शर्तों के साथ जयललिता को मिली बेल, समर्थकों ने बवाल किया तो जमानत होगी रद्द

By: | Last Updated: Friday, 17 October 2014 6:57 AM

नई दिल्ली: आय से अधिक संपत्ति मामले में बेंगलुरू जेल में बंद तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे.जयललिता को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है. 

 

सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ जयललिता को जमानत दी है. कोर्ट ने साफ है कि अगर उनके समर्थकों के जरिए हिंसा की जाती है तो उनकी जमानत पर फिर से विचार किया जा सकता है.

 

सुप्रीम कोर्ट ने जयललिता से केस से जुड़े 35000 पन्नों के दस्तावेज़ को 18 दिसंबर तक जमा करने को कहा है.

 

जयललिता के खिलाफ केस दायर करने वाले बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि जयललिता के लिए यह वक़्ती राहत है और उनकी दंड को खत्म नहीं किया गया है. उन्हें खराब सेहत के आधार पर जमानत दी गई है.

 

स्मावी ने आगे कहा, “दंड को सस्पेंड करना है या नहीं इस पर कर्नाटका हाईकोर्ट ने अभी बहस नहीं की है. कोर्ट ने कहा कि सारे अपील के 35 हजार पन्ने के कागजात का पेपर बुक बनाकर 18 दिसंबर को देंगे. कोर्ट ने कहा है कि यदि इस दिन यह पेपरबुक प्रस्तुत नहीं होता तो बेल केंसिल हो जाएगी. जयललिता के वकील ने आश्वासन दिया कि जयललिता पार्टी के सभी लोगों को पत्र लिखेंगी कि किसी तरह की हिंसा नहीं होगी. जज ने कहा कि अगर हिंसा की कोई ऐसी घटना हुई तो जयललिता की बेल केंसिल हो जाएगी. तो अब तमिलनाडु में शांति रखने की जरूरत है.”

 

आपको बता दें कि जयललिता की जमानत हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी. 27 सितंबर को कोर्ट ने जयललिता को जेल भेजा था.

 

आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी पाए जाने पर उन्हें चार साल जेल की सजा सुनाई गई थी. विशेष न्यायाधीश ने 66.65 करोड़ रूपये के भ्रष्टाचार के 18 साल पुराने मामले में जयललिता को 100 करोड़ रूपये के जुर्माने की भी सजा सुनाई थी. विशेष अदालत ने 27 सितंबर को जयललिता को दोषी ठहराया था. इसके बाद से ही वह बेंगलुरू की जेल में बंद हैं.

 

क्या हैं आरोप?

जयललिता पर 1991-96 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद से आय के अज्ञात स्रोतों से 66 करोड़ रुपए अधिक संपत्ति इकट्ठा करने का आरोप है. 1996 में जयललिता के घर में छापे में 896 किलो चांदी, 28 किलो सोना मिला था.

मामले में कई राजनीतिक और कानूनी उतार-चढ़ाव देखने को मिले. उनकी निकट सहयोगी शशिकला नटराजन, उनकी रिश्तेदार इलावरासी, उनके भतीजे और जयललिता द्वारा बेदखल किए जा चुके उनके गोद लिए गए बेटे सुधाकरन समेत अन्य को मामले में आरोपी बनाया गया है.

 

बेंगलूर शहर की पुलिस ने सुरक्षात्मक उपायों के तहत अदालत के फैसले से पहले आपराधिक दंड संहिता की धारा 144 के अंतर्गत निषेधाज्ञा के आदेश लागू कर दिया था.

 

तमिलनाडु सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने इसे चेन्नई की विशेष अदालत में 1996 में केस दायर किया था. इस मामले को वर्ष 2003 में उच्चतम न्यायालय ने उस समय बेंगलूर की विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया था, जब द्रमुक के नेता के. अन्बझगन ने याचिका दायर करके तमिलनाडु में निष्पक्ष सुनवाई पर संदेह जाहिर किया था. उस समय राज्य में जयललिता की सरकार थी.

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Web Title: Jayalalithaa granted bail in disproportionate assets case
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