जम्मू-कश्मीर में बाढ़ से मुसीबतें बढ़ीं, प्रधानमंत्री ने 1000 करोड़ रूपये मदद की घोषणा की

By: | Last Updated: Monday, 8 September 2014 2:53 AM
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नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर में बाढ़ से भारी विनाश के बीच अब तक इससे करीब 150 लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि कई अन्य प्रभावित हुए हैं. राहत अभियान रविवार को तेज कर दिया गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाढ़ प्रभावित इस राज्य के लिए 1000 करोड़ रूपये की सहायता मुहैया कराने की घोषणा की.

 

नदियों और अन्य जल धाराओं में बाढ़ से अस्पतालों सहित कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गयी हैं और कई क्षेत्रों से सड़क और संचार सम्पर्क टूट गया है. श्रीनगर स्थित सैन्य छावनी, सिविल सचिवालय और उच्च न्यायालय भी जलमग्न हो गए हैं.

 

जम्मू में स्थिति सुधरने लगी है लेकिन बुधवार से हो रही बारिश से कश्मीर का बड़ा हिस्सा बाढ से प्रभावित है. राज्य सरकार ने 12 सितंबर तक सभी स्कूलों को बंद रखने का आदेश दिया है.

 

मौसम में सुधार के संकेत मिलते ही राहत प्रयास तेज कर दिए गए हैं और सेना ने 184 कालम (प्रत्येक में 75 से 100 कर्मी) तैनात किये हैं जबकि वायुसेना ने 29 विमान और हेलीकाप्टरों को सेवा में लगाया है, आपदा निगरानी इकाई गठित की है और अपने सभी अड्डों को हाई अलर्ट पर रखा है.

 

सेना और वायुसेना ने विभिन्न क्षेत्रों से 13 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला है. यद्यपि निचले इलाकों में इमारतों की ऊपरी मंजिलों में कई लोग अब भी फंसे हुए हैं और मदद की प्रतीक्षा कर रहे हैं. राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि मदद उनके पास जल्द पहुंचेगी.

 

उमर ने कहा, ‘‘यह एक अभूतपूर्व स्थिति है और हम इस स्थिति में जो सर्वश्रेष्ठ कर सकते हैं वह कर रहे हैं. कृपया घबरायें नहीं, हम आप तक पहुंचेंगे, यह मेरा वादा है.’’ राज्य के इस गंभीर स्थिति से जूझने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की और इसे एक ‘‘राष्ट्रीय स्तर की आपदा’’ करार दिया.

 

प्रधानमंत्री ने लोगों के दुख और व्यथा को साझा किया. वहीं, जम्मू और श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और वरिष्ठ अधिकारियों ने बाढ़ के कारण हुई क्षति के बारे में उन्हें जानकारी दी. प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र इस संकट में राज्य के लोगों के साथ और जम्मू कश्मीर सरकार के साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़ा है.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सरकार बाढ़ राहत और पुनर्वास के लिए राज्य को 1000 करोड़ रपये की अतिरिक्त विशेष परियोजना सहायता उपलब्ध कराएगी. हालात का उचित सर्वेक्षण किए जाने के बाद जरूरत पड़ने पर और सहायता प्रदान की जाएगी.’’ उमर ने कहा, ‘‘हम अब अपना ध्यान राहत और पुनर्वास पर केंद्रित करेंगे. जम्मू में स्थिति धीरे धीरे सामान्य हो रही है जबकि कश्मीर में स्थिति और खराब हो गई है. विशेष रूप से श्रीनगर में स्थिति अब भी खराब है. हमारी प्राथमिकता लोगों को बचाने की है.’’ अधिकारियों ने बताया कि 150 नावें, राहत दल, गोताखोर, फ्लड लाइटें, सर्च लाइटें राज्य को भेजी जा रही हैं. उन्होंने कहा कि और टेंटों की जरूरत है.

 

उधमपुर के पचेरी गांव में भूस्खलन होने से दो दर्जन से ज्यादा घर दब गए जिससे सात लोगों की मौत हो गयी और 20 से ज्यादा लापता हैं. जम्मू में कल रात से 22 लोगों की मौत हो गयी जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर 145 हो गयी. इनमें कश्मीर घाटी में हुयी 11 मौतें शामिल हैं.

 

माता वैष्णो देवी मंदिर के दर्शन के लिए यात्रा आज लगातार चौथे दिन स्थगित रही. अधिकारियों ने कहा कि तीर्थयात्रा मौसम सुधरने के बाद ही बहाल होगी. वायुसेना के 12 एएन.32, चार आईएल.76, पांच सी.130 जे और दो सी.17 परिवहन विमानों को लोगोंे और राहत सामग्री ढोने के कार्य में लगाया गया है. बेघर लोगों की संख्या बढ़ने के बीच सेना सैकड़ों लोगों को टेंट में आश्रय मुहैया करा रही है.

 

झेलम नदी कई स्थानों पर उफान पर है और कई स्थानों पर तटबंध टूट गए हैं जिससे आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं.

 

श्रीनगर के वाणिज्यिक केंद्र लाल चौक और आसपास के क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं तथा सिविल सचिवालय और उच्च न्यायालय में छह से आठ फुट पानी भर गया है.

 

अधिकारियों ने कहा कि हवाई अड्डा रोड, एग्जीबिशन क्रॉसिंग, हरिसिंह हाई स्ट्रीट, लाल चौक और रीगल चौक इलाके में कई फुट पानी भरा हुआ है. एसएमएचएस जैसे मुख्य अस्पतालों के लिए सड़क सम्पर्क सड़कांे पर पानी भरने के चलते कट गया है.

 

संचार व्यवस्था बाधित हो गई है क्योंकि लगभग सभी निजी सेल्युलर नेटवर्क काम नहीं कर रहे हैं. लैंडलाइन टेलीफोन नेटवर्क भी बुरी तरह से बाधित है.

 

प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और जलापूर्ति गत छह दिनों से बाधित है.

 

जम्मू वायुसेना स्टेशन के एयर आफिसर कमांडिंग एयर कोमोडोर पी ई पतांगे ने कहा, ‘‘मौसम में सुधार होने के मद्देनजर बचाव और राहत अभियान तेज कर दिया गया हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारी प्राथमिकता पहले जिंदगियां बचाने की है. इसके साथ ही फंसे लोगों के लिए राशन, दवाएं हवाई मार्ग से गिराना है.’’ मौसम विभाग ने घाटी और जम्मू में अगले चार दिनों तक ‘‘ बहुत ज्यादा बारिश नहीं होने’’ की भविष्यवाणी की है.

 

जम्मू में कल रात से 22 लोगों की मौत हुई है जिनमें से जम्मू में पांच लोगों की मौत मकान गिरने से हो गयी . उधपुर में छह, रियासी में पांच, राजौरी और पुंछ में दो.दो व्यक्तियों की मौत हुई है जिससे जम्मू क्षेत्र में मरने वालों की संख्या बढ़कर 127 हो गई है. राजौरी में गत गुरूवार को बस के साथ जो 63 लोग बह गए थे उनमें से आज दो और शव मिल गए जिससे मिलने वाले शवों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है.

 

वायुसेना के हेलीकाप्टरों ने भारत.पाकिस्तान सीमा स्थित जलमग्न सीमा चौकियों और अग्रिम चौकियों और तारबंदी पर तैनात बीएसएफ और सेना के 180 जवानों को आज निकाला. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एनडीआरएफ के अतिरिक्त दल और 100 नावों को घाटी में राहत अभियान चलाने के लिए कश्मीर घाटी में भेजा गया है .

 

कश्मीर के मंडलायुक्त रोहित कंसल ने कहा कि हमें जलमग्न क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने में नावों की कमी का सामना करना पड़ रहा है. 100 नावें दिल्ली से रवाना की गई हैं. कंसल ने कहा कि कई क्षेत्रों में काफी लोग फंसे हुए हैं. नावों की कमी के चलते हम उन क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं.

 

इस बीच सेना ने उन दो सैनिकों की तलाश फिर से शुरू कर दी है जो कश्मीर के बाढ़ प्रभावित पुलवामा में बचाव और राहत अभियान के दौरान नाव डूब जाने के बाद से लापता हैं.

 

प्रधानमंत्री ने बाढ़ से प्रभावित पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में राहत अभियान के लिए पाकिस्तान को आज हरसंभव सहायता मुहैया कराने की पेशकश की.

 

उन्होंने गुरूवार को मृतकों के परिजनों को दो दो लाख रूपये और गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार रूपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की थी. अन्य राज्यों को भी राहत प्रयासों में सहायता मुहैया कराने के लिए कहा गया है. गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सभी सामाजिक संगठनों और गैर सरकारी संगठनों को अपने संसाधन लगाने के लिए कहा गया है.

 

राज्य में राहत और बचाव अभियानों की सक्रिय निगरानी करने के लिए श्रीनगर, जम्मू और नयी दिल्ली में नियंत्रण कक्ष स्थापित किये जा रहे हैं.

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