आय से अधिक संपत्ति मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने जयललिता को बरी किया

By: | Last Updated: Monday, 11 May 2015 1:37 AM
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चेन्नई/नई दिल्ली: कर्नाटक हाई कोर्ट आज आय से अधिक संपत्ति मामले में AIADMK सुप्रीमो जयललिता को बड़ी राहत दी है. हाईकोर्ट ने जयललिता को इस मामले में बरी कर दिया है. अब जयललिता मुख्यमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ सकती हैं.

 

इस मामले में जयललिता को बंगलौर की विशेष अदालत से चार साल की सज़ा मिली थी. इस सजा की वजह से उन्हें पिछले साल सितम्बर में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा था.

18 साल चले इस मामले में विशेष अदालत का फैसला 27 सितम्बर 2014 को आया था. अदालत ने जयललिता को 4 साल की सज़ा देने के साथ ही उनपर 100 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था. इसके अलावा जयललिता की करीबी सहयोगी शशिकला, शशिकला की भतीजी इल्वारासी और जयललिता के दत्तक पुत्र सुधाकरन को 4 भी साल की कैद और 10-10 करोड़ जुर्माना की सजा मिली थी.

 

जयललिता के आवास के बाहर जश्न

ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) की महासचिव और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे.जयललिता को कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा सोमवार को आय से अधिक संपत्ति मामले में बरी कर दिए जाने की सूचना मिलने के बाद उनके आवास के बाहर जश्न का माहौल है.

 

न्यायालय के इस फैसले से पार्टी कार्यकर्ता खुशी से झूम उठे और उन्होंने पटाखे छोड़े. उन्होंने ‘अम्मा जिंदाबाद’ के नारे लगए और मिठाइयां बांटी.

 

कुछ लोगों ने नारियल फोड़े, जो शुभ काम का प्रतीक होता है. एआईएडीएमके के कार्यकर्ता न्यायालय के फैसले के इंतजार में सुबह से जयललिता के आवास के बाहर जमा हो गए थे.

 

आइये एक नज़र इस पूरे मामले पर डाल लेते हैं :-

ये मामला 1996 में दर्ज हुआ था. तब जयललिता पर आय से 66 करोड़ ज्यादा संपत्ति रखने का आरोप लगा था.

 

उस वक्त जयललिता के घर पर मारे गए छापे में 880 किलो चाँदी, 28 किलो सोना, 10,500 साड़ियां, 750 जोड़ी चप्पलें, 91 कीमती घड़ियाँ और कई दूसरे कीमती सामान ज़ब्त हुए थे.

 

2002 में जयललिता के मुख्यमंत्री बनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामला कर्नाटक ट्रांसफर कर दिया था.
 

इस मामले में जयललिता लगातार ये दलील देती रही हैं कि उनके घर से बरामद दिखाये गए सामान में से निजी इस्तेमाल की चीज़ों को छोड़कर ज़्यादातर सामान उनका नहीं है. साड़ी, चप्पल वगैरह ज्यादा संख्या में होने की वजह उनका फिल्म उद्योग से जुड़ा होना है. 1996 में तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने राजनीतिक दुश्मनी के तहत उन्हें फंसाने के लिए इस तरह का जाल बुना.

 

हालांकि, इन दलीलों को निचली अदालत ठुकरा चुकी है. देखना है कि कर्नाटक हाई कोर्ट इन बातों से सहमत होता है या नहीं.

 

हाई कोर्ट का फैसला आने के दौरान जयललिता खुद चेन्नई में ही रहेंगी. लेकिन उनके समर्थकों के बड़ी संख्या में जुटने की आशंका को देखते हुए बंगलौर पुलिस ने कर्नाटक हाई कोर्ट के 2 किलोमीटर के दायरे में धारा 144 लगा दी है.

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