नेता के साथ ही विद्वान, साहित्यकार और पत्रकार भी थे जे बी पटनायक

By: | Last Updated: Tuesday, 21 April 2015 3:18 PM
JB Patnaik passes away in Tirupati; PM Modi pays tribute

भुवनेश्वर: तीन बार ओड़िशा के मुख्यमंत्री रहे बहुमुखी प्रतिभा के धनी जे बी पटनायक का आज तिरूपति में निधन हो गया. वह एक कुशल नेता के साथ ही विद्वान, साहित्यकार और पत्रकार भी थे.

 

पटनायक चार दशक से अधिक समय तक ओड़िशा के राजनीतिक और साहित्कि परिदृश्य के केंद्र में रहे.

 

साधारण पृष्ठभूमि वाले परिवार से आने वाले पटनायक ने न सिर्फ राजनीति में बल्कि साहित्य, पत्रकारिता और संस्कृति के क्षेत्र में भी अपनी क्षमता साबित की. उन्होंने केंद्रीय मंत्री, तीन बार मुख्यमंत्री और राज्यपाल का भी पद संभाला. वह संस्कृत के भी विद्वान थे.

 

उन्होंने 1967 में शुरू की गयी अपनी प्रसिद्ध ओड़िया पत्रिका ‘‘पौरूष’’ में एक बार लिखा था, ‘‘ दैव्यतम कुले जन्मा, मदायतम च पौरूषम’’ अर्थात समृद्ध परिवार में पैदा होने के बारे में भले ही भगवान फैसला करते हों लेकिन अपनी क्षमता साबित करना खुद पर निर्भर करता है.’’ कहा जा सकता है कि यह उनके खुद के बारे में ही की गयी टिप्पणी है.

 

पटनायक का आज तिरूपति में निधन हो गया. वह अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद जल्दी ही राजनीति में आ गए थे. वह प्रदेश की राजनीति में उस समय भी केंद्र में रहे जब कांग्रेस सत्ता से बाहर थी.

 

कांग्रेस के दिग्गज नेता पटनायक 1980 में मुख्यमंत्री बने और 1989 तक इस पद बने रहे. वह 1995 में फिर सत्ता में लौटे और 1999 तक मुख्यमंत्री बने रहे. उनके समर्थक मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को ‘‘स्वर्णिम दौर’’ मानते हैं और उनका कहना है कि पटनायक के 14 साल के कार्यकाल में राज्य ने चहुंमुखी विकास किया.

 

हालांकि उनके कार्यकाल में कई मामलों को लेकर उनकी आलोचना भी हुयी. इनमें से एक छविरानी हत्या मामला भी शामिल है जो 1980 के दशक में सामने आया था.

 

पटनायक 2004 से 2009 तक ओड़िशा विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे. 2009 में उन्हें असम का राज्यपाल नियुक्त किया गया. इसके पहले वह एक बार केंद्रीय मंत्री भी बनाए गए.

 

उनके करीबी लोगों के अनुसार असम के राज्यपाल के रूप में पटनायक ने मध्य असम के पटबौसी सात्र के कीर्तन घर में महिलाओं के प्रवेश में अहम भूमिका निभायी थी.

 

पटनायक ने साहित्यकार के रूप में ख्याति प्राप्त की और उन्हें केंद्रीय साहित्य अकादमी सहित कई सम्मानों से नवाजा गया. बंकिम चंद्र के उपन्यासों का उन्होंने ‘‘बंकिम चंद्र उपन्यासमाला’’ शीषर्क से ओड़िया में अनुवाद किया.

 

उन्होंने भतृहरि की मशहूर कृति ‘‘ बैराग्य शतक’’ का भी अनुवाद किया. इसके लिए उन्हें ओड़िया साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. पटनायक ने महाभारत, रामायण और श्रीमद्भगवत गीता का भी ओड़िया भाषा में अनुवाद किया.

 

खुर्दा के पास रामेश्वर में तीन जनवरी 1927 को पैदा हुए पटनायक ने 1947 में उत्कल विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक की उपाधि हासिल की. बाद में उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान से स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की.

 

आपको बता दें कि वह अंग्रेजी दैनिक ‘‘ईस्टर्न टाइम्स’’ से भी जुड़े रहे और बाद में इसके संपादक भी बने.

 

असम के मुख्यमंत्री ने पटनायक के निधन पर शोक जताया

 

असम के मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री जेबी पटनायक के निधन पर शोक प्रकट किया गया है.

 

गोगोई ने अपने शोक संदेश में कहा, ‘‘पटनायक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे, जिन्होंने साहित्य, संस्कृति और राजनीति के क्षेत्र में कई दशकों तक बहुमूल्य योगदान दिया.’’ उन्होंने कहा कि वह संस्कृत के विद्वान थे और कई पुस्तकों की रचना का श्रेय उनको जाता है.

 

असम के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘वह एक लोकप्रिय नेता थे, उनको लोगों के कल्याण की बहुत चिंता थी. ओडिशा के विकास और प्रगति में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा. उनके निधन से हुई क्षति की पूर्ति कर पाना बहुत मुश्किल है.’’

 

सोनिया ने जेबी पटनायक के निधन पर शोक जताया

 

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री जेबी पटनायक के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा है कि उनका जीवन लोगों की सेवा में बीता.

 

सोनिया ने अपने शोक संदेश में कहा, ‘‘ओडिशा के तीन बार मुख्यमंत्री, एक बार केंद्रीय मंत्री और राज्यपाल रहते हुए पटनायक का सार्वजनिक जीवन दशकों तक लोगों की सेवा के लिए रहा. वह आखिर तक कांग्रेस सदस्य रहे और उनकी कमी आने वाले कई वषरें तक महसूस की जाएगी.’’ राहुल ने कहा कि पटनायक के जाने से उनको बहुत दुख पहुंचा है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘पटनायक कांग्रेस के दिग्गज नेता थे जिन्होंने तीन बार ओडिशा के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और बाद में राज्यपाल के तौर पर पूरे समर्पण के साथ लोगों की सेवा की. मैं उनके परिवार और प्रियजन के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करता हूं.’’ पटनायक का आज तड़के तिरूपति में निधन हो गया.

 

जेबी राजनीति में समय की कसौटी पर खरे उतरे: नवीन

 

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने जेबी पटनायक को खुद में एक ‘संस्था’ करार देते हुए आज कहा कि दिवंगत नेता राजनीति में समय की हर कसौटी पर खरे उतरे.

 

जेबी पटनायक के निधन पर शोक प्रकट करते हुए नवीन ने कहा, ‘‘मैं पूर्व मुख्यमंत्री, दिग्गज नेता और साहित्य की महान शख्सियत जानकी बल्लव पटनायक के दुखद निधन पर बहुत आहत हूं. ’’

 

उनके जाने को राज्य के लिए बड़ी क्षति करार देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘वह ओडिशा की राजनीति में महान व्यक्ति थे जो अपने राजनीतिक कौशल और प्रशासनिक योग्यता के लिए जाने जाते हैं और राजनीति में समय की कसौटी पर खरे उतरे.’’

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