एक साल बाद आखिर क्या है जनधन योजना की हकीकत?

By: | Last Updated: Friday, 14 August 2015 1:04 PM
jan dhan yojana

नई दिल्ली: देश के करोड़ों गरीबों और साधारण लोगों की बैंक तक पहुंच नहीं थी. देश की आर्थिक व्यवस्था से इन्हें जोड़ने के लिए शुरू हुई जन-धन योजना. कितनी कामयाब है जन-धन योजना?

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले के अपने भाषण में उन लोगों की बात की जिसने कभी किसी बैंक का कभी दरवाजा नहीं देखा था. ऐसे लोगों की बात की जिनका बैंक में कभी खाता नहीं खुला था. जनधन योजना का मकसद था साधारण से साधारण व्यक्ति को देश की वित्तीय व्यवस्था से जोडना.

 

एक साल बाद आखिर क्या है जनधन योजना की हकीकत?

 

दिल्ली के मुखर्जी नगर में राकेश कालरा रहते हैं. घड़े और मिट्टी के बर्तन बेच कर कालरा अपने परिवार का पेट पालते हैं. कालरा करीब 30 साल से मिट्टी के बर्तन का काम कर रहे हैं लेकिन इस दौरान इनका बैंक खाता तक नहीं था. जब कभी अकाउंट खुलवाने के लिए ये बैंक जाते कोई न कोई बहाना बना कर इनका अकाउंट खोलने से बैक मना कर देता. लेकिन जनधन योनजा के शुरू होने के बाद इनका जीरो बैलेंस वाला बैंक अकाउंट खुल गया. कालरा का कहना है कि इस खाते की वजह से इनकी हर महीने बचत भी हो रही है साथ ही पैसे भी सुरक्षित हैं.

 

राकेश का ये भी कहना है की इस बैंक अकाउंट का उनको एक और फायदा हुआ. हाल में शुरू हुई प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा योजना और पेंशन योजना से भी ये जुड़ गए है.

 

राकेश की ही तरह मॉडल टाउन में रहने वाले अशोक का भी पिछले साल सिर्फ आधार कार्ड और 2 फोटो देकर जन धन योजना में बैंक में अकाउंट खुला. 32 साल से अशोक दिल्ली के मॉडल टाउन में सड़क के किनारे दर्ज़ी का काम कर रहे हैं. इतने सालों में उनका बैंक अकाउंट कागजात और पैसों  की वजह से नहीं खुला. लेकिन अब इनका भी बैंक अकाउंट है. अशोक बताते हैं कि अब वो जो भी कमाते है उसे बैंक में जमा करा देते हैं. इतना ही नहीं अब उनके पास बीमा भी है.

 

सरकार ने 26 जनवरी 2015 तक 7 करोड 50 लाख बैंक खाते खोलने का लक्ष्य रखा गया था जिसे बाद में बढाकर 10 करोड कर दिया गया. जन धन योजना को गिनीज बुक ऑफ वल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है. एक हफ्ते में 18,096,130 नए बैंक खाते खोलने का रिकॉर्ड भारत सरकार के नाम दर्ज हो गया. जन धन योजना का मकसद है कि हर घर में कम से कम एक बैंक खाता हो. 29 जुलाई 2015 तक देश भर में सभी बैंक 17 करोड 29 लाख जन धन बैंक अकाउंट खोल चुके हैं.

 

सरकार की योजना है कि जन धन बैंक खातों में सीधे तौर पर सब्सिडी आदि का पैसा जाए. चाहे वो एलपीजी सब्सिडी का पैसा हो या फिर नरेगा का पेमेंट. इस पूरी योजना का मकसद है लोगों को देश के वित्तीय सिस्टम से जोडना. उनमें बचत की प्रवृति को बढाना. लिकेज और डुप्लीकेसी को रोकना.

 

सरकार ने बैंक खाते खोलने का जितना लक्ष्य रखा, उससे कहीं ज्यादा खाते खुल चुके हैं. लेकिन, महज खाते खुलने से बात नहीं बनती. खातों में लेनदेन हो, तभी बैंकों को फायदा होगा और तभी इस योजना को सफलता मिलेगी. जितने कम से कम जीरो बैलेंस एकाउंट होंगे, उतनी जन धन योजना की सफलता होगी. यूं तो, जीरो बैलेंस वाले एकाउंट की संख्या लगातार कम हो रही है, लेकिन अभी भी बड़ा तबका ऐसा है जिसने खाते तो खुलवा लिए, लेकिन इनमें लेनदेन नहीं हो रहा है.

 

कुल जन धन बैंक खाते-  17 करोड 29 लाख

जीरो बैलेंस बैंक खाते-  46.91 फीसदी यानी 8 करोड 11 लाख

खातों मे कुल बैलेंस— 20769.33 करोड रुपये

हर खाते में औसत बैलेंस— 1201 रुपये

कुल रुपये डेबिट कार्ड जारी— 15 करोड 26 लाख

नोट: सभी आंकडे 29 जुलाई 2015 तक के हैं

 

ये तो बात हुई जीरो बैलेंस एकाउंट की. जानकार कहते हैं कि इसके अलावा बहुत सारे एकाउंट ऐसे हैं जिनका परिचालन नहीं हो रहा है. यानी डॉरमेंट एकाउंट.

 

ऐसे खातों की अगर संख्या जोड ली जाए तो 17.29 करोड जन धन खातों में से लगभग 60 से 70 फीसदी एकाउंट ऐसे होंगे जो सिर्फ खुले हैं. लेकिन, इनके कोई मायने नहीं है. इसके अलावा जन धन एकाउंट को जब तक आधार कार्ड से लिंक नहीं किया जाता है, तब तक किसी भी प्रकार की सब्सिडी या नगद भुगतान इन खातों में नहीं किया जा सकता है.

 

जन धन योजना को आकर्षक बनाने के लिए सरकार ने इसके साथ कई चीजों को जोडा है. हर खाते के साथ एक रुपये ​डेबिट कार्ड देने का प्रावधान रखा गया जिसके साथ 100000 रुपये का एक्सीडेंटल इंश्योरेंस कवर मुफ्त है. इसके अतिरिक्त 30 हजार रुपये का लाइफ इंश्योरेंस भी मुफत दिया गया. 6 महीने तक खाते के सुचारु रूप से परिचालन के बाद 5000 रुपये के ओवरड्राफ्ट की सुविधा को भी जन धन बैंक खाते के साथ जोडा गया था.

 

जन धन योजना की अगर बात करें तो सरकारी बैंक इसमें सबसे आगे रहे हैं. ग्रामीण बैंक दूसरे पायदान पर रहे तो निजी बैंकों ने इस योजना में खासी रुचि नहीं दिखाई है. सभी निजी बैंकों ने कुल मिलाकर 1 करोड भी बैंक खाते नहीं खोले हैं.

 

2011 के जनगणना के मुताबिक देश में करीब 24.67 करोड कुल घर थे. 14.48 करोड घर यानी करीब 58प्रतिशत घर बैंकिंग सेवा से जुडे हैं. जबकि 42% घरों की पहुंच बैंक तक नहीं थी.

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