जयललिता: अभिनेत्री से आयरन लेडी तक का सफर

By: | Last Updated: Monday, 11 May 2015 5:06 PM
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नई दिल्ली: जयललिता जो कभी एक अभिनेत्री हुआ करती थीं लेकिन अब देश की ताकतवर महिलाओं की गिनती होती है तो उसमें एक नाम अम्मा का होता है.

 

तमिलनाडु में जयललिता को अम्मा के साथ-साथ आयरन लेडी के नाम से भी जाना जाता है. वजह है उनके फौलादी इरादे और कड़े फैसले लेने की हिम्मत. तमिल राजनीति की बात आज की जयललिता के बिना पूरी नहीं हो सकती . लेकिन जयललिता देश की राजनीति में भी अहम किरदार निभाती आई हैं

 

कहा ये भी जाता है कि अम्मा के नाम से मशहूर जयललिता को अपनी आलोचना पसंद नहीं आती. उनके कार्यकर्ता और समर्थक उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं और जयललिता ऐसी श्रद्धा का बुरा नहीं मानतीं.

 

एक खूबसूरत अभिनेत्री से आयरन लेडी तक का सफर जयललिता के लिए आसान नहीं रहा है. इन सालों में जयललिता ने देखी है उन्हें मारे जाने की साजिश, उन्हें कुर्सी से उखाड़ फेंकने के दांव-पेंच और भ्रष्टाचार के ऐसे आरोप जो कहानियां बन गए. लेकिन हर बार जयललिता इन सबसे निजात पाने में कामयाब रहीं.

 

जयललिता का जन्म एक ‍तमिल परिवार में 24 फरवरी, 1948 में हुआ और वो कर्नाटक के मेलुरकोट गांव में पैदा हुई. मैसूर में संध्या और जयरामन दंपति के ब्राह्मण परिवार में जन्मीं जयललिता की शिक्षा चर्च पार्क कॉन्वेंट स्कूल में हुई.

 

जयललिता दो साल की थीं जब पिता का निधन हो गया. उनकी मां जयललिता को साथ लेकर बेंगलुरू चली गई थीं. वहां मां ने तमिल सिनेमा में काम करना शुरू कर दिया जब जयललिता स्कूल में पढ़ ही रही थीं तभी उनकी मां ने उन्हें फिल्मों में काम करने के लिए राजी कर लिया था. उनकी पहली फिल्म आई एक अंग्रेजी फिल्म ‘एपिसल’ .

 

15 साल की उम्र में तो उन्होंने कन्नड़ फिल्मों में अभिनेत्री का काम करना शुरू कर दिया था. दिलचस्प ये है कि जयललिता उस दौर की पहली ऐसी अभिनेत्री थीं जिन्होंने स्कर्ट पहन कर भूमिका की जिसे उस दौर में बड़ी बात माना गया.

 

उस ज़माने के सबसे लोकप्रिय अभिनेता एम जी रामचंद्रन के साथ उनकी जोड़ी बहुत ही मशहूर हुई. 1965 से 1972 के दौर में उन्होंने अधिकतर फिल्में एमजी रामचंद्रन के साथ की. फिल्मी कामयाबी के दौर में उन्होंने 300 से ज़्यादा तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों में काम किया.

 

अपने राजनैतिक गुरू एम जी रामचंद्रन के साथ उनका दूसरा दौर राजनीति में शुरू हुआ. एमजी रामचंद्रन जब राजनीति में चले गए तो करीब दस साल तक उनका जयललिता से कोई नाता नहीं रहा. लेकिन 1982 में एम जी रामचंद्रन उन्हें राजनीति में लेकर आए. हालांकि इस बात से जयललिता ने हमेशा इंकार किया. रामचंद्रन चाहते थे कि जयललिता राज्यसभा पहुंचे क्योंकि उनकी अंग्रेजी बहुत अच्छी थी. जयललिता 1984-1989 तक राज्यसभा सदस्य बनीं और साथ ही उन्हें पार्टी का प्रचार सचिव भी नियुक्त किया गया.

 

लेकिन साल 1987 में जब रामचंद्रन का निधन हुआ तो अन्नाद्रमुक दो हिस्सों में बंट गई थी. एक धड़े की नेता एमजीआर की विधवा जानकी रामचंद्रन थीं और दूसरे की जयललिता . जयललिता रामचंद्रन की करीबी थीं उन्होंने खुद को रामचंद्रन की विरासत का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था.

 

जयललिता का खेमा ये कहता रहा है कि साल 1989 में डीएमके के एक मंत्री ने विधानसभा में उनके साथ बुरा बर्ताव किया था. जिसके बाद उन्होंने कसम ली थी कि वो विधानसभा मुख्यमंत्री बन कर ही लौटेंगी. इस हंगामे के बाद से जयललिता के विरोध की धुरी करूणानिधि हो गए थे.

 

1991 में वो पहली बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री चुनी गईं. जयललिता ना सिर्फ तमिलनाडु की पहली निर्वाचित महिला मुख्यमंत्री बनीं बल्कि सबसे कम उम्र में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनी.

 

जयललिता ने सख्ती से सरकार चलाने के लिए भी चर्चा में रहीं . 2001 में जब सरकारी कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी थी तो जयललिता ने एक साथ दो लाख कर्मचारियों को ही बर्खास्त कर हलचल मचा दी थी.

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