जम्मू-कश्मीर में कब बनेगी सरकार?

By: | Last Updated: Saturday, 30 January 2016 8:47 PM
jammu kashmir govt

नई दिल्लीः जम्मू-कश्मीर में मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन को तीन हफ्ते से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन अभी तक फिर से सरकार नहीं बनी है. कब बनेगी ये अभी भी साफ नहीं है. पीडीपी और बीजेपी दोनों ही अपने पत्ते खोलने के लिए तैयार नहीं है. उम्मीद की जा रही है कि पीडीपी की कल होनेवाली बैठक में सब कुछ साफ हो जाएगा.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ऊमर अब्दुल्ला जिस असमंजस की बात कर रहे हैं उसी असमंजस में जम्मू- कश्मीर के लोग भी हैं. मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के तीन हफ्ते से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन बीजेपी और पीडीपी अभी भी तय नहीं कर पा रहे हैं कि आखिर जम्मू-कश्मीर में मिलकर फिर से सरकार बनानी है या नहीं. 7 जनवरी 2016 को मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहममद सईद के निधन के बाद से अभी तक जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है.

जम्मू-कश्मीर में सरकार बनेगी या फिर चुनाव होंगे. इस सवाल के जवाब के लिए सब की नज़रे रविवार को श्रीनगर में होने वाली पीडीपी की बैठक पर लगी हुवी है! 31 जनवरी को पीडीपी अद्यक्ष मेहबूबा मुफ़्ती कश्मीर घाटी के सभी नेताओ और जिला अध्यक्षों से मिलकर इस बात पर फैसला करने वाली है कि बीजेपी के साथ 10 महीने की गटबन्धन को आगे बढ़ाया जाए या नहीं!

महबूबा मुफ़्ती ने खुल कर तो अब तक कुछ नहीं बोला है लेकिन बीजेपी से उनकी नाराजगी किसी से छिपी नहीं है. वो इसलिए क्योंकि पीएम नरेंद्र मोदी मुफ़्ती मोहम्मद सईद से न तो दिल्ली के AIIMS अस्पताल में ना मिलने गए थे औऱ न ही जनाजे में शामिल हुए थे. ऐसे में पीडीपी ने बीजेपी के साथ सरकार बनाने से पहले कड़ी शर्ते रखी हैं.

पहला पाकिस्तान और अलगावादियों से बातचीत शुरू करने, दूसरा राज्य से AFSPA हटाने और तीसरा NHPC से पनबिजली परियोजनाओं को राज्य सरकार को देने की शर्त है.

ये सभी मुद्दे पीडीपी के घोषणापत्र का हिस्सा रहे हैं. लेकिन इसके अलावा भी महबूबा के सख्त रुख के पीछे दो और अहम राजनीतिक वजह है. पहला प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का सख्त रुख और दूसरा राज्य बीजेपी का विवादित मुद्दो को उछालना.

पिछले दस महीनो में भले ही मुख मंत्री और सरकार पीडीपी की रही हो लेकिन राज्य की पृष्टभूमि पर नरेंदर मोदी और बीजेपी ही छाये दिखे! बाढ़ पीडितो का पुनर्वास हो या कश्मीरी विस्थापितों की घर वापसी – हर मुद्दे पर बीजेपी का एजेंडा ही प्रमुख रहा है! और इसके साथ विवादित मुद्दो – धरा 370, राज्य ध्वज और गौहत्या पर राज्य बीजेपी के नेताओ और मंत्रियो का रुख मेहबूबा की चिंता का कारन है! ऐसे में मेहबूबा को डर था की अगर जल्दबाज़ी में “AGENDA OF ALLIANCE” को कबूल करके सरकार बनाना पार्टी के लिए घातक ना बन जाए!

महबूबा मुफ्ती की पीडीपी के लिए वैसे विकल्प कम ही है! बीजेपी को छोड़ किसी और पार्टी के साथ गठबंधन बहुत मुश्किल है.

जम्मू-कश्मीर की 87 सीटों की विधानसभा में पीडीपी के 28, बीजेपी के 25, नेशनल कॉन्फ्रेंस के 15, कांग्रेस के 12 और अन्य की 7 सीटें हैं.

ऐसे में पीडीपी और बीजेपी की मिलाकर 55 सीटें होती हैं जिसके सहारे आराम से सरकार चल सकती है. इसके अलावा और कोई गठबंधन संभव नहीं है. नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने पीडीपी के साथ हाथ मिलाने से इंकार कर दिया है और वो दोनों खुद सरकार किसी भी तरह से नहीं बना सकते. ऐसे में नेशनल कॉन्फ्रेंस मौजूदा माहौल का फायदा उठाने के लिए फिर से चुनाव की तरफ इशारा कर रही है.

बीजेपी भी अब पीडीपी की बैठक के नतीजे का इंतज़ार कर रही है! ऐसे संकेत मिल रहे है की शायद पीडीपी के अंदर भी इस राजनितिक संकट से जल्द बाहर आने का काफी दबाव है. क्योँकि हर गुज़रते दिन के साथ सबसे ज्यादा राजनीतिक नुकसान पीडीपी का ही हो रहा है.

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