'भारत माता की जय' कहने में किसे दिक्कत है?

By: | Last Updated: Wednesday, 16 March 2016 6:26 PM
javed akhtar vs asaduddin owaisi controversy

नई दिल्ली: जाने माने शायर और गीतकार जावेद अख्तर राज्यसभा से 6 साल के कार्यकाल के बाद रिटायर हो गए. रिटायरमेंट के मौके पर जावेद अख्तर ने राज्यसभा में विदाई भाषण दिया और सबको सुना दिया.

जावेद अख्तर ने ओवैसी पर करारा हमला बोलते हुए तीन बार भारत माता की जय कहा और ओवैसी को मोहल्ले का नेता कह दिया. बडा सवाल ये है कि भारत माता की जय बोलने में दिक्कत क्या है.

राज्यसभा में जावेद अख्तर ने भारत माता की जय के नारे लगाकर एमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान का करारा जवाब दिया जिसमें उन्होंने संविधान का हवाला देकर भारत माता की जय नहीं कहने की बात कही थी. जावेद अख्तर ने कहा कि अगर संविधान भारत माता की जय कहने के लिए कहता तो टोपी और शेरवानी पहनने को भी नहीं कहता.

Asaduddin Owaisi_Javed

जावेद अख्तर ने ओवैसी को एक मोहल्ले का नेता बताया. जावेद अख्तर ने कहा, “एक साहब हैं जिन्हें ये ख्याल हो गया है कि वो नेशनल लीडर हैं. हालांकि हकीकत ये है कि वो हिन्दुस्तान के एक राज्य आंध्र के एक शहर हैदराबाद के एक छोटे से मोहल्ले के लीडर हैं.”

राज्यसभा के मनोनीत सदस्य जावेद अख्तर का संसद में मंगलवार को आखिरी दिन था. उन्होंने सिर्फ ओवैसी को ही कटघरे में नहीं खड़ा किया बल्कि उन लोगों पर भी हमला बोला जो मुस्लिमों के लिए पाकिस्तान और कब्रिस्तान का जिक्र करते हैं.

अखत्र ने कहा, “मैं एक और नारे की निंदा करता हूं, अक्र देश कहा जाता है कि मुसलमान के दो स्थान, कब्रिस्तान या पाकिस्तान. मैं इस नारे की सख्त से सख्त लफजों में निंदा करता हूं.”

किसके लिए कहा पाकिस्तान-कब्रिस्तान ?
मोदी सरकार के मंत्री, सांसद से लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी चुनाव हारने पर पाकिस्तान में पटाखे फूटने का बयान दे चुके हैं. जावेद अख्तर ने सत्ताधारी बीजेपी के उन नेताओं को भी घेरा जो लगातार विवादित बयान देकर माहौल गर्माते रहते हैं. गिरिराज सिंह , साक्षी महाराज, कैलाश विजयवर्गीय, आदित्यनाथ जैसे नेताओं का जावेद अख्तर ने नाम तो नहीं लिया लेकिन सरकार ने इनकी जुबान पर लगाम लगाने की मांग की.

अख्तर ने कहा, ”इस सरकार में बड़े काबिल लोग हैं लेकिन उनके ऊपर जिम्मेदारी हैं कि जो तथाकथित भड़काऊ बयान देने वाले लोग हैं उनके ऊपर लगाम लगाएं.”

सिर्फ सरकार ही नहीं जावेद अख्तर ने संसद में हंगामा करने वाले विपक्ष को भी ये कहते हुए आड़े हाथों लिया कि इससे देश नहीं बढ़ने वाला है. सदन की कार्यवाही में बाधा डाले जाने की प्रवृत्ति से लोकतंत्र को मजबूती नहीं मिलेगी. विपक्ष और सरकार दोनों सोचें कि न तो देश में स्थगन (सदन में) चलेगा और न ही ध्रुवीकरण चलेगा.

विपक्ष पर हमला क्यों ?
सदन का पिछला दो सत्र हंगामे की वजह से पूरी तरह धुल गया था.. विपक्ष के हंगामे ने संसद में काम नहीं होने दिया था.. अख्तर ने नसीहत दी कि काम रोकने से काम नहीं चलने वाला. प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों में जिस युवा शक्ति का जिक्र करते हैं जावेद अख्तर ने उसकी भी याद दिलाई और कहा कि चुनाव का ख्याल न करके देश को आगे ले जाएं.

युवा शक्ति की याद क्यों दिलाई ?
देश 41 फीसदी आबादी 20 साल से कम की है. 65 फीसदी आबादी 35 साल से कम ही है. पीएम मोदी इस युवा शक्ति के जरिये विश्व शक्ति बनने का सपना दिखाते रहे हैं. लेकिन सरकार की छवि को कई बार उनकी पार्टी के नेता ही नुकसान पहुंचाते रहते हैं. अख्तर ने काम पर फोकस करने के लिए ये बयान दिया. एक बार जब सभापति हामिद अंसारी ने जावेद अख्तर को वक्त का एहसास कराय तो  उन्होंने इसे मौजूदा परिस्थिति से जोड़ दिया.

संसद में अपने भाषण के दौरान जावेद अख्तर ने वैसे ही तालियां बटोरी जैसी तालियां फिल्मों की कहानी और गाने के लिए मिलती है. फिल्मों की कहानी लिखने वाली मशहूर जोड़ी सलीम-जावेद के जावेद अख्तर ने अलग होने के बाद फिल्मों के लिए गाने लिखे. 5 बार राष्ट्रीय पुरस्कार, 15 बार फिल्म फेयर पुरस्कार जीतने वाले जावेद देश के बड़े शायर जां निसार अख्तर के बेटे हैं. अपनी शायरी से दशकों तक देश को दीवाना बनाने वाले जावेद अख्तर संसद में आखिरी दिन सबको सुना गए.

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