जनलोकपाल बिल: रामलीला मैदान से लेकर दिल्ली विधानसभा तक

By: | Last Updated: Monday, 30 November 2015 11:36 AM

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा में आज जनलोकपाल बिल पास हो गया. ये वही लोकपाल बिल है जिसके चलते मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2014 में दिल्ली की कुर्सी छोड़ दी थी.

 

इस बिल को लेकर एक तरफ आम आदमी पार्टी अपनी पीठ थपथपा रही है तो वहीं विपक्षी पार्टी बीजेपी इस बिल को लेकर सवाल उठा रही है. इतना ही कभी जनलोकपाल के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल के साथी रहे प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने इस बिल को ‘महाजोकपाल’ बताया है.

 

दिल्ली विधानसभा में जनलोकपाल बिल 2015 पेश  

विरोधियों के इस आरोप आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने ट्वीट कर कहा था, ‘हम रामलीला मैदान में तैयार ड्राफ्ट के मुताबिक ही लोकपाल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. एक भी कोमा/फुल स्टॉप नहीं बदला गया. अगर बेहतरी की कोई गुंजाइश है तो उस पर सदन में लोगों के चुने हुए प्रतिनिधी बहस करेंगे.‘

 

कौन से मुद्दे हैं जिन प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को नाराजगी है

 

भूषण ने बिल में बताई गई लोकपाल की अप्वाइंटमेंट और हटाने की प्रोसेस पर सवाल उठाया, जिसे हाल ही में आप केबिनेट ने मंजूरी दी. उनका कहना था कि इससे लोकपाल को राज्य सरकार के रहमो करम पर छोड़ दिया गया है.

 

प्रशांत भूषण के मुताबिक बिल कथित रूप से कहता है कि सीएम, विधानसभा अध्यक्ष, विपक्ष के नेता और दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस वाली चार सदस्यीय सलेक्शन कमेटी लोकपाल को अप्वाइंट करेगी, जबकि विधानसभा में दो तिहाई बहुमत से मंजूर होने वाले प्रस्ताव के जरिए लोकपाल को हटाया जा सकेगा.

 

जनलोकपाल बिल: रामलीला मैदान से लेकर दिल्ली विधानसभा तक

 

1. लोकपाल चुनाव समिति

2011 में जब रामलीला मैदान में आंदोलन हुआ था उस समय लोकपाल चुनाव समिति में कुल सात सदस्यों का प्रस्ताव था. इस समिति में दो नेताओं का प्रस्ताव था इसमें एक सरकार का सदस्य. इसके बाद साल 2014 में केजरीवाल ने जिस बिल के लिए कुर्सी छोड़ी उसमें भी यही प्रस्ताव था. अब 2015 में जो बिल आया है उसमें  चार सदस्यीय समिति का प्रावधान है. इसमें तीन नेता होंगे, इनमें भी 2 सरकार के प्रतिनिधि होंगे.

 

2. लोकपाल हटाने का तरीका

लोकपाल हटाने के तरीके को लेकर भी काफी हंगामा हुआ था. 2011 में आंदोलन के वक्त जो मसौदा तैयार हुआ था उसके मुताबिक अगर सुप्रीम कोर्ट दोषी मान ले तो लोकपाल को हटाया जा सकता है. इसके बाद 2014 में केजरीवाल के मसौदे में कहा गया शिकायत पर जांच के बाद दिल्ली हाइकोर्ट की सिफारिश से लोकपाल को हटाया जा सकता है. अब 2015 के बिल में लोकपाल को हटाने के लिए दिल्ली विधानसभा में दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास होना अनिवार्य बताया गया है.

 

3. लोकपाल की जांच एजेंसी

लोकपाल के पास जो जांच एजेंसी होगी उस पर रामलीला मैदान के मसौदे में कहा गया था कि यह पूरी तरह स्वतंत्र होगी. 2014 में केजरीवाल के बिल में बताया गया कि इसके लिए अलग से इन्वेस्टिगेशन विंग का गठन किया जाएगा. आज पेश हुए बिल के मुताबिक लोकपाल की जांच एजेंसी के लिए सरकार के विभागों से अफ़सर लिए जाएंगे.

 

4. गलत शिकायत पर दंड

2011 में आंलोदन के समय गलत शिकायत पर जो सजा का प्रावधान था उसके मुताबिक एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान था. 2014 में केजरीवाल के बिल में इसके लिए एक साल की सजा रखी गई थी और अब 2015 में पेश हुए बिल में एक साल तक जेल या एक लाख रुपये जुर्माना या दोनों का प्रावधान है.

 

5. लोकपाल का दायरा

रामलीला मैदान में जिस लोकपाल की मांग की जा रही थी उसके मुताबिक लोकपाल के दायरे में केंद्र सरकार के करप्शन के लिए केंद्रीय लोकपाल और राज्य सरकार के करप्शन के लिए राज्य लोकायुक्त की बात कही गई थी.

 

2014 में जब केजरीवाल ने कुर्सी छोडी तो उस बिल में लोकपाल के दायरे के रूप में केवल पब्लिक सर्वेन्ट्स का ज़िक्र था. आज पेश हुए बिल में लोकपाल के दायरे में दिल्ली की सीमा में किसी का भी करप्शन शामिल किया गया है.

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Web Title: janlokpal bill- ramleela maidan to delhi assembly
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