भ्रष्टाचार मामले में जयललिता को कर्नाटक हाईकोर्ट से नहीं मिली जमानत

By: | Last Updated: Tuesday, 7 October 2014 3:47 PM

बेंगलूर: आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में चार साल की सजा पाने वाली अन्नाद्रमुक प्रमुख जे जयललिता को कर्नाटक हाईकोर्ट से आज फिर राहत नहीं मिली और इस अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी. जयललिता अब इस फैसले को संभवत: कल सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती हैं.

 

खचाखच भरे अदालत कक्ष में अपना फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति एवी चंद्रशेखर ने कहा कि जमानत देने का ‘‘कोई आधार नहीं’’ है. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से ‘‘मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है’’ और इससे आर्थिक असंतुलन पैदा होता है. अदालत का आज का फैसला जयललिता और उनके समर्थकों के लिए झटका है.

 

इससे पहले, विशेष लोक अभियोजक भवानी सिंह ने अदालत से कहा कि उन्हें जयललिता को सशर्त जमानत दिये जाने पर कोई आपत्ति नहीं है.

 

आय से अधिक संपत्ति मामले में विशेष अदालत ने 27 सितंबर को जयललिता को दोषी ठहराया था. इसके बाद से ही वह यहां की जेल में बंद हैं.

 

विशेष लोक अभियोजक का रूख पता चलने के बाद, परप्पाना अग्रहारा जेल के पास और अदालत के बाहर एकत्रित अन्नाद्रमुक के समर्थक उनकी रिहाई का अनुमान लगाकर जश्न मनाने लगे और उन्होंने पटाखे चलाए.

 

लेकिन उनका जश्न ज्यादा समय तक जारी नहीं रहा. जब फैसला सुनाया गया, तो उन्हें इस पर भरोसा नहीं हुआ और वहां मौजूद महिलाएं विलाप करने लगीं जबकि पुरूष नारेबाजी करते हुए जमीन पर लेट गये.

 

इस फैसले के खिलाफ जयललिता के उच्चतम न्यायालय जाने के बारे में पूछे जाने पर जयललिता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने पीटीआई से कहा, ‘‘मेरा मुवक्किल (भविष्य के बारे में) फैसला करेगा.’’

 

हालांकि जयललिता के एक अन्य वकील ने कहा कि उनके पास कल या फिर गुरूवार को उच्चतम न्यायालय की शरण में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.

 

अदालत ने जयललिता की करीबी शशिकला और उनके रिश्तेदारों, दत्तक पुत्र वीएन सुधाकरण और इलावरासी की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दीं. इन लोगों को भी 18 साल पुराने मामले में चार चार साल की सजा हुई है.

 

जेठमलानी ने चारा घोटाले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई राहत वाले फैसले का हवाला देते हुए अपनी दलीलों में 66 वर्षीय जयललिता को तुरंत जमानत दिये जाने की पुरजोर अपील की .

 

हालांकि अदालत ने जेठमलानी की दलीलें स्वीकार नहीं की. न्यायाधीश ने कहा कि लालू प्रसाद ने शीर्ष अदालत द्वारा जमानत मंजूर किये जाने से पहले जेल में 10 महीने गुजारे थे.

 

जेठमलानी ने इससे पहले जयललिता को चार साल के कारावास की सजा सुनाने वाली विशेष अदालत की सजा पर रोक लगाने का भी अनुरोध किया.

 

जेठमलानी ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 389 के तहत अपील लंबित रहने तक सजा पर रोक लगाने का अनुरोध किया.जेठमलानी ने न्यायमूर्ति चंद्रशेखर से कहा कि ‘‘नियमित परंपरा’’ जमानत देने की है.

 

अवकाशपीठ ने एक अक्तूबर को यह मामला आज के लिए स्थगित किया था.जेठमलानी ने कहा कि अपील पर तर्कपूर्ण समयावधि में सुनवाई होनी चाहिए.

 

वरिष्ठ अधिवक्ता ने 66 . 65 करोड़ रूपये के आय से अधिक संपत्ति मामले में विशेष अदालत के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि (जयललिता के मुख्यमंत्री रहते हुए) वर्ष 1991 और 1996 के बीच के समय से पहले की संपत्ति को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता.

 

उन्होंने कहा कि जयललिता के आचरण के बारे में ऐसा कुछ भी खुलासा नहीं हुआ है कि वह फरार हो सकती हैं.

 

शशिकला, सुधाकरण और इलावरासी की ओर से पेश वकील अमित देसाई ने अदालत से कहा कि किसी भी गवाह ने इन तीनों द्वारा संपत्ति अर्जित करने की बात नहीं कही और संदेह सबूत की जगह नहीं ले सकता.

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