आज कहा कि पीडीपी-बीजेपी की सरकार ने उस पर कोई एहसान नहीं किया क्योंकि सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत उसकी रिहाई हुई है.

 

आलम ने बताया, ‘‘सरकार ने मुझ पर कोई एहसान नहीं किया है . मेरी रिहाई सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत हुई है.’’ उसने कहा कि ‘‘संबंधित अदालतों से जमानत दे दिए जाने के बाद भी’’ उसे बार-बार लोक सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत हिरासत में रखा गया.

 

अपनी रिहाई से जुड़े विवाद पर मुस्लिम लीग के नेता ने कहा, ‘‘यदि मेरी रिहाई पर कोई हो-हल्ला मचा रहा है तो यह उसका सिर दर्द है .’’ यह पूछे जाने पर कि क्या उसकी रिहाई अलगाववादियों और सरकार के बीच वार्ता की बहाली का संकेत है, इस पर आलम ने कहा कि हुर्रियत कांफ्रेंस इस पर कोई फैसला करेगा .

 

उसने कहा, ‘‘हम (मुस्लिम लीग) फोरम (हुर्रियत कांफ्रेंस) का हिस्सा हैं. वार्ता पर फोरम जो भी फैसला करेगा, मैं उसे मानूंगा.’’ अलगाववादी नेता को अक्तूबर 2010 में गिरफ्तार किया गया था.

 

आलम ने इस आरोप को खारिज किया कि रिहाई के मुद्दे पर उसके और राज्य सरकार के बीच कोई समझौता हुआ है और इससे केंद्र एवं अलगाववादियों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है .

 

उसने पूछा, ‘‘मेरी रिहाई में बड़ी बात क्या है ? मैं पिछले 20 साल से जेल आता-जाता रहा हूं . मेरी रिहाई में नया क्या है ?’’

 

क्या करेगी बीजेपी?

मसरत के मुद्दे पर बाहर से लेकर घर के अंदर तक बीजेपी घिर गई है.  आरएसएस के मुखपत्र में पूर्व सीबीआई निदेशक जोगिंदर सिंह ने लेख लिखा है कि बीजेपी मुफ्ती मोहम्मद से पूछे कि वो भारतीय हैं या नहीं. कुल मिलाकर अभी हालत ये है कि बीजेपी को न तो मुफ्ती निगलते बन रहे हैं और ना ही उगलते . जम्मू में जो बैठक हुई है उसमें सरकार में शामिल कई पार्टी के कई मंत्री मौजूद नहीं थे . ऐसे में सवाल ये है कि क्या अगली बैठक के बाद वाकई में बीजेपी मुफ्ती को बाय बाय कर देगी ? या फिर ऐसे ही चलता रहेगा .

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